कांग्रेस का शिवराज सरकार पर हमला, कहा- 'MP में BJP समर्थक अपराधियों को 100 खून माफ'

भोपाल: मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने शिवराज सिंह चौहान की सरकार पर नियम के खिलाफ काम कराने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि एमपी का हाल यह है कि 'अगर अपराधी सत्ताधारी दल का है तो उसे सौ खून माफ है, इसके लिए सरकार की संस्थाओं पर भले ही प्रश्नचिन्ह क्यों न लग जाए.'
'अपराधी अगर बीजेपी का है तो सौ खून माफ है'
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने बैतूल सांसद ज्योति धुर्वे के जाति प्रमाणपत्र के मामले में बीजेपी सरकार द्वारा लिए गए यू-टर्न पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि शिवराज सरकार 'अपराधी अगर बीजेपी का है तो सौ खून माफ है' की तर्ज पर काम कर रही है.
उन्होंने कहा कि ज्योति धुर्वे या केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के अपराध में यही संदेश मुख्यमंत्री ने अपने शासन-प्रशासन को दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि शिवराज सिंह चौहान अपनी सरकार की संस्थाओं की विश्वसनीयता पर खुद प्रश्नचिह्न लगवा रहे हैं और रौब डालकर उनके सही निर्णय को बदलवा रहे हैं.
शासन-प्रशासन में अराजकता का इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं
अजय सिंह ने आगे कहा कि सांसद धुर्वे के मामले में राज्य छानबीन समिति ने जांच कर उनके जाति प्रमाणपत्र को फर्जी माना. अब वही समिति मुख्यमंत्री के दबाव में पुनर्विचार कर कहती है कि कुछ तथ्यों की अनदेखी की गई, इसलिए पूर्व में निकला आदेश निरस्त किया गया. उनके शासन-प्रशासन में अराजकता का इससे बड़ा कोई उदाहरण हो नहीं सकता.
सिंह ने कहा कि यह मामला बेहद संगीन है और लोकतंत्र के स्तंभ विधायिका से जुड़ा हुआ है. कोई व्यक्ति अगर फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर चुनाव लड़ता और जीतता है, तो इससे बड़ा गंभीर मामला हो नहीं सकता. उन्होंने कहा कि राज्य छानबीन समिति में शासन के उच्च अधिकारी हैं, उनके द्वारा लिए गए निर्णय को गलत साबित करना इस बात का द्योतक है कि पूरी शिवराज सरकार किस तरह सही निर्णय को बदलने में लगी है.
जिला प्रशासन पर दबाव डालकर दिलवा दी क्लीनचिट
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पिछले सात दिन में यह दूसरा उदाहरण है, जब शिवराज ने बीजेपी से जुड़े नेताओं के मामले में शासन-प्रशासन पर दबाव डालकर सही को गलत करवाया है. उमरिया जिले में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के मामले में भी मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासकीय स्कूल की जमीन हड़पने के मामले में जिला प्रशासन पर दबाव डालकर तीन-चार घंटे में ही उन्हें क्लीनचिट दिलवा दी.
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सबसे गंभीर बात यह है कि गलत काम सीधे उस मुख्यमंत्री के दबाव में हो रहा है, जो अपने को ईमानदार और अपनी सरकार में सुशासन होने का दावा करता है, जबकि दोनों प्रकरणों में सुशासन को पलीता मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही लगाया गया है, जो शर्मनाक है.
Source: IOCL

























