दिल्ली चुनाव प्रचार के क्लाइमेक्स के लिए कांग्रेस का एक्शन प्लान
प्रचार के आखिरी के पांच दिनों में कांग्रेस दमखम के साथ रैलियां और रोड शो करेगी. सूत्रों के मुताबिक 2 से 6 फरवरी के बीच कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व चुनाव प्रचार में उतरेगा.

नई दिल्ली: दिल्ली चुनाव में जहां एक तरफ सत्ताधारी आम आदमी पार्टी और बीजेपी के नेता धुआंधार प्रचार करने में जुटे हुए हैं, वहीं प्रचार के मामले में पीछे दिख रही कांग्रेस पार्टी ने आखिरी दौर में अपनी पूरी ताकत झोंकने की रणनीति बनाई है. प्रचार के आखिरी के पांच दिनों में कांग्रेस दमखम के साथ रैलियां और रोड शो करेगी. सूत्रों के मुताबिक 2 से 6 फरवरी के बीच कांग्रेस शीर्ष नेतृत्व चुनाव प्रचार में उतरेगा. पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी की सभाएं और प्रियंका गांधी के रोड शो की तैयारी की जा रही है. हालांकि दूसरी पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व के मुकाबले गांधी परिवार सीमित प्रचार करेगा.
इसके अलावा कांग्रेस शाषित राज्यों के मुख्यमंत्री भी चुनाव प्रचार के लिए आएंगे. एक सूत्र के मुताबिक पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह तीन दिनों तक दिल्ली में प्रचार करेंगे. अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, सचिन पायलट जैसे नेता भी दिल्ली में कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए वोट मांगेंगे.
सकारात्मक होगा कांग्रेस का प्रचार
लेकिन चुनाव प्रचार में हो रही देरी से कांग्रेस को नुकसान नहीं होगा? पार्टी के एक नेता ने जवाब दिया कि "ऐसा सोची समझी चुनावी रणनीति के तहत किया जा रहा है. जहां आप और बीजेपी के नेता केवल आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति कर रहे हैं ऐसे में आखिरी वक्त जिसे प्रचार का 'गोल्डन पीरियड' माना जाता है उस वक्त हम जनता के बीच मुद्दों और उनके समाधान की बात करते हुए वोट मांगेंगे". उन्होंने बताया कि हमारा प्रचार सकारात्मक होगा.
एक दर्जन मंत्री, 100 विधायकों की फौज बुलाई गई
इस बीच कांग्रेस ने दूसरे राज्यों से नेताओं की फौज बुलाकर दिल्ली में महत्वपूर्ण चुनावी जिम्मेदारियां दे दी है. कांग्रेस शासित राज्यों के दर्जन भर से ज्यादा मंत्रियों को एक-एक जिले का पर्यवेक्षक बनाया गया है. वहीं दूसरे राज्यों से 100 से ज्यादा विधायकों को दिल्ली बुलाकर सभी सभी 70 विधानसभाओं में पर्यवेक्षक नियुक्त कर दिया गया है. हरियाणा से सटी बाहरी दिल्ली की सीटों की जिम्मेदारी हरियाणा और राजस्थान के विधायकों को दी गई है वहीं पूर्वांचल के प्रभाव वाली सीटों पर बिहार और यूपी के विधायक तैनात किए गए हैं. पंजाबी मतदाता बहुल सीटों पर पंजाब के विधायकों को चुनावी प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
पिछले दो दिनों में कांग्रेस के बड़े नेताओं ने पार्टी के अल्पसंख्यक और दलित विभाग के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर आरक्षित और मुस्लिम बहुल सीटों को लेकर विशेष फोकस रखने के निर्देश दिए हैं.
कांग्रेस 31 जनवरी को जारी कर सकती है घोषणापत्र
आपको बता दें कि कांग्रेस ने अपना घोषणापत्र तैयार कर लिया है जिसे 31 जनवरी को जारी कर सकती है. पार्टी ने दिल्ली चुनाव के लिए "कांग्रेस वाली दिल्ली, खुशहाल दिल्ली" का नारा दिया है. दिल्ली में 8 फरवरी को वोट डाले जाएंगे और नतीजे 11 फरवरी को आएंगे.
Source: IOCL


























