Caste Census: क्या जातिगत जनगणना पर बड़ा खेल करने जा रही है बीजेपी? यूपी से आया संकेत
यूपी में सपा ने अगला बनाम पिछड़ा की गोलबंदी के बहाने बीजेपी को घेरने की रणनीति बनाई है. अब बीजेपी ने भी इसका काउंटर करते हुए जाति जनगणना पर बड़ा संकेत दिया है.

Caste Census In UP: रामचरितमानस को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य के विवादित बयान हो या फिर जाति जनगणना को लेकर लेकर सपा मुखिया अखिलेश यादव की ताजा मांग, ये साफ हो रहा है कि यूपी में जातियों का चक्रव्यूह रचकर बीजेपी के रथ को रोकने की तैयारी हो रही है. बीजेपी भी इन बयानों की गंभीरता समझ रही है. उसने इसके काउंटर की तैयारी शुरू कर दी है. राज्य में बीजेपी का बड़ा ओबीसी चेहरा और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जाति जनगणना को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि उनकी पार्टी इसके खिलाफ नहीं है. केशव मौर्य के इस बयान के लिए संकेत निकलने शुरू हो चुके हैं.
हाल ही में समाजवादी पार्टी के प्रमुख और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने जाति जनगणना के पक्ष में बयान दिया था. अखिलेश यादव ने कहा था कि देश में बहुत सारे दल हैं, जो जातीय जनगणना चाहते हैं. समाजवादी पार्टी आने वाले समय में गांव -गांव जाकर इसके लिए जागरूक करेगी. सपा मुखिया के बयान को राज्य में जातीय गोलबंदी की कोशिश के रूप में देखा गया था.
मौर्य ने बताया मोदी विरोधी अभियान
सपा के इस मांग पर बीजेपी नेता केशव मौर्य ने पलटवार किया. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए डिप्टी सीएम ने कहा, “वे (सपा) तब चुप थे, जब यूपी में सपा खुद शासन कर रही थी और सपा के समर्थन से कांग्रेस केंद्र में राज कर रही थी. वर्तमान में वे जो मांग उठा रहे हैं, वह केवल मोदी विरोधी अभियान है." मौर्य ने कहा कि जनता ऐसी मांगों को खारिज करती है. पीएम मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार पिछड़ों, दलितों, अनुसूचित जातियों और सामान्य वर्ग के गरीब लोगों के हित में काम कर रही है.
मौर्य ने आगे कहा, “जब सपा सत्ता में थी, तो उन्होंने केवल अपनी जाति और कुछ जिलों से भर्ती की थी. वे केवल अपनी जाति को ही पिछड़ी जाति मानते थे. वर्तमान में सभी पिछड़ी जातियों के उम्मीदवार भर्ती हो रहे हैं.”
सपा फिर से अगला बनाम पिछड़ा एजेंडे पर
2022 में हुए यूपी विधानसभा चुनावों में सपा के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन ने ये मुद्दा उठाया था. अखिलेश यादव ने वादा किया था कि सरकार में आने पर तीन महीने के अंदर जाति सर्वेक्षण किया जाएगा. हालांकि, अखिलेश सरकार नहीं बना सके और सपा ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया था.
जाति जनगणना का मामला एक बार फिर से सुर्खियों में आया जब स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस को लेकर विवादित बयान दिया. स्वामी प्रसाद मौर्य को अखिलेश यादव ने रोका नहीं. बल्कि, कुछ ही दिनों में गठित कार्यकारिणी में उन्हें बड़ा पद देते हुए राष्ट्रीय महासचिव बना दिया गया. इसके साथ ही अखिलेश यादव ने जाति जनगणना की मांग को फिर से हवा दे दी.
क्या है बीजेपी की रणनीति?
सपा की इस मांग को लेकर बीजेपी की रणनीति वेट एंट वाच की है. बिना नाम लिए एक बीजेपी नेता के हवाले से एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर सरकार जाति जनगणना का आदेश दे सकती है. हालांकि, बीजेपी नेता का दावा है कि यह सपा को ही नुकसान पहुंचाएगा क्योंकि खुलासा हो जाएगा कि किस तरह से सपा ने अपनी सरकार के दौरान सिर्फ एक जाति का पक्ष लिया.
पुराने सहयोगी क्या कहते हैं?
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) राज्य में बीजेपी और सपा दोनों की सहयोगी रही है. उसका कहना है सपा और भाजपा को जातिगत जनगणना में कोई दिलचस्पी नहीं थी, क्योंकि उन्हें डर था कि नतीजे उनके ओबीसी वोट बैंक पर असर डाल सकते हैं. पार्टी के प्रधान महासचिव अरविंद राजभर का कहना है कि यही वजह है कि भाजपा वर्तमान में जातिगत जनगणना से बच रही है और जब सपा की सरकार थी तब उसने जनगणना का आदेश नहीं दिया था.
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Source: IOCL























