VVPAT: अगले लोकसभा चुनाव में वोट डालने का मिलेगा सबूत

नई दिल्ली: केंद्रीय कैबिनेट ने आने वाले चुनाव के लिए पेपर ट्रेल मशीनों की खरीद के चुनाव आयोग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी. इस फैसले के बाद अब तय हो गया है कि 2019 का लोकसभा चुनाव ईवीएम के साथ वीवीपीएटी लगी मशीनों के साथ ही होगा. सरकार का यह फैसला ऐसे समय में आया है विपक्ष ईवीएम के साथ पेपर ट्रेल मशीन के इस्तेमाल की मांग कर रहा है.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में चर्चा के बाद 16 लाख वीवीपीएटी मशीनों की खरीद के लिए 3,174 करोड़ रूपये की मंजूरी दे दी गई. चुनाव को यह रकम दो किस्तों 1,009 करोड़ रूपये और 9,200 करोड़ रूपये में दी जाएगी.
जून 2014 के बाद से चुनाव आयोग ने सरकार को वीवीपीएटी मशीनों की खरीद के लिए पैसा देने के लिए 11 बार याद दिलाया. पिछले साल चुनाव आयुक्त एसएनए जैदी ने प्रधानमंत्री का ध्यान इस ओर दिलाया था.
सुप्रीम कोर्ट ने भी आयोग को यह बताने को कहा था कि वह कब तक सभी मतदान केंद्रों में वीवीपीएटी मशीनों का उपयोग कर सकती है. आयोग ने कहा है कि 16 लाख वीवीपीएटी के निर्माण के लिए 30 महीने का वक्त लगेगा.
16 राजनीतिक दलों ने हाल ही में चुनाव आयोग से पेपर बैलेट प्रणाली लागू करने को कहा था. बीएसपी, आप, कांग्रेस ने ईवीएम में कथित छेड़छाड़ के मुद्दे पर चुनाव आयोग पर निशाना साधा था.
क्या है वीवीपीएटी मशीन और कैसे करती है काम ? वीवीपीएटी एक खास किस्म की मशीन है जिसे ईवीएम के साथ अटैच किया जातै है. इसके जरिए वोटर को उसके वोट का फीडबैक दिया है कि पार्टी या उम्मीदवार को उसने वोट दिया, उसी को वोट गया है या नहीं.
वोट डालने के 10 सेकंड बाद इसमें से एक पर्ची निकलती है। इस पर्ची पर सीरियल नंबर, नाम और उस कैंडिडेट का इलेक्शन सिम्बल होता है, जिसे वोटर ने वोट दिया है. यह पर्ची सिर्फ दस सेकेंड के लिए दिखती है, इसके बाद मशीन में लगे एक्स में चली जाती है.
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