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कैसे तैयार की जाती है कोरोना की जांच रिपोर्ट, क्या है प्रक्रिया और कितना लगता है वक्त, यहां जानिए सब कुछ

RMRI अस्पताल का वियोरोलोजी लैब बिहार का पहला लैब है. यहीं डाटा आता है, उसके बाद सैम्पल आते हैं फिर उन्हें अलग अलग कमरे में रखा जाता है, जिसे आरएनए कहते हैं.

पटना: देश के अलग अलग हिस्सों से स्वास्थ्यकर्मियों से बदसलूकी की तस्वीरें आ रही हैं. कहीं मेडिकल टीम पर पत्थरबाज़ी, तो कहीं महिला स्वास्थ्यकर्मियों से बदसलूकी. ये घटनाएं हैरान और दुखी कर देने वाली हैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जो अपनी जान की परवाह किए बग़ैर दूसरों की सेवा में लगे हुए हैं, उनसे बदतमीजी या उनपर हमला क्यों किया जा रहा है? इन सवालों के बीच एबीपी न्यूज़ की टीम ने वायरोलॉजी लैब जाकर जाना कि मौत के ख़तरों के बीच रहकर कोरोना की जांच करना और रिपोर्ट तैयार करना कितना मुश्किल है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ बिहार में फिलहाल कोरोना पॉजिटिव लोगों की संख्या 29 है. RMRI अस्पताल बिहार का सबसे पहला अस्पताल है, जहां कोरोना मरीज़ों या संदिग्धों के सैम्पल की जांच शुरू हुई. सैंपल जांच की प्रक्रिया जानने एबीपी न्यूज़ अस्पताल पहुंचा. निदेशक प्रदीप दास के साथ एबीपी न्यूज़ के पत्रकार वायरोलॉजी लैब गए जहां, सैंपल कलेक्शन के बाद जांच की प्रक्रिया शुरू होती है.

क्या है जांच की प्रक्रिया?

पहले सैंपल को अलग यूनिट में खोला जाता है, जो फॉर्म वहां से भर कर आते हैं, उसे यहां लाइन लिस्ट करते हैं. एक प्लेट में 46 सैंपल की जांच हो सकती है.

उसके बाद सिस्टम में डेटा फ़ीड किया जाता है. सभी चीजें पेसेंट की लिस्ट में दी गई होती हैं, जैसे कि उनकी ट्रैवल हिस्ट्री आदि.

बॉक्स को टेस्ट में लगाने के बाद ये रिकॉर्ड के लिए अलग रखा जाता है. एक बॉक्स में टेस्टिंग किट होती थी, जिसे माइनस 20 डिग्री के तापमान पर रखा गया था.

लैब में टेस्ट करने वालों ने बताया कि 360 टेस्ट एक दिन में करने का लक्ष्य है, उससे अधिक भी करते हैं. पूरी रिपोर्ट आने में कम से कम 10 घंटे लगेंगे.

रिपोर्ट कैसे तैयार की जाती है?

सैम्पल को आरएनए में बदलते हैं, इससे वो इंफेक्शन फ्री हो जाता है. इसके बाद उसे पीसीआर में लगाते हैं फिर उसे अर्काइव में लगाते है. फिर आरएनए को लगाया जाता है, जो आरएनए तैयार होते हैं उन्हें अलग रखते हैं, आरएनए को दो अलग अलग कमरों में टेस्ट किया जाता है. रियल टाइम पीसीआर मशीन से पता चलता है कि पेसेंट पॉजिटिव है या निगेटिव.

क्या बिहार में जांच ठीक से नहीं की जा रही है ?

देश के अन्य बड़े राज्यों के मुक़ाबले बिहार में कोरोना मरीज़ों की संख्या काफी कम है. ऐसे में जांच प्रक्रिया पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं. जांच कम संख्या में हो रही है? हमने लोगों के इस सवाल का जवाब जानना चाहा. डॉ प्रदीप दास ने हमें स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं है. अब तक 1900 जांच हुई है और अगर और होगी तो हम एक दिन में 500 सैम्पल की जांच कर सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने हमें बताया कि बिहार में उस तरह की भयावह स्थिति नहीं है. हमने पहले ही सबक़ ले लिया है, जिसकी वजह से अभी स्टेज थ्री में नही है.

RMRI अस्पताल का वियोरोलोजी लैब बिहार का पहला लैब है. यहीं डाटा आता है, उसके बाद सैम्पल आते हैं फिर उन्हें अलग अलग कमरे में रखा जाता है, जिसे आरएनए कहते हैं. यहां आरएनए अट्रैक्शन के तीन रूम हैं. सैम्पल आने के बाद यहां 22 तरह के टेस्ट किये जाते हैं. इसमें कल्चर फैसिलिटी रूम है, जहां सैम्पल कलेक्ट की जाती है. डॉक्टर की मानें तो RMRI में चार पीसीआर मशीन है. यहां सैनिटाइज़ करने का खास खयाल रखा जाता है. क्योंकि संक्रमण का ख़तरा लैब में ज़्यादा होता है. पीपीई किट पहनकर तीन घंटे से ज़्यादा काम करना बेहद मुश्किल भरा होता है. लैब में मौजूद डॉक्टर्स के मुताबिक़ सुबह में 8 बजे यहां टीम आती है और पूरा दिन काम करती है. रात के आठ बजे फिर दूसरी टीम पहुंचती है. रोटेशन बेसिस पर लगातार काम चलता है.

RNA एक्सट्रैक्शन में लगता है वक़्त आरएनए एक्सट्रैक्शन करने में 3 घन्टे लगते हैं. लैब वालों के मुताबिक रात के 12 बजे और 2 बजे तक सैम्पल आते हैं. डॉक्टर के मुताबिक़ जांच गलत न हो, इसके लिए थोड़ा समय लगता है. कुल मिलाकर सैम्पल से रिपोर्ट तैयार करने में सात से साढ़े सात घंटे का वक़्त लगता है.

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