Coronavirus: नौसैनिकों को दी जा रही है बैटल फील्ड नर्सिंग ट्रेनिंग, इमरजेंसी में डॉक्टरों की करेंगे मदद
दिल्ली के नरेला में भी स्टाफ की कमी के चलते सेना के डॉक्टर्स की टीम हुई तैनात. ऐसी ही इमरजेंसी के दौरान तैनात किए जाएंगे बैटल फील्ड ट्रेनिंग लेने वाले सैनिक.

नई दिल्ली: कोरोना वायरस इमरजेंसी से लड़ने के लिए नौसेना ने अब नॉन मेडिकल नौ सैनिकों को भी 'बैटल-फील्ड नर्सिंग असिस्टेंट ट्रेनिंग' देनी शुरू कर दी है. पहले चरण में 333 नौसैनिकों की ट्रेनिंग कोच्चि स्थित दक्षिणी कमान में शुरू हो गई है. नौसेना के प्रवक्ता के मुताबिक इस बैटल फील्ड नर्सिंग असिस्टेंट ट्रेनिंग के दौरान नौसैनिकों को पीपीई बॉडी-सूट पहनना, हाथों को सैनेटाइज करना, मरीजों को स्ट्रेचर पर ले जाना इत्यादि सिखाया जा रहा है. बैटल फील्ड ट्रैनिंग खुद नौसेना के कोच्चि स्थित आईएनएस संजीवनी हॉस्पिटल के कमांड मेडिकल ऑफिसर (सीएमओ) के नेतृत्व में दी जा रही है.
आपको बता दें कि देश में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में इस इस से इनकार नहीं किया जा सकता है कि स्थानीय प्रशासन और सेना के डॉक्टर, नर्स और दूसरे पैरा मेडिकल स्टाफ़ की कमी हो सकती है. यही वजह है कि नौसेना ने नॉन मेडिकल स्टाफ को भी नर्सिंग असिस्टेंट की ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी है. पूरे दक्षिणी कमान में इसकी ट्रेनिंग शुरू हो गई है. जानकारी के मुताबिक, सेना के तीनों अंगों यानि थल सेना, वायु सेना और नौ सेना के देशभर में करीब 08 हजार डॉक्टर हैं. लेकिन अगर महामारी बड़े पैमाने पर फैली तो सेना का मेडिकल स्टाफ भी कम पड़ सकता है.
गौरतलब है कि शुक्रवार को ही राजधानी दिल्ली स्थित नरेला क्वारंटाइन सेंटर में सिविल डॉक्टरों की कमी के चलते सेना के चार डॉक्टर और आठ अन्य मेडिकल स्टाफ को तैनात करना पड़ा था. नरेला स्थित इस सेंटर में निजामुद्दीन मरकज़ से निकाले गए तब्लीगी जमात के 1200 सदस्यों को रखा गया है. इस सेंटर में 16 सिविल डॉक्टर्स पहले से ही मौजूद थे.
वहीं डीआरडीओ के अहमदनगर, महाराष्ट्र में स्थित वीआरडीई लैब ने वायरस को शरीर के ऊपरी हिस्सों से साफ करने के लिए खास फुलबॉडी डिसइंफेक्टेंट चैंबर (एनक्लोज़र) तैयार किए हैं. इस चैंबर में सैनेटाइजर और सोप-डिस्पेंसर तो होता ही है हाथ साफ करने के लिए साथ ही पाइप्स में सोडियम-क्लोराइड होता है जो फुहार की तरह पूरे शरीर पर 25 सेकेंड के लिए छिड़काव करता है.
इस चैंबर की 700 लीटर की क्षमता है और 650 लोगों को डिसइंफेक्ट कर सकता है. इस तरह के चैंबर को अस्पताल, सेना के कैंप, ऑफिस और मॉल इत्यादि के बाहर लगाया सकता है. इसके प्रोडक्शन के लिए डीआरडीओ ने गाजियाबाद स्थित एक फैक्ट्री को चुना है.
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