केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे बंडी भागीरथ ने किया सरेंडर, POCSO के आरोपी बेटे को पिता ने खुद पुलिस को सौंपा
बंदी संजय अपने बेटे को अपने पारिवारिक वकीलों की मौजूदगी में पुलिस थाने ले आए. इसके बाद वकीलों ने औपचारिक रूप से भागीरथ को पुलिस के हवाले कर दिया.

केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार के बेटे बंडी भागीरथ ने POCSO मामले में शनिवार (16 मई 2026) को पुलिस के सामने सरेंडर किया. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने स्वीकार किया है कि उनका बेटा बंदी साई भागीरथ, जो POCSO मामले में आरोपी है, पूरे समय उनके साथ ही था. केंद्रीय मंत्री खुद अपने बेटे को लेकर आए और वकीलों के ज़रिए उसे पुलिस के हवाले कर दिया. इस कबूलनामे ने इस बात पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि पुलिस ने फरार आरोपी को पनाह देने के लिए खुद केंद्रीय मंत्री को गिरफ्तार क्यों नहीं किया.
बंदी संजय ने माना कि उनका बेटा उनके साथ ही था
यह मामला केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे बंदी साई भागीरथ से जुड़ा है. भागीरथ साइबराबाद के पेटबशीराबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज POCSO मामले में मुख्य आरोपी हैं. उसके पिता बंदी संजय केंद्रीय मंत्री हैं और गृह राज्य मंत्री के तौर पर गृह मंत्रालय का प्रभार भी संभालते हैं. बंदी संजय ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि मामला दर्ज होने के बाद उनका बेटा उनके साथ ही था. उन्होंने कहा, "जैसे ही POCSO मामले में शिकायत आई, मैं उसे पुलिस स्टेशन में सौंपना चाहता था, लेकिन हमने अपने वकीलों से सलाह ली और उन्हें हमारे पास मौजूद सबूत दिखाए."
वकीलों ने कहा कि मामला खारिज हो जाएगा और जमानत पक्का मिल जाएगा इसीलिए इसमें कुछ देरी हुई. उन्होंने आगे कहा, "आज भी वकील कह रहे हैं कि जमानत मिल जाएगी. हालांकि, यह सोचकर कि और देरी करना ठीक नहीं है, मैं अपने बेटे को ले आया और वकीलों के जरिए उसे पूछताछ के लिए पुलिस के हवाले कर दिया." पुलिस ने तीन दिन पहले भागीरथ को नोटिस जारी किए थे. कई दिनों तक फरार रहने के बाद केंद्रीय मंत्री ने आखिरकार अपने बेटे को पुलिस के सामने पेश कर दिया.
हाई कोर्ट ने जमानत देने से किया था इनकार
बंदी संजय ने अपने बेटे को तेलंगाना के साइबराबाद स्थित पेटबशीराबाद पुलिस स्टेशन में पुलिस के हवाले किया. बाद में उन्होंने उसी जगह से मीडिया को संबोधित किया. उन्होंने ने दावा किया कि वह अपने बेटे को केवल कानूनी सलाह पर ही बचा रहे थे. उन्होंने कहा कि उनके वकीलों ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि मामला खारिज हो जाएगा और जमानत मिल जाएगी, लेकिन तेलंगाना हाई कोर्ट द्वारा अंतरिम सुरक्षा देने से इनकार करने के बाद और विपक्ष के दबाव में आकर उन्होंने अपने बेटे को पुलिस के हवाले करने का फैसला किया.
बंदी संजय अपने बेटे को अपने पारिवारिक वकीलों की मौजूदगी में पुलिस थाने ले आए. इसके बाद वकीलों ने औपचारिक रूप से भागीरथ को पुलिस के हवाले कर दिया. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और अब उसे अदालत के सामने पेश करने की तैयारी कर रही है. मंत्री का यह स्वीकार करना कि वह अपने बेटे को छिपा रहे थे, अब एक अलग कानूनी मुद्दा बन गया है. विपक्षी नेता मांग कर रहे हैं कि पुलिस बंदी संजय के खिलाफ एक आरोपी को पनाह देने के आरोप में मामला दर्ज करे.
Source: IOCL

























