एक्सप्लोरर

Xप्लेन: भारत में प्लास्टिक कचरे का बढ़ता संकट, पैकेजिंग क्यों है सबसे बड़ी वजह?

भारत में हर वर्ष लगभग 3.90 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है. यह औसतन 10,689 टन प्रतिदिन के बराबर है.

भारत के खाद्य सुरक्षा नियामक फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने पैकेजिंग नियमों में संशोधन करते हुए पान मसाला की प्लास्टिक और प्लास्टिक-लैमिनेटेड पैकेजिंग पर प्रतिबंध लगा दिया है. नए नियमों के अनुसार अब पान मसाला की पैकेजिंग केवल कागज, पेपरबोर्ड, सेल्यूलोज या अन्य प्राकृतिक सामग्री में ही की जा सकेगी. इसमें पॉलीइथिलीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलिएस्टर, PVC, अन्य सिंथेटिक पॉलिमर, को-पॉलिमर, लैमिनेट, एल्युमीनियम फॉयल और मेटलाइज्ड लेयर के उपयोग पर रोक होगी. हालांकि टिन और कांच के कंटेनर पहले की तरह इस्तेमाल किए जा सकेंगे.

यह संशोधन Food Safety and Standards (Packaging) Amendment Regulations, 2026 के तहत अधिसूचित किया गया है और राजपत्र में प्रकाशित होने की तारीख से लागू होगा. साथ ही पैकेजिंग को प्लास्टिक रूल मैनेजमेंट, 2016 का भी पालन करना होगा.

भारत में प्लास्टिक कचरे की स्थिति

भारत में हर वर्ष लगभग 3.90 मिलियन टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है. यह औसतन 10,689 टन प्रतिदिन के बराबर है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इसका केवल करीब 60 प्रतिशत ही रीसाइकिल हो पाता है, जबकि शेष 1.65 मिलियन टन कचरा लैंडफिल, खुले डंपिंग ग्राउंड, जलाने या पर्यावरण में फैलने के रूप में समाप्त होता है.


Xप्लेन: भारत में प्लास्टिक कचरे का बढ़ता संकट, पैकेजिंग क्यों है सबसे बड़ी वजह?

प्लास्टिक कचरे में लगातार वृद्धि की सबसे बड़ी वजह पैकेजिंग, परिवहन, ई-कॉमर्स, रिटेल और विनिर्माण क्षेत्रों में प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग है. विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक प्लास्टिक कचरा सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक हो सकता है क्योंकि अनौपचारिक क्षेत्र और बिखरे हुए कचरे का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होता.

बाकी प्लास्टिक कचरे का क्या होता है?

रीसाइकिल न होने वाला प्लास्टिक कई रास्तों से पर्यावरण में पहुंचता है.

-एक बड़ा हिस्सा लैंडफिल और डंपिंग ग्राउंड में चला जाता है.
-कुछ प्लास्टिक को जला दिया जाता है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ता है.
-काफी मात्रा में प्लास्टिक नालियों, नदियों और सार्वजनिक स्थानों पर फैल जाता है.
-मल्टीलेयर और गंदे प्लास्टिक को अलग करना और दोबारा उपयोग में लाना सबसे कठिन होता है.

इसी कारण शोधकर्ताओं द्वारा किए गए Material Flow Analysis में प्लास्टिक की वास्तविक मात्रा सरकारी रिकॉर्ड से अधिक पाई जाती है.

सबसे ज्यादा प्लास्टिक किन सेक्टरों में इस्तेमाल होता है?

भारत में प्लास्टिक की मांग मुख्य रूप से इन क्षेत्रों से आती है:

-पैकेजिंग – 30%
-टेक्सटाइल – 17%
-बिल्डिंग एवं कंस्ट्रक्शन – 16%


Xप्लेन: भारत में प्लास्टिक कचरे का बढ़ता संकट, पैकेजिंग क्यों है सबसे बड़ी वजह?

इनमें पैकेजिंग सबसे बड़ा उपभोक्ता है और यही सबसे अधिक प्लास्टिक कचरा भी पैदा करती है.

पैकेजिंग इंडस्ट्री सबसे बड़ा स्रोत क्यों है?

भारत में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा पैकेजिंग में जाता है. पैकेजिंग का अधिकांश भाग उपयोग के तुरंत बाद कचरे में बदल जाता है. सबसे अधिक इस्तेमाल फ्लेक्सिबल प्लास्टिक पैकेजिंग का होता है, जिसमें शामिल हैं:

प्लास्टिक फिल्म, पाउच, रैपर, लाइनर और कैरी बैग. ये हल्के, सस्ते और परिवहन के लिए सुविधाजनक होते हैं, लेकिन इनका जीवनकाल बहुत छोटा होता है.

फ्लेक्सिबल पैकेजिंग सबसे बड़ी चुनौती क्यों?

फ्लेक्सिबल प्लास्टिक का अधिकांश हिस्सा केवल एक बार इस्तेमाल होता है. उदाहरण के लिए स्नैक पैकेट, शैम्पू सैशे, डिटर्जेंट पाउच, खाद्य पदार्थों के रैपर आदि. इन्हें खोलने के तुरंत बाद फेंक दिया जाता है. यही कारण है कि पोस्ट-कंज्यूमर प्लास्टिक कचरे का बड़ा हिस्सा इसी श्रेणी से आता है.

CPCB के आंकड़ों की सीमाएं

सरकारी आंकड़ों में मुख्य रूप से वही प्लास्टिक शामिल होता है जो औपचारिक कचरा प्रबंधन प्रणाली तक पहुंचता है. हालांकि कई प्रकार का प्लास्टिक अनौपचारिक क्षेत्र, ग्रामीण क्षेत्रों में दर्ज ही नहीं हो पाता, इसलिए वास्तविक प्लास्टिक कचरा आधिकारिक आंकड़ों से अधिक हो सकता है.

ई-कॉमर्स ने समस्या क्यों बढ़ाई?

ऑनलाइन खरीदारी बढ़ने के साथ पैकेजिंग कचरा भी तेजी से बढ़ा है. एक सामान्य ऑनलाइन डिलीवरी में शामिल होते हैं-पॉली मेलर, प्लास्टिक रैप, टेप, लेबल,अतिरिक्त पैकेजिंग आदि. हर ऑर्डर के साथ नया प्लास्टिक कचरा पैदा होता है. भारत का ई-कॉमर्स बाजार लगातार बढ़ रहा है, इसलिए पैकेजिंग कचरे की मात्रा भी बढ़ती जा रही है.

टेक्सटाइल इंडस्ट्री: प्लास्टिक का छिपा हुआ बड़ा उपभोक्ता

जब प्लास्टिक कचरे की बात होती है, तो सबसे पहले दिमाग में प्लास्टिक बैग, बोतलें या रैपर आते हैं. लेकिन वस्त्र उद्योग (टेक्सटाइल सेक्टर) भी प्लास्टिक का एक बड़ा उपभोक्ता है, हालांकि यह पहली नजर में दिखाई नहीं देता.

मटीरियल फ्लो एनालिसिस (MFA) के अनुसार, भारत में प्लास्टिक की कुल खपत का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा टेक्सटाइल सेक्टर से जुड़ा है.  यहां प्लास्टिक का मतलब मुख्य रूप से पॉलिएस्टर, नायलॉन और अन्य सिंथेटिक फाइबर से है. ये प्राकृतिक रेशे नहीं, बल्कि पॉलिमर आधारित सामग्री हैं.

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) के अनुसार, आज दुनिया में बनने वाले 60 प्रतिशत से अधिक नए कपड़ों में किसी न किसी रूप में प्लास्टिक आधारित फाइबर का इस्तेमाल होता है. सस्ते, टिकाऊ और बड़े पैमाने पर उत्पादन की सुविधा के कारण पॉलिएस्टर सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला सिंथेटिक फाइबर बन चुका है.

हालांकि इन कपड़ों की उम्र खत्म होने पर यही सामग्री लैंडफिल में पहुंचती है या माइक्रोप्लास्टिक के रूप में पर्यावरण में फैलने लगती है. यही वजह है कि पैकेजिंग के बाद टेक्सटाइल भी प्लास्टिक कचरे की समस्या का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है.

कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर: लंबे समय बाद बनने वाला प्लास्टिक कचरा

कंस्ट्रक्शन सेक्टर से रोजमर्रा में दिखाई देने वाला प्लास्टिक कचरा अपेक्षाकृत कम निकलता है, लेकिन यह प्लास्टिक का एक विशाल भंडार तैयार करता है, जो वर्षों तक इमारतों और बुनियादी ढांचे का हिस्सा बना रहता है.

MFA के अनुसार, भारत में प्लास्टिक की कुल खपत का लगभग 16 प्रतिशत हिस्सा भवन निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र से आता है.

इस क्षेत्र में प्लास्टिक का उपयोग मुख्य रूप से पाइप और फिटिंग, विद्युत वायरिंग का इंसुलेशन, वॉटरप्रूफिंग लेयर, थर्मल इंसुलेशन शीट और  अन्य निर्माण सामग्री में किया जाता है.

पैकेजिंग की तरह यह प्लास्टिक तुरंत कचरा नहीं बनता. यह तब बाहर आता है जब इमारतों की मरम्मत, पुनर्निर्माण या ध्वस्तीकरण (Demolition) होता है.

समस्या यह है कि निर्माण से निकलने वाला प्लास्टिक अक्सर कंक्रीट, धूल, धातु और अन्य निर्माण सामग्री के साथ मिश्रित होता है. ऐसे मिश्रित कचरे को अलग करना और रीसाइकिल करना काफी कठिन होता है.

यही कारण है कि आज बनाया जा रहा इंफ्रास्ट्रक्चर भविष्य में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक कचरे का स्रोत बन सकता है.

समाधान केवल रीसाइक्लिंग नहीं

अगर पूरे परिदृश्य को देखें तो तस्वीर साफ दिखाई देती है. सबसे बड़ा योगदान पैकेजिंग सेक्टर का है, क्योंकि यहां प्लास्टिक का सबसे अधिक उपयोग होता है और उसका जीवनकाल सबसे छोटा होता है. उपयोग के कुछ ही मिनटों या घंटों बाद वह कचरे में बदल जाता है.

ई-कॉमर्स, FMCG और रिटेल सेक्टर इस प्रक्रिया को और तेज कर देते हैं क्योंकि हर नए उत्पाद और हर नई डिलीवरी के साथ नई पैकेजिंग बाजार में आती है.

दूसरी ओर, टेक्सटाइल और कंस्ट्रक्शन सेक्टर प्लास्टिक को लंबे समय तक उपयोग में रखते हैं, लेकिन अंततः वही सामग्री भी कचरे के रूप में सामने आती है.

इसलिए आने वाले वर्षों में केवल कचरा संग्रह और रीसाइक्लिंग पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा. वास्तविक समाधान प्लास्टिक के उपयोग को स्रोत स्तर पर कम करने, टिकाऊ वैकल्पिक सामग्री अपनाने, पुन: उपयोग (Reuse) को बढ़ावा देने और ऐसी पैकेजिंग विकसित करने में है जो पर्यावरण पर कम बोझ डाले.

भारत में प्लास्टिक कचरा कम करने का सबसे प्रभावी तरीका यही होगा कि सबसे अधिक उपयोग होने वाले और सबसे तेजी से कचरे में बदलने वाले प्लास्टिक उत्पादों और पैकेजिंग को प्राथमिकता के आधार पर नए, टिकाऊ विकल्पों से बदला जाए. पान मसाला की प्लास्टिक पैकेजिंग पर प्रतिबंध प्लास्टिक कचरा कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

संकल्प ठाकुर पिछले 10 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत न्यूज़ 24 से की, इसके बाद न्यूज़ नेशन में कार्य किया. वर्तमान में वह एबीपी हिंदी डिजिटल में डिप्टी प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं और पिछले सात वर्षों से संस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें खेल, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और चुनावी राजनीति से जुड़ी खबरों की गहरी समझ है. इसके अलावा साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता का क्षेत्र है. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

चीन-पाकिस्तान सीमा आयोग पर भड़का MEA, कहा- 'गैर-कानूनी और जबरन कब्जा...'
चीन-पाकिस्तान सीमा आयोग पर भड़का MEA, कहा- 'गैर-कानूनी और जबरन कब्जा...'
झीरम घाटी नरसंहार केस: NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, सभी 10 दोषियों को फांसी की सजा
झीरम घाटी नरसंहार केस: NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, सभी 10 दोषियों को फांसी की सजा
महुआ मोइत्रा पर फेंके गए अंडे, वीडियो शेयर कर बताई पूरी कहानी
महुआ मोइत्रा पर फेंके गए अंडे, वीडियो शेयर कर बताई पूरी कहानी
EPF पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 15000 से बढ़कर 25000 हुई वेतन सीमा
EPF पर मोदी सरकार का बड़ा फैसला, 15000 से बढ़कर 25000 हुई वेतन सीमा
Advertisement

वीडियोज

Saudi-Houthi War Update : सऊदी हूती युद्ध पर ताजा हालात | Middle East Conflict | Yemen | Makka
Bharat Ki Baat : योगी vs अखिलेश..'Y फैक्टर' की रेस! | UP Election 2027 | Asaduddin Owaisi
Sandeep Chaudhary: टैरिफ पर तकरार...ट्रंप से होगी आरपार! | US tariff on india | Trump
UPI Payment News Rules: आम आदमी को लगेगा झटका,15 अक्टूबर से UPI का नया चार्ज सिस्टम!
Chitra Tripathi: 'भाईजान' आए..कौन 'घबराए'? | UP Election 2027 | Asaduddin Owaisi | Akhilesh
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
UP चुनाव: सुभासपा की बड़ी मांग, 35-40 सीटों के साथ डिप्टी CM पद चाहिए
UP चुनाव: सुभासपा की बड़ी मांग, 35-40 सीटों के साथ डिप्टी CM पद चाहिए
UPI पर चार्ज लगाने के फैसले को वापस लेगी सरकार? टॉप अधिकारी ने दिया ये जवाब
UPI पर चार्ज लगाने के फैसले को वापस लेगी सरकार? टॉप अधिकारी ने दिया ये जवाब
वेस्टइंडीज टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का एलान, खूंखार गेंदबाज को मिली जगह 
वेस्टइंडीज टी20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का एलान, खूंखार गेंदबाज को मिली जगह 
अब इस राज्य में टैक्स फ्री हुई 'हनुमान अंश', बॉक्स ऑफिस पर 230 करोड़ से ज्यादा कर चुकी है कमाई
दो राज्यों में टैक्स फ्री हुई 'हनुमान अंश', बॉक्स ऑफिस पर 230 करोड़ के हो चुकी है पार
झीरम घाटी नरसंहार केस: NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, सभी 10 दोषियों को फांसी की सजा
झीरम घाटी नरसंहार केस: NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, सभी 10 दोषियों को फांसी की सजा
असदुद्दीन ओवैसी ने Gen-Z को दिया मैसेज - 'जो बीवी की गुलामी करता है वो...'
असदुद्दीन ओवैसी ने Gen-Z को दिया मैसेज - 'जो बीवी की गुलामी करता है वो...'
एक एकड़ में कितना मुनाफा दे जाएगी चीकू की खेती, देखें कैलकुलेशन
एक एकड़ में कितना मुनाफा दे जाएगी चीकू की खेती, देखें कैलकुलेशन
तांगे में घोड़े की जगह लगा दिया रोबोट- वीडियो देख चकरा जाएगा सिर
तांगे में घोड़े की जगह लगा दिया रोबोट- वीडियो देख चकरा जाएगा सिर
Embed widget