2 अगस्त से शुरू हो सकती है अयोध्या केस की सुनवाई, SC ने मध्यस्थता कमिटी से रिपोर्ट मांगी
2 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की वही बेंच फिर से अयोध्या विवाद की सुनवाई करेगी जिसने श्रीराम पंचू की अध्यक्षता में मध्यस्थता कमेटी बनाई थी. कोर्ट ने आज कहा कि कोर्ट ने कहा मध्यस्थता कमेटी 31 जुलाई तक काम करे और 1 अगस्त को रिपोर्ट दे.

नई दिल्ली: अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट 2 अगस्त से सुनवाई शुरू कर सकता है. चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली 5 जजों की बेंच ने आज मामले में मध्यस्थता कर रही कमिटी की रिपोर्ट देख कर कहा, "हम 2 अगस्त को केस सुनवाई के लिए लगाने का आदेश देते हैं. अगर ज़रूरत लगी तो उसी दिन से सुनवाई शुरू कर दी जाएगी." फिलहाल, कोर्ट ने मध्यस्थता कमिटी को 31 जुलाई तक काम करने के लिए कहा है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि कमिटी 1 अगस्त तक रिपोर्ट दे.
ये आदेश मामले के पक्षकार रहे स्वर्गीय गोपाल सिंह विशारद की तरफ से अब केस लड़ रहे उनके बेटे राजेन्द्र सिंह की अर्ज़ी पर आया है. उनका कहना है कि मध्यस्थता कमिटी के काम में कोई खास तरक्की नहीं हो रही है. इस प्रक्रिया से कोई हल निकलने की उम्मीद नहीं है. इसलिए कोर्ट मध्यस्थता बंद कर सुनवाई शुरू करे.
इस दलील का रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा समेत दूसरे हिंदू पक्षकारों ने समर्थन किया है. उनका भी कहना है कि जिस तरह से कमिटी काम कर रही है, उससे मामले का समाधान निकलने की उम्मीद नहीं है. हालांकि, सुन्नी वक्फ बोर्ड और दूसरे मुस्लिम पक्षकारों ने मध्यस्थता जारी रखने की मांग की है.
2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवादित जगह पर प्राचीन हिंदू मंदिर होने की बात स्वीकार की थी. लेकिन जमीन को तीन हिस्सों में बांट दिया था. दो तिहाई हिस्सा हिंदू पक्ष को मिला था. जबकि एक तिहाई हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को. फैसले से असंतुष्ट सभी पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. तब से मामला लंबित है. इस साल मार्च में कोर्ट ने विवाद को मध्यस्थता के जरिए हल करने का सुझाव दिया. इसके लिए 3 सदस्यों की एक कमिटी का गठन किया. 10 मई को कोर्ट ने कमिटी का कार्यकाल 15 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया था.
ये माना जा रहा था कि अयोध्या मामले की सुनवाई को लेकर जो भी फैसला होगा, वो 15 अगस्त के बाद ही होगा. लेकिन कोर्ट ने पहले 18 जुलाई तक और अब 1 अगस्त तक रिपोर्ट मांग कर स्पष्ट संकेत दिए हैं कि सुनवाई शुरू करने की मांग पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. जिस तरह से कई पक्षकार कमिटी के काम से असंतोष जता चुके हैं, वैसे में मध्यस्थता से कोई सर्वमान्य हल निकलने की उम्मीद कम ही नज़र आ रही है. लेकिन कोर्ट ने कमिटी की आज की रिपोर्ट को देखते हुए उसे थोड़ा और समय दिया है. कमिटी से रिपोर्ट मांगते हुए कोर्ट ने ये भी कहा है कि इससे आगे की सुनवाई में मदद मिलेगी.
Source: IOCL
























