असम की तबाही के बीच इस युवक जीता दिल, जो सरकार नहीं कर पाई, वो इसने किया
Assam Flood: असम में आई भीषण बाढ़ के बीच शिवसागर के यंग इनोवेटर अभिजीत दोवराह ने सोलर एनर्जी से चलने वाले मोबाइल चार्जिंग स्टेशन तैयार कर बाढ़ प्रभावित गांवों में मुफ्त सुविधा उपलब्ध की है.

ऊपरी असम में बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन हजारों परिवार अभी भी इस भीषण बाढ़ के असर से जूझ रहे हैं. कई घर तबाह हो चुके हैं, सड़कें अब भी पानी में डूबी हुई हैं और लोगों को आने-जाने में काफी दिक्कतें आ रही हैं. इस आपदा के चलते 78 लोगों की मौत हो चुकी है. इन समस्याओं के बीच एक और बड़ी परेशानी सामने आई है. कई गांवों में अब तक बिजली बहाल नहीं हो सकी है, जिसके कारण लोगों के मोबाइल फोन बंद हो गए हैं. इससे उनका अपने परिवार के सदस्यों, राहत एजेंसियों और इमरजेंसी सर्विस से संपर्क टूट गया है.
ऐसे मुश्किल समय में शिवसागर के युवा अभिजीत दोवराह ने बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बड़ी राहत का काम किया है. उन्होंने सोलर एनर्जी से चलने वाले पोर्टेबल मोबाइल चार्जिंग स्टेशन तैयार किए हैं और उन्हें अलग-अलग बाढ़ प्रभावित गांवों में मुफ्त में मुहैया करवा रह हैं. अभिजीत ने अपने तकनीकी ज्ञान और निजी संसाधनों का इस्तेमाल करके ऐसे सोलर चार्जिंग यूनिट तैयार किए हैं, जिनकी मदद से लोग बिना किसी पैसे के अपने मोबाइल फोन चार्ज कर सकते हैं. अब तक वह शिवसागर जिले के करीब 10 बाढ़ प्रभावित गांवों में ये चार्जिंग स्टेशन लगा चुके हैं, जहां कई दिनों से बिजली पूरी तरह बंद है.
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अभिजीत दोवराह को क्या महसूस हुआ?
अभिजीत दोवराह ने बताया कि उन्हें महसूस हुआ कि लंबे समय तक बिजली नहीं रहने के कारण लोगों के मोबाइल फोन बंद हो चुके हैं और यही बाढ़ पीड़ितों की सबसे बड़ी समस्या बन गई है. उन्होंने कहा कि शुरुआत में वह अपनी मोटरसाइकिल पर पोर्टेबल सोलर चार्जर लेकर एक गांव से दूसरे गांव जाते थे. वहां दो से तीन घंटे रुककर लोगों के मोबाइल फोन चार्ज करवाते थे. बाद में कुछ समाजसेवियों ने उन्हें जरूरी चीजे मुहैया कराई, जिसके बाद उन्होंने और अधिक सोलर चार्जिंग यूनिट तैयार किए और उन्हें अलग-अलग गांवों में स्थायी रूप से लगाना शुरू कर दिया.
रास्ता पता लगाने वाली मशीन का इस्तेमाल
मोबाइल चार्जिंग स्टेशन के अलावा अभिजीत ने बेकार पड़ी समानों का इस्तेमाल करके सोलर एनर्जी से चलने वाला एक खास फ्लड रूट इंडिकेटर भी बनाया है. यह मशीन पानी में डूबी सड़कों की पहचान करने में मदद करता है, जिससे लोगों को सुरक्षित रास्ता चुनने में आसानी होती है. इसके साथ ही वह छात्रों के लिए लैब भी बना रहे हैं और उन्हें समाज के लिए उपयोगी नए आविष्कार करने के लिए प्रेरित करते हैं. स्थानीय लोगों ने अभिजीत की इस पहल की खूब सराहना की है और इसे बाढ़ के समय लोगों के लिए जीवनदायिनी मदद बताया है.
मुश्किल के समय में काम आ रहा इनोवेशन
निमाईजान गांव के निवासी ज्ञानदीप सैकिया ने कहा कि उनके गांव में लगभग 10 दिनों से बिजली नहीं है. उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन बंद हो जाने के कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. उनका कहना है कि यह सोलर चार्जिंग स्टेशन इमरजेंसी सिचुएशन में बहुत उपयोगी साबित होगा. अब किसी भी संकट की स्थिति में लोग तुरंत फोन करके मदद मांग सकेंगे. उन्होंने कहा कि अभिजीत हमेशा समाज के हित में नए-नए एक्सपेरिमेंट करते रहे हैं और यह उनका एक और सराहनीय प्रयास है.
चार्जिंग स्टेशन ने सैकड़ों लोगों को फायदा
एक अन्य ग्रामीण देबोजीत बरुआ ने बताया कि इस चार्जिंग स्टेशन ने सैकड़ों लोगों को फिर से संपर्क की सुविधा उपलब्ध करा दी है. उन्होंने कहा कि कई स्वयंसेवी संस्थाएं और राहत कार्यकर्ता गांव के लोगों से संपर्क करना चाहते थे, लेकिन मोबाइल फोन बंद होने के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा था. अब लोग उनसे बात कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर आपातकालीन सहायता भी मांग सकते हैं. उन्होंने बताया कि उनके गांव में लगभग दो सप्ताह से बिजली नहीं है और यह सोलर चार्जर पूरे गांव के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है. उन्होंने अभिजीत के इस प्रयास के लिए उनका आभार भी जताया.
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