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EXCLUSIVE: LAC पर बदल चुके हैं रूल्स ऑफ इंगेजमेंट, ITBP के जवानों को पूर्वी लद्दाख में दी जा रही है फायरिंग की ट्रैनिंग

वर्ष 2017 में फिंगर एरिया का विवाद हो या फिर गलवान घाटी की हिंसा, वहां भारत और चीन के सैनिकों के बीच बिना हथियारों के ही लड़ाई हुई थी, इसीलिए आईटीबीपी के जवानों को अन-आर्मड कॉम्बेट की तैयारी जरूर कराई जाती है.

लद्दाख: गलवान घाटी में हुई हिंसा के बाद एलएसी पर रूल ऑफ इंगेजमेंट अब बदल चुके हैं. यानि जिस लाइन ऑफ एक्चुयल कंट्रोल पर पिछले 45 साल में कभी फायरिंग नहीं हुई थी अब वहां पिछले एक महीने में चार बार फायरिंग की अलग अलग घटनाएं सामने आ चुकी हैं. यही वजह है कि पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी पर आईटीबीपी के जवानों को फायरिंग की ड्रिल सीखाई जा रही है. एबीपी न्यूज की टीम भी आईटीबीपी के एक ऐसे ही फॉरवर्ड ट्रैनिंग कैंप पहुंची जहां से जवानों को एलएसी पर कूच करने की तैयारी की जा रही थी.

पूर्वी लद्दाख में इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस यानि आईटीबीपी के एक फॉरवर्ड ट्रैनिंग कैंप में एबीपी न्यूज की टीम पहुंची तो पाया कि वहां पर जवान एलएसी पर जाने की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन उससे पहले उन्हें फिट बनाया जा रहा था और एलएसी पर चीनी सैनिकों को परास्त करने की फाइनल ट्रैनिंग दी जा रही थी. क्योंकि इसके बाद पूर्वी लद्दाख से सटी 826 किलोमीटर लंबी एलएसी पर ट्रेनिंग नहीं चीनी सैनिकों से सीधे दो-दो हाथ होने की नौबत आ सकती है.

यही वजह है कि आईटीबीपी के उस्ताद (इंस्ट्रेक्टर) जवानों को मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दे रहे थे. ये अनआर्म्ड कॉम्बेट यानि बिना हथियारों के लड़ने की तैयारी थी. क्योंकि एलएसी पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच कभी फायरिंग नहीं होती थी, इसलिए जवानों को बिना हथियारों के लड़ना सीखाया जाता है. मार्शल आर्ट आईटीबीपी के हर जवान की ट्रेनिंग का हिस्सा है. इसके लिए मसूरी स्थित आईटीबीपी एकेडमी में इसकी ट्रेनिंग दी जाती है, लेकिन जब जवान पूर्वी लद्दाख में तैनाती के लिए आते हैं, तो इस फॉरवर्ड ट्रेनिंग कैंप में एक बार फिर जूडो कराटे और दूसरे मार्शल आर्ट्स की ट्रैनिंग दी जाती है.

EXCLUSIVE: LAC पर बदल चुके हैं रूल्स ऑफ इंगेजमेंट, ITBP के जवानों को पूर्वी लद्दाख में दी जा रही है फायरिंग की ट्रैनिंग

आपको बता दें कि वर्ष 2017 में फिंगर एरिया का विवाद हो या फिर गलवान घाटी की हिंसा, वहां भारत और चीन के सैनिकों के बीच बिना हथियारों के ही लड़ाई हुई थी, इसीलिए आईटीबीपी के जवानों को अन-आर्मड कॉम्बेट की तैयारी जरूर कराई जाती है.

लेकिन गलवान घाटी की हिंसा और पिछले एक महीने में एलएसी पर फायरिंग की चार घटनाओं ने भारत को चीन के खिलाफ रूल्स ऑफ इंगेजमेंट बदलने पर मजबूर कर दिया है. अब भारतीय सैनिकों को एलएसी पर हथियार इस्तेमाल करने की पूरी छूट दे दी गई है. इसीलिए आईटीबीपी के इस फॉरवर्ड ट्रैनिंग कैंप में आईटीबीपी के जवानों को फायरिंग की ड्रिल सीखाई जा रही है. जवानों के हाथों में स्वदेशी इंसास राइफल है और सामने दुश्मन का कट-आउट. कट-आउट को देखकर जवानों को गोली चलाना सीखाया जा रहा है. यानि एक गोली एक दुश्मन के सिद्धांत के तहत राइफल से गोली निकले तो वो दुश्मन का सीना छलनी जरूर करके लौटे.

यही नहीं जवानों को दुश्मन पर धावा बोलने की ड्रील भी सीखाई जा रही है. इ‌सके लिए दुश्मन की चौकी या पोस्ट के करीब स्मोक यानि धुआं कर दुश्मन को चकमा देकर उसपर हमला बोला जाता है.

नीरज राजपूत, देश के जाने-माने डिफेंस जर्नलिस्ट और वॉर-लेखक हैं. वे 20 वर्षों से ज्यादा से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं और  प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया का गहन अनुभव है. एबीपी नेटवर्क के लिए वॉर, डिफेंस, नेशनल सिक्योरिटी और जियो-पॉलिटिक्स से जुड़े मामले देखते हैं. एबीपी लाइव पर 'गेम-चेंजर' कार्यक्रम के प्रेजेंटर भी हैं. उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध पर पहली हिंदी पुस्तक "ऑपरेशन Z लाइव" लिखी, जो बेस्टसेलर सूची में भी शामिल हुई.

उन्होंने सैन्य एवं सुरक्षा मुद्दों की कवरेज दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से लेकर आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर, चीन सीमा पर तिब्बत के पठार, पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर-स्ट्राइक से लेकर पनडुब्बी से समुद्र के अंदर तक की है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके एक्सक्लूसिव खुलासे और विश्लेषणों की व्यापक सराहना हुई.

उन्होंने यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र से भी रिपोर्टिंग की है, जिसमें मारियुपोल, डोनेत्स्क और लुहांस्क के एक्टिव वॉर-जोन शामिल हैं. इन्हीं अनुभवों पर आधारित उनकी पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई.

उन्होंने दुनिया की सबसे संवेदनशील बॉर्डर में में से एक उत्तर-दक्षिण कोरिया की DMZ से, अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक JBLM से और कोल्ड-वॉर के दौरान दुनिया के लिए "गैर-मौजूद" माने जाने वाले रूसी सैन्य अड्डों से भी रिपोर्टिंग की है.

वे चुनिंदा रक्षा पत्रकारों में से हैं जिन्होंने भारत के पहले स्वदेशी रूप से विकसित अटैक हेलिकॉप्टर LCH-प्रचंड के कॉकपिट में उड़ान भरी है. उन्होंने फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण सुविधा से भी रिपोर्टिंग की.

वे भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित 'Defence Correspondent Course' कर चुके हैं.

इससे पहले वे लगभग 6 वर्षों तक STAR NEWS में चीफ रिपोर्टर (क्राइम) के पद पर कार्यरत रहे और लोकप्रिय क्राइम शो *'सनसनी'* से जुड़े थे.

पत्रकारिता की शुरुआत उन्होंने अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से की. इसके बाद वे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में आए और B.A.G. Films के साथ जुड़े, जिसने STAR NEWS के लिए लोकप्रिय क्राइम शो का निर्माण किया. उन्होंने SAHARA TV में भी लगभग 2 वर्षों तक काम किया.

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