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भारतीय सेना के दो कमांडर्स के बीच लड़ाई का मामला, थलसेना प्रमुख खुद सुलझा रहे

भारतीय सेना की एक अहम कमान के दो बड़े कमांडर्स के बीच आपसी खीचतान का मामला सामना आया है. खुद थलसेना प्रमुख जनरल ने दोनों कमांडर्स के बीच मामला सुलझाने के लिए एक थ्री-स्टार जनरल को नियुक्त किया है.

दिल्ली: ऐसे समय में जब भारत टू फ्रंट वॉर पर जूझ रहा है भारतीय सेना की एक अहम कमान के दो बड़े कमांडर्स के बीच आपसी खीचतान का मामला सामना आया है. खुद थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने दोनों कमांडर्स के बीच मामला सुलझाने के लिए एक थ्री-स्टार जनरल को नियुक्त किया है.

पूरा मामला सेना की जयपुर स्थित दक्षिण-पश्चिम यानि साउथ-वेस्टर्न कमान का है जहां तैनात दो शीर्ष कमांडर्स के बीच लड़ाई सेना मुख्यालय तक पहुंच गई है. तनातनी चल रही है दक्षिण-पश्चिमी कमान के टॉप कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल आलोक कलेर (नंबर 1) और चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल के के रप्सवाल (नंबर 2) के बीच. सूत्रों की मानें तो लड़ाई पॉवर्स को लेकर है.

इस बात की शिकायत, एक लैटर के माध्यम से रक्षा मंत्रालय और थलसेना प्रमुख तक पहुंची है.‌ शिकायती पत्र मिलने के बाद थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने एक थ्री-स्टार जनरल (लेफ्टिनेंट जनरल) को मामले के निवारण के लिए नियुक्त किया है. सूत्रों ने बताया कि लेफ्टिनेंट जनरल कलेर और लेफ्टिनेंट जनरल  रप्सवाल के बीच प्रशासनिक-शक्तियों (पोस्टिंग इत्यादि को लेकर) तनातनी चल रही है. इसीलिए सेना प्रमुख ने मामला सुलझाने के लिए एक थ्री-स्टार जनरल को ही नियुक्त किया है.

आपको बता दें कि जयपुर स्थित दक्षिणी पश्चिमी कमान, जिसे सप्तशक्ति के नाम से भी जाना जाता है सेना की एक बेहद ही अहम कमान है जिसके जिम्मेदारी पाकिस्तान से सटी निचले पंजाब और लगभग पूरे राजस्थान की सीमा है. पोखरण सहित पूरा थार रेगिस्तान इसी कमान के अंतर्गत आता है. चीन से चल रही तनातनी के चलते पूरी दक्षिण-पश्चिम कमीन अलर्ट पर है. क्योंकि चीन और पाकिस्तान की नजदीकियां किसी से छिपी नहीं रही हैं.

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नीरज राजपूत देश के जाने-माने डिफेंस-जर्नलिस्ट और वॉर-लेखक हैं. पत्रकारिता में करीब ढाई दशक का अनुभव रखते हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया तीनों में गहरी पकड़ है.

वर्तमान में वे ABP नेटवर्क से जुड़े हैं, जहाँ युद्ध, रक्षा, नेशनल सिक्योरिटी और जियो-पॉलिटिक्स से संबंधित विषयों को कवर करते हैं. ABP लाइव पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘गेम-चेंजर’ के प्रस्तुतकर्ता भी हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने पहली हिंदी पुस्तक "ऑपरेशन Z लाइव" लिखी, जो बेस्टसेलर सूची में भी शामिल हुई और पाठकों द्वारा खूब सराही गई.

रिपोर्टिंग का दायरा
- दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से लेकर आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और चीन सीमा पर तिब्बत के पठार तक
- पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर-स्ट्राइक से लेकर पनडुब्बी के जरिए समुद्र के भीतर तक
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके एक्सक्लूसिव खुलासे और सटीक विश्लेषणों की व्यापक सराहना हुई
- यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में मारियुपोल, डोनेत्स्क और लुहांस्क जैसे एक्टिव वॉर-जोन से रिपोर्टिंग. इसी अनुभव पर आधारित उनकी पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई
- दुनिया की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक उत्तर-दक्षिण कोरिया की DMZ
- ⁠अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक JBLM, और शीत युद्ध के दौरान "गैर-मौजूद" माने जाने वाले रूसी सैन्य अड्डों से भी ग्राउंड रिपोर्टिंग. 
- ⁠वे उन चुनिंदा रक्षा जुड़े पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने भारत के पहले स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर LCH-प्रचंड के कॉकपिट में उड़ान भरी है. इसके अलावा फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण सुविधा से भी उन्होंने विशेष रिपोर्टिंग की.

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'Defence Correspondent Course' के Alumni हैं.

पूर्व कार्य अनुभव
- STAR NEWS में लगभग 6 वर्षों तक चीफ रिपोर्टर (क्राइम) के तौर पर कार्य किया और लोकप्रिय क्राइम शो 'सनसनी' से जुड़े रहे
- पत्रकारिता की शुरुआत अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से की
- इसके बाद B.A.G. Films के साथ जुड़कर STAR NEWS के लिए क्राइम शो बनाए
- SAHARA TV में भी लगभग 2 वर्षों तक कार्यरत रहे

रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर उनकी पकड़, ग्राउंड-जीरो रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण उन्हें देश के सबसे भरोसेमंद डिफेंस जर्नलिस्ट्स में स्थापित करती है.

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