सुप्रीम कोर्ट के नए फॉर्मूले से हल होगा मथुरा विवाद? हिंदू-मुस्लिम प्रतिनिधियों की बैठक
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते मथुरा में डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (DLSA) में हुई सुलह की कार्यवाही में हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया.

मथुरा में डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (DLSA) में हुई सुलह की कार्यवाही में हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. यह बैठक सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश का सख्ती से पालन करते हुए आयोजित की गई थी. कोर्ट ने सुलह प्रक्रिया का अगला सत्र 18 अगस्त के लिए तय किया है.
उम्मीद है कि उस तारीख को दोनों पक्ष बातचीत जारी रखेंगे और विवादित जगह को लेकर आपसी सहमति वाला कोई रास्ता निकालने की दिशा में काम करेंगे. सुप्रीम कोर्ट कोऑर्डिनेशन कमिटी के 5 जून के आदेश के अनुसार मामलों को स्पेशल लोक अदालत प्रक्रिया के जरिए सुलझाने को सही माना गया है. इस बीच, 'समाधान' नाम की स्पेशल लोक अदालत 21, 22 और 23 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट परिसर में आयोजित की जाएगी.
ANI के मुताबिक, हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों को लोक अदालत से पहले सुलह-समझौते की कार्यवाही में शामिल होने के लिए नोटिस भेजे गए थे. नोटिस में कहा गया, "ध्यान दें कि भारत का सुप्रीम कोर्ट 'समाधान समारोह' आयोजित कर रहा है, जो 21 अप्रैल, 2026 से शुरू होगा और 21, 22 और 23 अगस्त, 2026 को सुप्रीम कोर्ट परिसर में एक स्पेशल लोक अदालत के साथ संपन्न होगा. आपके मामले को स्पेशल लोक अदालत में भेजने और उस पर सुनवाई करने के लिए उपयुक्त माना गया है."
हिंदू याचिकाकर्ताओं का दावा
ये विवाद हिंदू याचिकाकर्ताओं के उन दावों से जुड़े हैं जिनमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक मस्जिदें प्राचीन हिंदू मंदिरों को तोड़कर बनाई गई थीं. ज्ञानवापी मस्जिद मामले में हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मस्जिद 16वीं सदी के मूल काशी विश्वनाथ मंदिर की जगह पर बनाई गई थी, जिसे कथित तौर पर मुगल बादशाह औरंगजेब ने तुड़वा दिया था.
किन-किन पर है विवाद
मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर का विवाद 13.37 एकड़ के परिसर से जुड़ा है, जहां हिंदू याचिकाकर्ताओं का दावा है कि शाही ईदगाह मस्जिद उस जेल की कोठरी (गर्भ गृह) के ऊपर बनाई गई थी, जहां माना जाता है कि भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था. इसके अलावा शाह जामा मस्जिद का मामला 2024 की एक याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें हिंदू पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि संभल में मुगल-युगीन शाही जामा मस्जिद (जो 1526 में बनकर तैयार हुई थी) मूल रूप से एक प्राचीन हरि-हर मंदिर के ऊपर बनाई गई.
इन तीनों मुद्दों को लेकर बातचीत का नतीजा लोगों के लिए बहुत अहम है, क्योंकि अदालत के आदेश से समाधान की ये कोशिशें की जा रही हैं. इसके अलावा इन सब मुद्दों पर कोर्ट में भी कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है.
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