114 राफेल, तेजस Mk2 और AMCA...फाइटर जेट की पूरी रणनीति पर आया बड़ा अपडेट
भारत की 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. इस बात की जानकारी रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने दी है.

भारत की 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद योजना आगे बढ़ रही है. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने गुरुवार को कहा कि इस खरीद प्रक्रिया में वित्त वर्ष के अंत तक निष्कर्ष पर पहुंचने की उम्मीद है. भारत इस बार केवल विमान खरीदने पर ही नहीं, बल्कि उनमें ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी तकनीक, भारतीय हथियार और सिस्टम शामिल करने पर जोर दे रहा है.
रक्षा मंत्रालय ने फरवरी 2026 में मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट यानी एमआरएफए के तहत राफेल की खरीद के लिए प्रारंभिक मंजूरी भी दी थी और बताया था कि ज्यादातर विमान भारत में बनाए जाएंगे.
राफेल में भारतीय हथियारों का होगा एकीकरण
रक्षा सचिव ने एएनआई से बातचीत में बताया कि पहले खरीदे गए राफेल मरीन विमानों में भी भारतीय हथियारों को शामिल करने पर सहमति बनी थी. अब 114 राफेल की प्रस्तावित खरीद में भारत इससे एक कदम आगे जाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि यह बाय एंड मेक कार्यक्रम होगा. इसके तहत बड़ी संख्या में राफेल विमानों को भारत में असेंबल किया जाएगा. साथ ही विमानों में स्वदेशी हिस्सेदारी बढ़ाने और भारतीय सिस्टम तथा हथियारों को एकीकृत करने पर खास ध्यान दिया जाएगा.
रक्षा सचिव ने बताया कि इस खरीद के लिए आरएफपी यानी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल के तहत कंपनियों की ओर से बोली जमा की जा चुकी है. फिलहाल इन प्रस्तावों का औपचारिक मूल्यांकन किया जा रहा है. इसके बाद खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा. उनका कहना था कि साल खत्म होने से पहले इस खरीद चक्र में किसी निष्कर्ष तक पहुंचने की उम्मीद है.
राफेल मरीन में भी भारतीय हथियारों की तैयारी
भारत और फ्रांस के बीच अप्रैल 2025 में भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल मरीन विमानों का अंतर-सरकारी समझौता हुआ था. इस समझौते में प्रशिक्षण, सिम्युलेटर, हथियार और लॉजिस्टिक सपोर्ट के साथ भारतीय हथियारों के एकीकरण के लिए तकनीक हस्तांतरण का प्रावधान भी शामिल है.
LCA Mk2 की पहली उड़ान अगले साल
रक्षा सचिव ने स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम पर भी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि एलसीए Mk2 परियोजना आगे बढ़ रही है और पहली उड़ान अगले साल के मध्य में होने का कार्यक्रम है. उन्होंने कहा कि पहले प्रोटोटाइप तैयार होने और भारतीय वायुसेना की ओर से उनके मूल्यांकन का इंतजार किया जाएगा. इसके बाद आगे की जरूरत पर फैसला होगा. उनके मुताबिक, शुरुआत में भारतीय वायुसेना ने करीब 120 एलसीए Mk2 विमानों की आवश्यकता बताई थी. रक्षा सचिव ने कहा कि तेजस Mk2 यानी एलसीए Mk2 के विकास में स्पाइरल डेवलपमेंट का तरीका अपनाया जाना चाहिए. इसका मतलब है कि विमान को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाए और समय के साथ उसमें नए सिस्टम और क्षमताएं जोड़ी जाएं.
HAL के साथ निजी कंपनियों की भी बड़ी भूमिका
राजेश कुमार सिंह ने कहा कि एलसीए Mk2 का विकास मौजूदा सार्वजनिक क्षेत्र के ढांचे में किया जाना चाहिए, जिसमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL की प्रमुख भूमिका रहेगी. हालांकि, HAL अब बड़े स्तर पर निजी कंपनियों की मदद भी ले रहा है. निजी क्षेत्र की कंपनियां केवल छोटे सब-असेंबली नहीं, बल्कि कुछ बड़े हिस्सों और फ्यूजलेज जैसे महत्वपूर्ण कंपोनेंट के निर्माण में भी शामिल हो रही हैं. HAL ने कुछ हिस्सों के लिए निजी क्षेत्र की उत्पादन लाइन भी जोड़ी है. उन्होंने कहा कि एलसीए Mk2 कार्यक्रम सार्वजनिक क्षेत्र के नेतृत्व में आगे बढ़ने की संभावना है, लेकिन इसमें भारतीय निजी उद्योग और MSME सेक्टर की महत्वपूर्ण भागीदारी पहले से शामिल है.
AMCA पर भी भारत का पूरा फोकस
रक्षा सचिव ने पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान AMCA को लेकर भी भारत की रणनीति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत ने किसी विदेशी या वैश्विक पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान .कार्यक्रम में जाने का फैसला नहीं किया है. उन्होंने कहा कि भारत का अपना कार्यक्रम AMCA है और यह अब उस चरण में पहुंच गया है, जहां शॉर्टलिस्ट की गई कंपनियों से आरएफपी मांगे गए हैं. हालांकि, इन कंपनियों ने परियोजना की जटिलता को देखते हुए कुछ अतिरिक्त समय मांगा है. रक्षा सचिव के मुताबिक, सरकार उन्हें कुछ और समय देने जा रही है.
AMCA के लिए स्वदेशी रास्ते पर जोर
राजेश कुमार सिंह ने कहा कि फिलहाल भारत की रणनीति AMCA कार्यक्रम को ही आगे बढ़ाने की है. उनके बयान का संकेत है कि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान के लिए भारत किसी अलग विदेशी कार्यक्रम पर निर्भर होने के बजाय अपने स्वदेशी AMCA प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ रहा है. AMCA कार्यक्रम में प्रतिस्पर्धी औद्योगिक भागीदारी का मॉडल अपनाया जा रहा है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इसका उद्देश्य देश में उन्नत एयरोस्पेस क्षमता विकसित करना और सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना है.





















