पीएम मोदी की आइसलैंड, फिनलैंड और डेनमार्क नेताओं के साथ अहम बैठक, ट्रेड-डिफेंस पर रहेगा जोर
पीएम मोदी ने आइसलैंड, फिनलैंड और डेनमार्क के नेताओं से की अहम बैठकें, व्यापार, हरित ऊर्जा, रक्षा और तकनीक पर बढ़ेगा सहयोग

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को नॉर्डिक देशों के नेताओं के साथ कई अहम द्विपक्षीय बैठकें कीं. ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन से पहले पीएम मोदी ने आइसलैंड, फिनलैंड और डेनमार्क के प्रधानमंत्रियों से मुलाकात कर व्यापार, हरित ऊर्जा, तकनीक, रक्षा, समुद्री सहयोग और सतत विकास जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की. इन बैठकों को भारत और नॉर्डिक देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक रिश्तों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रून फ्रॉस्टाडॉटिर से मुलाकात की. दोनों नेताओं ने भारत और आइसलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया. बातचीत में सांस्कृतिक सहयोग, पर्यटन, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास जैसे विषयों को प्रमुखता मिली. आइसलैंड के लोगों में भारतीय योग, शास्त्रीय संगीत, नृत्य, बॉलीवुड फिल्मों और भारतीय खान-पान को लेकर खास आकर्षण देखा जाता है. वर्तमान में करीब 600 भारतीय नागरिक आइसलैंड में रह रहेते है.
पीएम की नॉर्डिक देशों के नेताओं से मुलाकात
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो के साथ बैठक की. इस दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, तकनीक, शिक्षा, डिजिटल नवाचार और निवेश के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. फिनलैंड की कई बड़ी कंपनियां भारत में सक्रिय हैं और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं. भारत में 100 से अधिक फिनिश कंपनियां काम कर रही हैं.
फिनलैंड में भारतीय समुदाय भी तेजी से बढ़ा है. वहां करीब 33,445 भारतीय मूल के लोग रहते हैं. इनमें लगभग 15,115 अनिवासी भारतीय (एनआरआई) और 18,330 ओसीआई कार्डधारक शामिल हैं. इसके अलावा लगभग 2,400 भारतीय छात्र फिनलैंड के विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं. दोनों देशों ने शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में भी साझेदारी मजबूत करने की इच्छा जताई.
प्रधानमंत्री मोदी ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन के साथ भी अहम बैठक की. इस दौरान हरित ऊर्जा, समुद्री व्यापार, लॉजिस्टिक्स, शिपिंग और निवेश जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई. डेनमार्क की कई बड़ी कंपनियों ने भारत में निवेश बढ़ाया है और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत नए कारखाने लगाए हैं. दोनों देशों ने स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन टेक्नोलॉजी में सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई.
डेनमार्क में भारतीय समुदाय की संख्या करीब 22 हजार है. वहां बड़ी संख्या में भारतीय आईटी प्रोफेशनल, डॉक्टर, इंजीनियर, बैंकिंग विशेषज्ञ, शिक्षाविद और छात्र रहते हैं. भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच मजबूत सामाजिक और आर्थिक कड़ी माना जाता है.
रक्षा-सहयोग पर चर्चा
ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भारत के साथ नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के नेताओं ने हिस्सा लिया. नॉर्डिक देश उत्तरी यूरोप और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र में स्थित देशों का समूह हैं. पांचों नॉर्डिक देशों की संयुक्त जीडीपी 1.9 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है.
अधिकारियों के अनुसार इस शिखर सम्मेलन में तकनीक और नवाचार, हरित परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, ब्लू इकोनॉमी, रक्षा, अंतरिक्ष और आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई. भारत इन देशों के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देना चाहता है. यह तीसरा भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन है. इससे पहले पहला सम्मेलन 2018 में स्टॉकहोम में और दूसरा 2022 में कोपेनहेगन में आयोजित हुआ था.
प्रधानमंत्री मोदी फिलहाल पांच देशों के दौरे पर हैं. 15 से 20 मई तक चल रहे इस दौरे में उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे का दौरा किया है. अब वह अपने दौरे के अंतिम चरण में इटली जाएंगे. पीएम मोदी का यह दौरा भारत की विदेश नीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि भारत यूरोप और नॉर्डिक देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
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