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EXPLAINED: मलाला को गांजा फूंककर निबंध के जवाब मिले, इसे पीने से इश्क-माशूक क्यों याद आते, क्या वाकई दिमाग खुल जाता?

ABP Explainer: मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गांजे का नशा करने के बाद व्यक्ति हालिया चीजें भूलकर पुरानी चीजें याद करने लगता है और काफी देर तक किसी पुरानी घटना के बारे में सोचता रहता है.

नोबेल पीस प्राइज विजेता मलाला यूसुफजई ने नई किताब 'फाइंडिंग माय वे' लॉन्च की. इसमें मलाला ने अपने कई किस्से लिखे, लेकिन सबसे ज्यादा गांजा फूंकने का किस्सा सुर्खियों में बना. मलाला ने लिखा, 'मेरे कॉलेज के दोस्त एक ‘झोपड़ी’ में गांजा पी रहे थे. उन्होंने दबाव डाला, तो मैं भी उनके साथ शामिल हो गई. मैंने एक कश लिया और अचानक मेरा सिर घूमने लगा, दिल जोर-जोर से धड़कने लगा. थोड़ी देर में मेरा दिमाग पाकिस्तान की उस वैन में वापस पहुंच गया, जहां तालिबान ने मुझे गोली मारी थी.'

तो आइए ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि मलाला ने गांजा फूंकने का किस्सा क्यों सुनाया, क्या वाकई गांजे से दिमाग तेज चलता और इसे बैन करने को लेकर विवाद क्या...

सवाल 1- मलाला ने जिस गांजा फूंकने का किस्सा बताया, वो क्या है?
जवाब- 21 अक्टूबर को मलाला की नई किताब 'फाइंडिंग माय वे' लॉन्च हुई. इसमें मलाला ने लिखा-

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान मैंने एक इकोनॉमिक्स पर एक निबंध लिखने की कोशिश की थी. इसमें एक मुश्किल सवाल का जवाब देना था. मैंने कई बार सवाल पढ़ा, लेकिन समझ नहीं आया. मेरे एक दोस्त ने थोड़ा आराम करने की सलाह दी. इसके बाद मैं अपने कॉलेज से निकली और एक छोटी बिल्डिंग में पहुंची. स्टूडेंट्स इस इमारत को शैक यानी 'झोपड़ी' कहते थे. यहां मेरी एक दोस्त, अन्य क्लास के दो लड़कों के साथ बैठी थी. उनके बीच में कांच की पाइप वाला एक ट्रांसपेरेंट कंटेनर रखा था.

ये कंटेनर गांजे का धुआं लेने वाला वॉटर पाइप होता है, जिसे 'बोंग' भी कहते हैं. गांजे की गंध जैसे ही मेरे नाक में घुसी तो मुझे मेरे सवाल का जवाब मिल गया. मैंने पाइप से गांजे का कश लिया, जिसके बाद मैं बेचैन हो उठी. मुझे 2012 में तालिबानी गोलीबारी की याद आ गई. वो डरावनी घटना मुझे दोबारा महसूस हुई.

मलाला ने लिखा, ‘उस रात के बाद सब कुछ हमेशा के लिए बदल गया. मैंने हमले को सबसे करीब से महसूस किया. मुझे बंदूक, खून, एम्बुलेंस सब याद आ गया. मुझे लग रहा था जैसे मैं यह सब फिर से जी रही हूं. एक बार तो मुझे लगा कि मैं परलोक में हूं.’

गांजा पीने के बाद मैं बेहोश हो गई. मेरे एक दोस्त ने मुझे गोदी में उठा लिया, जिसके बाद मुझे घबराहट, नींद की कमी जैसी दिक्कतें होने लगी. अक्सर पसीना आ जाता था, धड़कन तेज हो जाती थी. मुझे डॉक्टर्स के पास भी जाना पड़ा.

 

2020 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने के बाद अपने परिवार के साथ मलाला यूसुफजई
2020 में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डिग्री लेने के बाद अपने परिवार के साथ मलाला यूसुफजई

सवाल 2- मलाला की किताब में कई किस्से, फिर गांजा फूंकने की ही चर्चा क्यों?
जवाब- मलाला ने अपनी किताब में गांजे वाले किस्से के अलावा, पर्सनल लाइफ की दिक्कतों के बारे में भी खुलकर बताया है. उन्होंने एग्जाम में फेल होने से लेकर, डेटिंग, दोस्ती, रोमांस और उससे उबरने के अपने अनुभव भी शामिल किए.

सोशल मीडिया के एक तबके का कहना है कि मलाला अपनी किताब बेचने के लिए इस्लामिक वैल्यूज को छोड़कर वीड, डेटिंग जैसी 'वेस्टर्न लाइफस्टाइल' का जिक्र कर रही हैं. कई लोग इसे पब्लिसिटी स्टंट करार दे रहे हैं.

हालांकि, दूसरी तरफ उनकी तारीफ भी हो रही है. अमेरिकी मैगजीन ‘ओपरा डेली’ ने किताब की समीक्षा में मलाला के अनुभवों को 'एक उलझी हुई, बेहद अजीब युवावस्था का दौर' बताते हुए लिखा है, ‘यह मलाला की अनफिल्टर्ड कहानी है जो उस साहस का एहसास दिलाती है, जिसे हम सभी महसूस कर सकते हैं.’

लेकिन मलाला की किताब ने फिर पुरानी बहस को हवा दी है, जिसने गांजे को चर्चा में ला दिया है.

 

21 अक्टूबर 2025 को मलाला की नई किताब 'फाइंडिंग माय वे' लॉन्च हुई.
21 अक्टूबर 2025 को मलाला की नई किताब 'फाइंडिंग माय वे' लॉन्च हुई.

सवाल 3- आखिर ये गांजा होता क्या है, जिसे फूंकने से दिमाग पर सीधा असर होता?
जवाब- मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, गांजा एक नशा करने वाला ड्रग है, जिसे आम बोलचाल में 'वीड' या 'मैरुआना' भी कहते हैं. गांजे का नशा करने के बाद व्यक्ति हालिया चीजें भूलकर पुरानी चीजें याद करने लगता है और काफी देर तक किसी पुरानी घटना के बारे में सोचता रहता है. इससे चिंता और अवसाद की स्थिति पैदा होती है. लंबे समय तक गांजे का नशा दिमागी तौर पर बीमार भी कर सकता है. गांजा एक पौधे से बनता है, जिसका वैज्ञानिक नाम कैनबिस है.

 

गांजा एक पौधे से बनता है, जिसका वैज्ञानिक नाम कैनबिस है.
गांजा एक पौधे से बनता है, जिसका वैज्ञानिक नाम कैनबिस है.
  • गांजे में 150 तरीके के रासायनिक यौगिक होते हैं, जिन्हें कैनबिनॉइड्स कहते हैं. इनमें सबसे खास हैं- टेट्राहाइड्रोकैनबिनॉल यानी THC और कैनबिडियॉल यानी CBD.
  • THC शरीर में नशा पैदा करने के लिए जिम्मेदार है और CBD नशे को कम करता है.
  • हम दिमाग के जरिए जिन चीजों को देखते, सुनते या महसूस करते हैं, वो दिमाग न्यूरॉन्स के जरिए करता है. इन्हीं न्यूरॉन्स पर कैनबिनॉइड रिसेप्टर होते हैं, यानी ऐसी जगह जहां कैनबिनॉइड जाकर चिपक जाते हैं.
  • कुछ लोगों को दौड़ने के बाद एक तरह का आनंद आता है, जो एनेंडेमाइड के जरिए होता है. जब कोई गांजे का धुआं लेता है, तो THC एनेंडेमाइड की नकल करता है और खून के जरिए शरीर में पहुंचता है.
  • दिमाग के जिन हिस्सों में कैनबिनॉइड रिसेप्टर की संख्या ज्यादा होती है, उन पर THC सबसे ज्यादा असर करता है.

अमेरिका के 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ड्रग एब्यूज' (NIDA) जैसी कई संस्थाओं और मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, लंबे समय तक गांजे का नशा करने वाले करीब 30% लोगों में मैरुआना यूज डिसऑर्डर यानी गांजे का नशा करने की लत लग सकती है. अगर 18 साल से कम उम्र में इसका इस्तेमाल शुरू कर दिया जाए, तो लत लगने का खतरा 7 गुना तक ज्यादा हो सकता है.

सवाल 4- क्या चरस और भांग से ज्यादा खतरनाक होता है गांजा? यह बनता कैसे है?
जवाब- भांग, चरस और गांजा एक ही पौधे 'कैनबिस' की प्रजातियों से बनता है. यह तीनों साइकोएक्टिव ड्रग हैं, जो सीधे दिमाग पर असर करते हैं.

  • गांजा: इसे खासतौर पर पौधे के फूल को सुखाकर तैयार किया जाता है और नशे के लिए इसका धुआं लिया जाता है.
  • भांग: पौधे की पत्तियों को पीसकर बनाई जाती है. इसे पीने वाली चीजों में मिलाकर या फिर लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए सूखी गोली में बदलकर खाया जाता है.
  • चरस: पौधे के रेजिन यानी चिपचिपे पदार्थ को इकठ्ठा करके तैयार किया जाता है, जिसे बीड़ी, सिगरेट वगैरह में मिलाकर या अकेले ही धुएं के जरिए फूंका जाता है.

 

भांग, चरस और गांजा एक ही पौधे 'कैनबिस' की प्रजातियों से बनता है.
भांग, चरस और गांजा एक ही पौधे 'कैनबिस' की प्रजातियों से बनता है.

सवाल 5- तो फिर भारत में गांजा बेचने पर ही पाबंदी क्यों?
जवाब- 1961 में यूनाइटेड नेशंस यानी UN में एक कन्वेंशन के तहत कैनबिस को नशीले पदार्थों की कैटेगरी में डाल दिया था. नवंबर 1985 में राजीव गांधी की सरकार ने नार्कोटिक ड्रग और साइकोट्रोपिक सब्सटेंस यानी NDPS एक्ट पास किया. इसके तहत...

  • नार्कोटिक और साइकोट्रोपिक यानी नशीले पदार्थ के प्रोडक्शन/खेती, खरीद, ट्रांसपोर्ट, स्टोर और कंजम्प्शन को बैन किया गया. इसमें कुल 6 चैप्टर और 83 सेक्शन हैं.
  • NDPS एक्ट में भांग के पौधे के अलग-अलग हिस्सों के इस्तेमाल को कानूनी और गैरकानूनी घोषित किया गया. कानून में पौधे के फूल को गांजे के तौर पर परिभाषित किया गया है, जिसका इस्तेमाल एक अपराध है. इसी वजह से गांजे का इस्तेमाल भी गैरकानूनी है.
  • भांग के पौधे को गैरकानूनी नहीं माना गया, लेकिन इसकी बिक्री को कंट्रोल करने के लिए सरकारी दायरे में लाया गया. सरकार से लाइसेंस लिए बिना, भांग या उससे बनी ठंडाई को व्यावसायिक तौर पर नहीं बेचा जा सकता.
  • भांग के पौधे या गांजे को लेकर बने कानून के उल्लंघन पर 1 साल से 20 साल तक की सजा हो सकती है और 10 हजार से 2 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है.

 

सरकार से लाइसेंस लिए बिना, भांग या उससे बनी ठंडाई को व्यावसायिक तौर पर नहीं बेचा जा सकता.
सरकार से लाइसेंस लिए बिना, भांग या उससे बनी ठंडाई को व्यावसायिक तौर पर नहीं बेचा जा सकता.

हालांकि भांग और उससे बनने वाले ड्रग्स को लेकर ये भी बहस है कि असल में इसका कोई नकारात्मक प्रभाव है भी या नहीं.

सवाल 6- क्या दुनिया के बाकी देशों में गांजा फूंकने की आजादी है?
जवाब- चीन, जापान, सऊदी अरब, कोरिया, ईरान, पाकिस्तान, स्वीडन, केन्या, भूटान, सिंगापुर, मलेशिया जैसे दुनिया भर के करीब 100 देशों में कैनबिस पर पूरी तरह बैन है. वहीं सख्त कानूनों और एंटी ड्रग कैंपेन जैसी लाख कोशिशों के बावजूद वेनेजुएला जैसे लैटिन अमेरिकी देश, अफ्रीका के कई छोटे-छोटे देश और अमेरिका से लेकर भारत तक गांजे और दूसरे नार्कोटिक ड्रग्स का बहुत बड़ा अवैध कारोबार चलता है.

वहीं, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कोलंबिया, जॉर्जिया और अमेरिका जैसे देशों में गांजा या भांग पर प्रतिबंध नहीं हैं. हालांकि, कुछ कानूनी दायरों में रहकर इस्तेमाल और बेचा जा सकता है.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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