Krishnavataram Part 1 Review: 2026 की सबसे शानदार फिल्म है 'कृष्णावतारम् पार्ट 1', ऐसा लगेगा श्रीकृष्ण सिनेमा हॉल में आ गए हैं
Review: 'कृष्णावतारम्: पार्ट 1 द हार्ट (हृदयम्)' सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. ये फिल्म आपको अपने भव्य इतिहास को फिर से जानने का मौका देगी. फिल्म को देखने से पहले इसका रिव्यू पढ़ लीजिए.
Hardik Gajjar
Sushmitha Bhat, Siddharth Gupta, Sanskruti Jayana
भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर कई सीरियल बने हैं. फिल्मों में भी उन्हें अलग-अलग अंदाज में दिखाया गया है. अब श्रीकृष्ण की उन्हीं लीलाओं को निर्देशक हार्दिक गुज्जर इस फिल्म में ले आए हैं. ये फिल्म ट्रायोलॉजी है, ऐसे में अभी पहला ही पार्ट आया है, जिसमें उनके दिल की बात हो रही है. जो वो इस दुनिया में छोड़ गए हैं. जहां श्रीकृष्ण के दिल की बात होगी, उसमें राधा, रुक्मणि और भामा की बात भी होगी. ये फिल्म की कहानी भी उनके आसपास घूम रही है.
कहानी
फिल्म की कहानी जग्गनाथ पुरी मंदिर से शुरू होती है, जहां स्वामी जी आज के दौर के लड़के को उनकी महान लीलाओं के बारे में बता रहे होते हैं. वहां से कहानी भालका तीर्थ आती है, फिर द्वारका, बरसाना, वृंदावन तक जाती है. महाभारत का जिक्र भी है.
कैसी है फिल्म?
फिल्म बेहद विस्तार से बनाई गई है. श्रीकृष्ण के दिल की बात हो रही है, तो राधा संग उनका प्रेम, रुक्मणी और भामा साथ शादी, द्रौपदी के साथ उनकी मित्रता, महाभारत का कारण, नरकासुर से युद्ध समेत कई चीजों को फिल्म में दिखाया गया है. बातों बातों में श्रीकृष्ण की वो दिल जीत लेने वाला अंदाज मनमोह लेता है. फिल्म की कहानी बांधे रखती है. स्क्रीन की खूबसूरती, विजुअल इफेक्ट्स नजरें नहीं हटने देते हैं.
जो नारी का सम्मान नहीं करता, वो समाज कभी नहीं टिकता, हर बार प्रेम से स्थापना करना चाहता हूं और नियति मेरे हाथ में शस्त्र थाम देती है... अधर्म के विनाश हेतु महायुद्ध होगा, विनाश का कारण मुझे समझेंगे और विनाश का कारण तम्हें यही नितयि है... जैसे संवाद रोंगटे खड़े करते हैं.
एक्टिंग
फिल्म में यूं तो कई किरदार हैं, लेकिन मुख्य तौर पर कहानी चार किरदारों के आसपास चलती है. सिद्धार्थ गुप्ता भगवान श्रीकृष्ण के रोल में जंचे है. उनके चेहरे का आत्मविश्वास, वो हल्की से नटखट मुस्कान, पर्दे पर उन्हें देखकर कई बार हाथ जोड़ने का मन कर जाता है. राधा के रोल में सुष्मिता भट्ट बेहद प्यारी लगी हैं. सत्यभामा बनीं संस्कृति जयना का काम अच्छा है. अंत में उन्हें एक्शन करने का मौका भी मिला है. रुक्मणि के रोल में निवाशिनी कृष्णन काफी मेच्योर लगती हैं.
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राइटिंग और डायरेक्शन
फिल्म की राइटिंग और डायरेक्शऩ ही इस फिल्म को भव्य बनाती है. राम मोरी, प्रकाश कपाड़िया और हार्दिक गज्जर का स्क्रीन प्ले थिएटर को कभी द्वारका, कभी बरसाना, तो कभी युद्ध क्षेत्र में आसानी से तब्दील कर देता है. तीनों ने ही फिल्म को भव्य बनाने में कोई कमी नहीं रखी है. हार्दिक गज्जर की पकडड निर्देशन पर मजबूत है. वो हर फ्रेम को रंगों से सजाते हैं. बीच-बीच में कहानी को महाभारत की ओर लेकर जाना दिलचस्प लगता है. फिल्म के सिनेमैटोग्राफर अयानंका बोस का काम भी अच्छा है. खासकर क्लाइमेक्स में द्वारका के पानी के नीचे जाने वाले दृश्यों को उन्होंने बखूबी फिल्माया है.
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म्यूजिक
इरशाद कामिल के लिखे बोल और प्रसाद एस का संगीत इस फिल्म की आत्मा है. फिल्म के अलग-अलग मौकों के लिए लिखे गए गीत सीन के साथ सटीक लगते हैँ, खासकर राधा और कृष्ण पर फिल्माया गया गाना प्रेम की लीला... बेहद खूबसूरत है.
अगर आप श्रीकृष्ण भक्त हैं या कुछ सवालों के जवाब चाहते हैं, तो इस फिल्म को जरुर देखें. खासकर बच्चों के लिए ये एक अहम फिल्म है, जो इतिहास से मिलवाएगी, श्रीकृष्णा लीलाओं को फिर पर्दे पर देखने का मौका देगी.
रेटिंग –4 स्टार्स
























