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Neem Karoli Baba: सिर्फ कैंची धाम नहीं, भारत में कहां-कहां नीब करौरी बाबा के मंदिर?

Neem Karoli Baba: नीब करौरी बाबा की पहचान सिर्फ कैंची धाम तक सीमित नहीं है. कैंची धाम उनकी सबसे प्रसिद्ध जगहों में जरूर शामिल है, लेकिन देश के दूसरे हिस्सों में भी उनसे जुड़े आश्रम और मंदिर हैं.

Neem Karoli Baba Ashrams Beyond Kainchi Dham: ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद नीब करौरी बाबा को लेकर लोगों की दिलचस्पी भी बढ़ती दिखाई दे रही है. इसका असर उत्तराखंड के कैंची धाम में भी नजर आ रहा है, जहां हर वीकेंड बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. लंबी छुट्टियों और वीकेंड पर कैंची धाम जाने वाली सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. कई जगहों पर लोगों को गाड़ियों से उतरकर पैदल आगे बढ़ना पड़ रहा है, जबकि कुछ परिवार घंटों तक ट्रैफिक में फंसे रहते हैं.

हल्द्वानी से कैंची धाम और आगे नैनीताल-अल्मोड़ा की ओर जाने वाले रास्तों पर भी भारी ट्रैफिक का असर देखने को मिल रहा है. जिस सफर में पहले दो से तीन घंटे लगते थे, वही कई बार 10 से 12 घंटे तक खिंचने की बात सामने आई है. भीमताल, भवाली और गरम पानी के आसपास गाड़ियों, बसों और दोपहिया वाहनों की लंबी कतारें देखी गईं. आश्रम के बाहर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु नजर आए. कैंची धाम में रोजाना आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पहले करीब 4,000 से 5,000 बताई जाती थी, लेकिन कुछ दिनों में यह 6,000 से ज्यादा पहुंच गई. वहीं वीकेंड पर यह संख्या 15,000 से 20,000 या उससे भी ज्यादा होने की बात कही गई है.

लेकिन नीब करौरी बाबा की पहचान सिर्फ कैंची धाम तक सीमित नहीं है. कैंची धाम उनकी सबसे प्रसिद्ध जगहों में जरूर शामिल है, लेकिन देश के दूसरे हिस्सों में भी उनसे जुड़े आश्रम और मंदिर हैं. अगर आप नीब करौरी बाबा से जुड़े आध्यात्मिक स्थलों को देखना चाहते हैं, तो कैंची धाम के अलावा इन जगहों के बारे में भी जान सकते हैं. भीड़ को देखते हुए प्रशासन को ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा.


Neem Karoli Baba: सिर्फ कैंची धाम नहीं, भारत में कहां-कहां नीब करौरी बाबा के मंदिर?

कैंची की ओर जाने वाले कुछ वाहनों को रोका गया और पहाड़ की तरफ जाने वाले ट्रैफिक को दूसरे रास्तों से भेजा गया. भीमताल और भवाली के पार्किंग क्षेत्रों से शटल सेवा बढ़ाई गई, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को वाहनों के बजाय दूसरी व्यवस्था से कैंची धाम तक पहुंचाया जा सके.

वृंदावन आश्रम

नीब करौरी बाबा से जुड़े प्रमुख स्थानों में वृंदावन का आश्रम भी शामिल है. यह आश्रम 1967 में परिक्रमा मार्ग पर मथुरा रोड के पास स्थापित किया गया था. यहीं 1973 में महाराजजी ने अपना शरीर छोड़ा था. आश्रम परिसर में हनुमान, दुर्गा, सीता-राम और शिवजी को समर्पित मंदिर हैं. इसके अलावा महाराजजी का महासमाधि मंदिर भी है. हर साल सितंबर में यहां महासमाधि भंडारे का आयोजन किया जाता है.



Neem Karoli Baba: सिर्फ कैंची धाम नहीं, भारत में कहां-कहां नीब करौरी बाबा के मंदिर?

1973 में महाराजजी ने चैत्र नवरात्र के दौरान यहां नौ दिन का यज्ञ भी करवाया था. बाद में उनकी स्मृति में उसी स्थान पर एक विशेष मंदिर बनाया गया, जहां उनके अंतिम संस्कार की जगह बताई जाती है. इस मंदिर की वास्तुकला में मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे और पगोडा जैसी अलग-अलग स्थापत्य शैलियों का मेल दिखाई देता है.

दिल्ली का नीब करौरी बाबा आश्रम

नीब करौरी बाबा का दिल्ली आश्रम भी उनके प्रमुख स्थानों में गिना जाता है. महाराजजी ने 1973 की गर्मियों में इस आश्रम की शुरुआत की थी, यानी महासमाधि से कुछ समय पहले. यह आश्रम मेहरौली के पास मंडी रोड से जोनापुर की ओर स्थित है. यहां सुबह और शाम आरती होती है. आश्रम का परिसर शांत और हरे-भरे वातावरण के लिए जाना जाता है. यहां ठहरने के इच्छुक श्रद्धालुओं को पहले से अनुमति लेने और परिचय पत्र देने की जरूरत होती है.

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काकड़ीघाट, अल्मोड़ा

उत्तराखंड में ही नीब करौरी बाबा से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण स्थान काकड़ीघाट है. यह अल्मोड़ा और रानीखेत के बीच कोसी नदी के किनारे स्थित है. काकड़ीघाट का संबंध कई संतों से रहा है. नीब करौरी बाबा के अलावा सोमबारी बाबा, पंजाबी बाबा और स्वामी विवेकानंद के यहां आने और ध्यान करने का भी उल्लेख मिलता है. बताया जाता है कि स्वामी विवेकानंद ने 1890 में यहां पीपल के पेड़ के नीचे ध्यान किया था. नीब करौरी बाबा के लिए भी काकड़ीघाट लंबे समय तक ध्यान और आध्यात्मिक साधना से जुड़ा स्थान रहा. नदी किनारे का शांत वातावरण इसे बाकी भीड़भाड़ वाली जगहों से अलग अनुभव देता है.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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