अब बाजार में मिलेगी फलों से बनी शराब, जानिए ये कैसे बनती है और किस राज्य में सबसे पहले मिलेगी?
केरल सरकार जल्द ही फलों से बनी शराब के उत्पादन को जल्दी मंजूरी देगी.सरकार के इस फैसले पर आगामी विधानसभा वित्त विषय समिति में विचार किया जाएगा.

केरल सरकार जल्द ही फलों से बनी शराब के उत्पादन को जल्दी मंजूरी देगी.सरकार के इस फैसले पर आगामी विधानसभा वित्त विषय समिति में विचार किया जाएगा. यह एक बहुप्रतीक्षित नीतिगत बदलाव है जिस पर किसान संगठनों ने जोर दिया है ताकि उनके समग्र उत्पादन के मूल्य उत्पादन को बढ़ाने के लिए अनानास, कटहल, केले और काजू को अन्य फलों में शामिल किया जा सके.
वाइनरी नियमों को ध्यान में रखते हुए इसे मंजूरी दी गई है
2022 में, केरल स्मॉल स्केल वाइनरी नियमों के लिए नए कानून में विनिर्माण इकाइयों द्वारा हॉर्टिवाइन के उत्पादन को मंजूरी देने के लिए विधानसभा विषय समिति के संशोधनों को शामिल किया गया. हॉर्टिवाइन फलों और अन्य कृषि उत्पादों से बनी एक हल्की वाइन है जिसमें 15.5% तक अल्कोहल होता है.
फल से बनी शराब के बिजनेस को बढ़ावा मिल सकता है
इससे न केवल स्थानीय एल्को-बेव परिदृश्य को विकसित करने में मदद मिलेगी बल्कि अधिक किसान इस क्षेत्र में निवेश और नवाचार करने के लिए आकर्षित होंगे. जिला समुदायों के अनुसार, यदि निर्णय प्रभावी होता है तो फल-आधारित एल्को-बेव उद्योग को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिल सकता है.
कैसे बनाई जाती है शराब
शराब बनाने के लिए दो बुनियादी प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है. इनमें पहला है फर्मेंटेशन और दूसरा है डिस्टलेशन. डिस्टलेशन यानि जो तकनीक से बनाई गई शराब, इसके जहरीले होने के चांसेज ना के बराबर होते हैं. जबकि, फर्मेंटेशन के द्वारा बनाई गई शराब कई बार जहरीली हो जाती है. देसी शराब बनाते समय में भी कई बार इसी प्रक्रिया का पालन किया जाता है. फर्मेंटेशन से शराब बनाने के लिए अनाज, फल, गन्ना, महुआ, खजूर, चावल और कई तरह की स्टार्ट वाली चीजों में ईस्ट मिलाकर इन्हें फर्मेंट किया जाता है.
वहीं इसे तेजी से फर्मेंट करने के लिए ऑक्सिटॉक्सिन का भी इस्तेमाल किया जाता है. कई बार इस प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए इसमें नौसादर, बेसरमबेल की पत्तियां और यूरिया भी मिलाया जाता है. इन तमाम चीजों को काफी समय तक मिट्टी में डाला जाता है, इसके बाद इसे भट्टी पर चढ़ाया जाता है और इससे निकलने वाली भाप से शराब तैयार की जाती है. शराब बनाने वाले कई बार शराब को और ज्यादा नशीला बनाने के लिए इसमें मेथेनॉल भी मिलाते हैं.
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