एक्सप्लोरर

Temple Mystery: शिव मंदिरों में नवग्रह की मूर्तियां क्यों होती हैं, लेकिन वैष्णव मंदिरों में क्यों नहीं? जानें शास्त्रों का रहस्य

Temple Mystery: क्या आपने कभी सोचा है कि अधिकांश शिव मंदिरों में नवग्रह की मूर्तियां होती हैं, लेकिन वैष्णव मंदिरों में नहीं? जानें इसके पीछे का शास्त्रीय, पौराणिक और धार्मिक रहस्य.

Temple Mystery: भारत के अधिकांश प्राचीन शिव मंदिरों में आपने नवग्रहों की मूर्तियां या नवग्रह मंडल जरूर देखा होगा. कई श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन से पहले या बाद में नवग्रहों की भी पूजा करते हैं.

वहीं, यदि आप वैष्णव मंदिरों जैसे भगवान विष्णु, श्रीराम या श्रीकृष्ण के मंदिरों में जाएं, तो वहां नवग्रहों की स्थापना बहुत कम देखने को मिलती है. आखिर ऐसा क्यों है? क्या इसके पीछे कोई धार्मिक नियम है या फिर शास्त्रों में इसका कोई विशेष कारण बताया गया है? आइए जानते हैं इस रोचक रहस्य के बारे में.

नवग्रह कौन हैं?

हिंदू धर्म में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु और केतु को नवग्रह कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इन ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति के जीवन, कर्म, स्वास्थ्य, करियर और भाग्य पर पड़ता है. इसलिए कई लोग ग्रह दोषों की शांति के लिए नवग्रहों की पूजा भी करते हैं.

शिव मंदिरों में नवग्रह क्यों स्थापित किए जाते हैं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को 'महाकाल' और 'ग्रहों के भी स्वामी' माना गया है. कई पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि नवग्रह भी भगवान शिव की आज्ञा का पालन करते हैं. इसलिए शिव मंदिरों में नवग्रहों की स्थापना का उद्देश्य यह माना जाता है कि भक्त भगवान शिव के साथ-साथ ग्रहों का भी आशीर्वाद प्राप्त कर सकें.

ज्योतिष शास्त्र में भी माना जाता है कि भगवान शिव की आराधना करने से शनि, राहु, केतु सहित कई ग्रहों के अशुभ प्रभाव कम हो सकते हैं. यही कारण है कि ग्रह शांति के अनेक उपायों में शिव पूजा का विशेष महत्व बताया गया है.

वैष्णव मंदिरों में नवग्रह कम क्यों दिखाई देते हैं?

वैष्णव परंपरा का मुख्य आधार भगवान विष्णु और उनके अवतारों की भक्ति है. इस परंपरा में यह मान्यता प्रमुख है कि जो भक्त पूर्ण श्रद्धा से भगवान विष्णु की शरण में रहता है, उसकी रक्षा स्वयं भगवान करते हैं. इसलिए यहां ग्रहों की अलग से पूजा पर अपेक्षाकृत कम जोर दिया जाता है.

हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि वैष्णव परंपरा नवग्रहों का सम्मान नहीं करती. नवग्रहों को देवतुल्य माना जाता है, लेकिन मंदिर की आराधना का केंद्र भगवान विष्णु ही होते हैं. इसलिए अधिकांश वैष्णव मंदिरों में अलग नवग्रह मंडल स्थापित नहीं किया जाता.

क्या शास्त्रों में इसका कोई नियम है?

धार्मिक ग्रंथों में ऐसा कोई सार्वभौमिक नियम नहीं मिलता कि वैष्णव मंदिरों में नवग्रह बिल्कुल नहीं होने चाहिए या शिव मंदिरों में उनका होना अनिवार्य है. यह परंपरा मुख्य रूप से मंदिर की संप्रदाय परंपरा, आगम शास्त्र और स्थानीय धार्मिक परंपराओं पर आधारित होती है.

यही कारण है कि कुछ वैष्णव मंदिरों में भी नवग्रह देखने को मिल सकते हैं, जबकि कुछ छोटे शिव मंदिरों में उनकी स्थापना नहीं होती.

ज्योतिषाचार्य पंडित सुरेश श्रीमाली के अनुसार, भगवान शिव को ग्रहों का अधिष्ठाता माना जाता है. इसलिए शिव मंदिरों में नवग्रहों की स्थापना का विशेष महत्व है. वहीं वैष्णव परंपरा में भगवान विष्णु की भक्ति को सर्वोपरि माना गया है, इसलिए वहां ग्रह पूजा की अपेक्षा ईश्वर भक्ति पर अधिक बल दिया जाता है.

वे बताते हैं कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रह दोष हो तो भगवान शिव की उपासना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और श्रद्धा के साथ नवग्रहों का सम्मान करना लाभकारी माना जाता है. साथ ही वे यह भी कहते हैं कि किसी भी देवी-देवता की पूजा में सबसे महत्वपूर्ण तत्व श्रद्धा और सद्कर्म हैं.

क्या पहले नवग्रह की पूजा करनी चाहिए?

कई शिव मंदिरों में परंपरा है कि श्रद्धालु पहले भगवान शिव के दर्शन करते हैं और उसके बाद नवग्रहों की परिक्रमा करते हैं. हालांकि अलग-अलग मंदिरों की परंपराएं अलग हो सकती हैं. इसलिए जिस मंदिर में जाएं, वहां की परंपरा का पालन करना उचित माना जाता है.

शिव मंदिरों और वैष्णव मंदिरों की परंपराएं अलग-अलग धार्मिक दर्शन और आगम पर आधारित हैं. इसलिए दोनों मंदिरों की पूजा पद्धति में भी अंतर दिखाई देता है. नवग्रहों की स्थापना किसी श्रेष्ठता या हीनता का विषय नहीं, बल्कि संप्रदाय और मंदिर परंपरा का हिस्सा है. इसलिए सभी देवी-देवताओं और धार्मिक परंपराओं का सम्मान करना ही सनातन धर्म की मूल भावना है.

यह भी पढ़े- Jagannath Puri 2026: 200 साल पहले समुद्र में हुआ चमत्कार! आज भी पुरी मंदिर में टंगी है फ्रांस की घंटी

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

रुचि शर्मा ज्योतिष जानकार हैं जो पिछले 13 वर्षों से ज्योतिष, धर्म और आध्यात्मिक विषयों पर अध्ययन, शोध और लेखन कर रही हैं. वैदिक ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, हस्तरेखा शास्त्र, टैरो, Chinese Astrology, राशिफल (Horoscope), ग्रह गोचर, पंचांग (Panchang), व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष पकड़ है. जटिल ज्योतिषीय सिद्धांतों और ग्रह-नक्षत्रों के प्रभाव को सरल एवं सहज भाषा में समझाना उनकी प्रमुख पहचान है.

उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से मास्टर इन मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है. मीडिया और डिजिटल कंटेंट के क्षेत्र में लंबे अनुभव के दौरान वह राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान, बीईसीआईएल, टाइम्स ग्रुप और Astrosage जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ कार्य कर चुकी हैं. पिछले कई वर्षों से उनका लेखन मुख्य रूप से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर केंद्रित रहा है.

रुचि शर्मा पारंपरिक ज्योतिषीय ग्रंथों, पंचांगों और प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर विषयों का अध्ययन करती हैं तथा यूजर्स तक सरल, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाने का प्रयास करती हैं. उनके लेखों का उद्देश्य ज्योतिष और धर्म से जुड़े विषयों को आम पाठकों के लिए सहज और समझने योग्य बनाना है.

Read More
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

Chor Panchak 2026: आज से चोर पंचक शुरू, क्यों ये माना जा रहा ये खतरनाक, किन चीजों से बचकर रहें
आज से चोर पंचक शुरू, क्यों ये माना जा रहा ये खतरनाक, किन चीजों से बचकर रहें
Sawan 2026: चांदनी चौक से लेकर छतरपुर तक 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंजी राजधानी; पुलिस मुस्तैद, कांवड़ शिविर भी शुरू
चांदनी चौक से छतरपुर तक: सावन के पहले दिन दिल्ली के प्रमुख शिव मंदिरों का हाल, जाने दर्शन की व्यवस्था
August 2026: अगस्त में ग्रहों की बड़ी हलचल: 4 ग्रहों के गोचर से मचेगी उथल-पुथल, आपकी राशि पर क्या होगा असर?
अगस्त में ग्रहों की बड़ी हलचल, 4 ग्रहों के गोचर से मचेगी उथल-पुथल, आपकी राशि पर क्या होगा असर?
Jyotirlinga Darshan: दर्शन के बाद क्यों होता है 'एनर्जी असंतुलन'? जानें इससे जुड़ी खास बातें
नेगेटिव एनर्जी का बाहर निकलना या कुछ और? ज्योतिर्लिंग दर्शन के बाद तबीयत खराब होने का असली सच
Advertisement

वीडियोज

24 घंटे...4 मर्डर...दिल्ली में लगता है डर !
Ramayana Trailer Review: Ranbir Kapoor के Ram और Yash के Ravan लुक ने जीता दिल
Spider-Man Brand New Day Review: Tom Holland ने फिर जीता दिल, Emotions और Action का शानदार मेल
Ramayana Trailer Review: Yash का Ravan अवतार शानदार, Ranbir Kapoor ने भी जीता दिल
Ranveer Singh का मजेदार जवाब हुआ वायरल, Female फैन की बात पर हंसी नहीं रोक पाए लोग
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
चीन ने J-20 फाइटर जेट LAC के करीब किया तैनात, सैटेलाइट से सामने आयी तस्वीर
चीन ने J-20 फाइटर जेट LAC के करीब किया तैनात, सैटेलाइट से सामने आयी तस्वीर
215 वाइस चांसलरों ने लिखा प्रियंका गांधी को ओपन लेटर, पढ़ें पूरा मामला
215 वाइस चांसलरों ने लिखा प्रियंका गांधी को ओपन लेटर, पढ़ें पूरा मामला
बांकीपुर: 34.30% वोटिंग, प्रशांत किशोर, BJP या RJD किसे बड़ा झटका?
बांकीपुर: 34.30% वोटिंग, प्रशांत किशोर, BJP या RJD किसे बड़ा झटका?
BO Collection: 'द ओडिसी' से 'बॉर्डर 2' तक, 'स्पाइडर मैन' ने तोड़े 9 बड़ी फिल्मों के ओपनिंग डे रिकॉर्ड्स
'द ओडिसी' से 'बॉर्डर 2' तक, 'स्पाइडर मैन' ने तोड़े 9 बड़ी फिल्मों के ओपनिंग डे रिकॉर्ड्स
रहाणे की रिटायरमेंट पर किसने क्या कहा, सचिन-युवराज और सूर्या ने किया भावुक पोस्ट
रहाणे की रिटायरमेंट पर किसने क्या कहा, सचिन-युवराज और सूर्या ने किया भावुक पोस्ट
पेपर लीक बवाल के बीच ओडिशा में पेपर लीक, व्हाट्सएप पर वायरल, जांच के आदेश
पेपर लीक बवाल के बीच ओडिशा में पेपर लीक, व्हाट्सएप पर वायरल, जांच के आदेश
Xप्लेन: देश के दो बड़े नौकरशाह होंगे रिटायर्ड! कैबिनेट सेक्रेटरी और गृह सचिव के लिए अब कौन?
देश के दो बड़े नौकरशाह होंगे रिटायर्ड! कैबिनेट सेक्रेटरी और गृह सचिव के लिए अब कौन?
मनुस्मृति पर खरगे का बयान, भड़के BJP सांसद, नड्डा बोले- अशांति फैलेगी
मनुस्मृति पर खरगे का बयान, भड़के BJP सांसद, नड्डा बोले- अशांति फैलेगी
Embed widget