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Burger in Bhog: भगवान को बर्गर का भोग लगाना सही या गलत ?

Premanand Maharaj: भगवान को भोग लगाना पूजा का ही हिस्सा है, लेकिन क्या भगवान को बर्गर-पिज्जा का भोग लगाया जा सकता है.

Premanand Maharaj: शास्त्रों में कहा गया है कि स्वयं भोजन करने से पहले भगवान को भोग लगाना चाहिए. हिंदू धर्म में पूजा पाठ आदि में तो भगवान को भोग लगाया ही जाता है कई घरों में रोजाना जो भोजन पकता है उसका भोग भी ईश्वर को समर्पित किया जाता है उसके बाद ही परिवार वाले भोजन करते हैं.

भगवान के लिए हम जब भी भोग बनाते हैं, तो भोजन की शुद्धता, पवित्रता और सात्विकता का ध्यान रखते हैं. कई भक्तों के मन में ये सवाल रहता है कि हम जो खाते हैं उसे भगवान को अर्पित कर सकते हैं क्या जैसे प्रेमानंद महाराज से एक व्यक्ति ने सवाल किया कि क्या भगवान को बर्गर-पिज्जा भोग में चढ़ाया जा सकता है. इस पर महाराज ने उत्तर देकर बड़ी सरलता से उसकी दुविधा दूर की.

 
 
 
 
 
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भगवान को भोग में बर्गर भोग लगाना सही या गलत

एक व्यक्ति ने पूछा कि क्या घर में पिज्जा-बर्गर बनाकर भगवान को भोग लगा सकते हैं, इस पर  प्रेमानंद महाराज ने कहा कि ईश्वर भक्त का भाव देखते हैं, इसलिए आप उनके लिए घर में सात्विक रूप से इन चीजों को बनाकर भोग लगा सकते हैं. घर और बाजार के खाने में अंतर है, घर में हम शुद्ध घी या तेल से भोजन पकाते हैं लेकिन बाजार में शुद्धता का ध्यान नहीं रखा जाता, इसलिए बाजार के खाने पर अंकुश रखें. भोग में अपवित्र खाने का कोई स्थान नहीं होता.

भोग क्यों लगाया जाता है

शास्त्रों के अनुसार भगवान को भोग लगाकर भोजन करने से अन्न दोष दूर होता है. भगवान के लिए भोग बनाना जातक की त्याग और दान की भावना दर्शाती है. उदाहरण- जब आप लड्डू खाते हो तो वो स्वंय और स्वजनों को खिलाते हो का होता है जबकि वही लड्डू जब भोग लगाते हो तो ढूंढ-ढूंढकर लोगों को बांटते हो, जो त्याग की भावना दर्शाता है.  

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

जागृति सोनी बरसले (Jagriti Soni Bursle)

धर्म, ज्योतिष और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं पर शोध आधारित लेखन करने वाली डिजिटल पत्रकार

जागृति सोनी बर्सले धर्म, ज्योतिष, वास्तु और भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े विषयों की अनुभवी डिजिटल पत्रकार और लेखिका हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 10 वर्षों का अनुभव है. वर्तमान में वह ABP Live (Abplive.com) में बतौर कंसल्टेंट कार्यरत हैं, जहां वह व्रत-त्योहार जैसे नवरात्रि, करवा चौथ, दिवाली, होली, एकादशी, प्रदोष व्रत, हरियाली तीज आदि, धार्मिक मान्यताओं, ज्योतिषीय घटनाओं, शुभ मुहूर्त, वास्तु और फेंगशुई, पंचांग जैसे विषयों पर शोध आधारित और प्रमाणिक लेख लिखती हैं.

विशेषज्ञता (Expertise)

जागृति सोनी बर्सले विशेष रूप से इन विषयों पर लेखन करती हैं:

  • व्रत-त्योहार और भारतीय धार्मिक परंपराएं
  • वैदिक ज्योतिष और ग्रह-नक्षत्र आधारित घटनाएं
  • शुभ मुहूर्त और धार्मिक विधि-विधान
  • वास्तु शास्त्र और फेंगशुई
  • आध्यात्मिक मान्यताएं और सांस्कृतिक परंपराएं

उनके लेखों में धार्मिक विषयों को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि शास्त्रीय स्रोतों और प्रमाणिक ग्रंथों के आधार पर प्रस्तुत किया जाता है.

शिक्षा और पृष्ठभूमि

जागृति सोनी बर्सले ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से की है.

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर डॉट कॉम से की, जहां डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने धर्म, समाज और संस्कृति से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर लेख लिखे.

डिजिटल मीडिया में काम करते हुए उन्होंने टेक्स्ट और वीडियो दोनों फॉर्मेट में काम किया है और वीडियो सेक्शन में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में भी लंबे समय तक योगदान दिया है. इस अनुभव ने उन्हें आधुनिक डिजिटल पत्रकारिता के विभिन्न फॉर्मेट को समझने और प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की क्षमता दी है.

शास्त्रीय अध्ययन और शोध

जागृति सोनी बर्सले की विशेष रुचि धर्म और ज्योतिष के शास्त्रीय अध्ययन में है.

उन्हें प्राचीन धार्मिक ग्रंथों जैसे:

  • धर्म सिंधु
  • मुहूर्त चिंतामणि

का अच्छा ज्ञान है. इन ग्रंथों के आधार पर वह व्रत-त्योहार, पूजा-विधि, ज्योतिषीय घटनाओं और मुहूर्त से जुड़े विषयों को सरल, प्रमाणिक और शोधपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास करती हैं.

योगदान

जागृति सोनी बर्सले एक फ्रीलांस लेखक के रूप में भी कई मंचों पर आध्यात्म, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं.

उनका उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा में विश्वसनीय जानकारी के साथ प्रस्तुत करना है, ताकि पाठक इन विषयों को समझ सकें और सही जानकारी प्राप्त कर सकें.

व्यक्तिगत रुचियां

अध्यात्म और भारतीय परंपराओं के अध्ययन के प्रति उनकी गहरी रुचि है. खाली समय में उन्हें आध्यात्मिक और ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ना पसंद है. यह अध्ययन उनके लेखन को और अधिक गहन, तथ्यपूर्ण और संदर्भ आधारित बनाता है.

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