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ऑफिस पॉलिटिक्स से परेशान हैं? श्रीकृष्ण के ये 10 श्लोक सिखाएंगे कि बिना विचलित हुए 'शतरंज की बिसात' पर कैसे जीतें

Office Politics Tips: ऑफिस काम से नहीं, 'इंसानी शतरंज' से दुखी है? बेंगलुरु से नोएडा तक हर कोई इसी जाल में फंसा है. जानें श्रीकृष्ण के 10 मैनेजमेंट लेसन, जो 'कॉर्पोरेट कुरुक्षेत्र' का विजेता बनाएंगे.

Office Politics Tips: बेंगलुरु के चमकते टेक-पार्क हों या नोएडा की ऊंची इमारतें, आज का दफ्तर किसी कुरुक्षेत्र से कम नहीं है. यहां तलवारें नहीं चलतीं, बल्कि 'गॉसिप', 'एक-दूसरे की टांग खिंचाई' और 'फेवरिटिज्म' के अदृश्य तीर चलते हैं.

निखिल (बदला हुआ नाम), जो एक शानदार सॉफ्टवेयर इंजीनियर है, और प्रिया (बदला हुआ नाम), जो एक बेहतरीन मार्केटिंग मैनेजर है, आज इसी राजनीति का शिकार हैं. निखिल का भरोसा तब टूटा जब मीटिंग में उसका आईडिया उसके बॉस ने अपना बताकर पेश कर दिया, वहीं प्रिया को 'ऑफिस गॉसिप' के जरिए टारगेट किया जा रहा है.

अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या मॉडर्न कॉर्पोरेट दुनिया में गीता के सूत्र आज भी फिट बैठते हैं? जवाब है- हां. क्योंकि तकनीक बदली है, पर इंसान की फितरत (Human Psychology) आज भी वही है.

कॉर्पोरेट गलियारों की नब्ज को करीब से देखने और 'Decision Intelligence' की बारीकियों को समझने के बाद यही समझ आता है कि दफ्तर की इन उलझनों का सबसे सटीक समाधान आज भी भगवान श्रीकृष्ण के सूत्रों में ही छिपा है. यहां 10 ऐसी रणनीतियां दी गई हैं, जो आपके करियर के कुरुक्षेत्र में आपको एक अपराजेय योद्धा की तरह जीत दिलाएंगी. लेकिन कैसे आइए जानते हैं-

जब आपकी मेहनत का क्रेडिट कोई और ले उड़े

ऑफिस में अक्सर ऐसा होता है कि पसीना आप बहाते हैं और वाह-वाही कोई और लूट ले जाता है. निखिल जैसे लोग इस बात पर इतने दुखी हो जाते हैं कि उनका काम से मन उचट जाता है. लेकिन याद रखिए, क्रेडिट की यह चोरी बस कुछ ही दिनों की होती है.

अगर आप उस वक्त गुस्सा करेंगे या लड़ाई करेंगे, तो मैनेजमेंट आपको ही 'लड़ाकू' समझने लगेगा. राजनीति का जवाब चिल्लाकर नहीं, बल्कि अपनी चाल बदलकर दिया जाता है. जो आपका आईडिया चुरा रहा है, वह आपकी काबिलियत नहीं चुरा सकता.

गीता सूत्र: कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन. मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

श्रीकृष्ण कहते हैं कि तुम्हारा अधिकार सिर्फ काम करने पर है, उसकी तारीफ या फल पर नहीं. जब आप तारीफ की उम्मीद छोड़कर सिर्फ अपने काम की क्वालिटी पर ध्यान देते हैं, तो आपकी वैल्यू इतनी बढ़ जाती है कि कंपनी आपके बिना काम नहीं चला पाती. क्रेडिट चुराने वाला एक बार तो जीत जाएगा, पर वह हर बार नया आईडिया कहां से लाएगा?

चाय-कॉफी पर होने वाली गॉसिप से कैसे बचें

प्रिया ने महसूस किया कि कैंटीन में उसे लेकर ऐसी बातें उड़ाई जा रही हैं जिनका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है. क्या प्रिया का प्रमोशन किसी खास सिफारिश से हुआ?- ऐसी बातें जानबूझकर आपको मानसिक रूप से कमजोर करने के लिए कही जाती हैं. इसे 'माइंड गेम' कहते हैं. इसका मकसद आपको इतना परेशान करना होता है कि आप खुद ही गलती कर बैठें और अपना कॉन्फिडेंस खो दें.

गीता सूत्र: यदा संहरते चायं कूर्मोऽङ्गानीव सर्वश:. इन्द्रियाणीन्द्रियार्थेभ्यस्तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता॥

श्रीकृष्ण कछुए का उदाहरण देते हैं. जैसे कछुआ खतरा देखते ही अपने शरीर को समेट लेता है, वैसे ही आप भी ऑफिस की फालतू बातों से खुद को काट लें. जो बातें आपके काम की नहीं हैं, उन्हें अनसुना कर दें. ऑफिस में क्या सुनना है और क्या नहीं, यह चुनना ही आपकी असली ताकत है.

बॉस के बदलते मिजाज से खुद को कैसे संभालें

ऑफिस लाइफ में सबसे मुश्किल है अपनी शांति बनाए रखना. कभी बॉस आपकी तारीफों के पुल बांध देगा, तो कभी बिना बात के आपको नीचा दिखाएगा. निखिल और प्रिया जैसे लोग इस व्यवहार को दिल से लगा लेते हैं और सोचने लगते हैं कि मुझसे क्या गलती हुई? यह तनाव आपकी काम करने की ताकत को खत्म कर देता है. बॉस के मूड को मौसम की तरह समझें, जो कभी आपके हक में होगा, तो कभी नहीं.

गीता सूत्र: योगस्थ: कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय. सिद्धयसिद्धयो: समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥

श्रीकृष्ण कहते हैं कि हार हो या जीत, तारीफ मिले या डांट, दोनों हाल में खुद को शांत रखना ही 'योग' है. जब आप इमोशनली शांत हो जाते हैं, तो आप ऑफिस की चालों को ज्यादा साफ देख पाते. शांत दिमाग ही सबसे अच्छे फैसले लेता है.

जब आपको ऑफिस में 'अकेला' कर दिया जाए

पॉलिटिक्स का एक बड़ा तरीका है 'सोशल आइसोलेशन'. प्रिया को लगने लगा कि उसे जरूरी मेल नहीं भेजे जा रहे और टीम लंच में भी उसे नहीं बुलाया जा रहा. यह आपको मानसिक रूप से तोड़ने का तरीका है ताकि आप खुद को बेकार समझने लगें. लोग अक्सर इस अकेलेपन से डरकर गलत लोगों से हाथ मिला लेते हैं. लेकिन यह समय डरने का नहीं, बल्कि अपनी ताकत पहचानने का है.

गीता सूत्र: उद्धरेदात्मनात्मानं नात्मानमवसादयेत्. आत्मैव ह्य्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मन:॥

श्रीकृष्ण कहते हैं कि अपना उद्धार खुद करो. आप ही अपने सबसे अच्छे दोस्त हो और आप ही अपने दुश्मन. जब ऑफिस में कोई साथ न दे, तब अपनी स्किल्स पर काम करो. खुद को इतना काबिल बनाओ कि किसी ग्रुप की मदद की आपको जरूरत ही न पड़े.

मीठा बोलकर जहर घोलने वाले साथियों से दूरी

हर ऑफिस में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो दूसरों की बुराई करके आपके करीब आना चाहते हैं. वे प्रिया के पास आकर कहेंगे, सुना है बॉस तुम्हारी जगह किसी और को लाने वाले हैं, ताकि प्रिया घबराकर कोई गलत कदम उठा ले. निखिल भी इसी जाल में फंसा था. उसे लगा कि वह अपना दुख बांट रहा है, जबकि वह अपने विरोधियों को खुद ही हथियार दे रहा था.

गीता सूत्र: तस्मादसक्त: सततं कार्यं कर्म समाचर. असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुष:॥

यहां श्रीकृष्ण 'अनासक्ति' यानी लगाव न रखने की बात करते हैं. ऑफिस में लोगों से बहुत ज्यादा मत जुड़िए. अपना रिश्ता प्रोफेशनल रखिए, पर्सनल नहीं. जब आप लोगों से ज्यादा उम्मीद नहीं रखते और सिर्फ काम से काम रखते हैं, तो कोई भी आपको अपनी बातों में नहीं फंसा सकता.

आपका टैलेंट ही आपका सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है

राजनीति वहीं होती है जहां काबिलियत की कमी होती है. अगर निखिल और प्रिया सिर्फ औसत दर्जे के एम्प्लॉई होते, तो राजनीति उन्हें कब का बाहर कर देती. उनकी परफॉरमेंस ही थी जिसने उन्हें बचाए रखा. ऑफिस में आपकी वैल्यू इस बात से तय होती है कि आप कंपनी के लिए कितने जरूरी हैं. इसलिए, गॉसिप पर समय बर्बाद करने के बजाय अपनी स्किल बढ़ाने में समय लगाएं.

गीता सूत्र: बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते. तस्माद्योगाय युज्यस्व योग: कर्मसु कौशलम्॥

काम में कुशलता (Expertise) ही असली योग है. आपकी स्किल ही वह पावर है जो आपको भीड़ से अलग करती है. जब आप अपने काम में 'परफेक्ट' बन जाते हैं, तो वह हुनर एक ढाल बन जाता है जिसे राजनीति का कोई भी तीर तोड़ नहीं पाता.

गुस्से में आकर लिए गए फैसले पड़ सकते हैं भारी

प्रिया को एक अपमानजनक ईमेल भेजा गया, जिसका जवाब वह तुरंत गुस्से में देना चाहती थी. राजनीति करने वाले लोग यही चाहते हैं कि आप आपा खो दें और वे आपको 'बदतमीज' या 'अव्यावसायिक' साबित कर सकें. गुस्से में कहा गया एक शब्द आपकी साख मिटा सकता है. आज के जमाने में आपके लिखे मैसेज और ईमेल हमेशा के लिए रिकॉर्ड हो जाते हैं.

गीता सूत्र: क्रोधाद्भवति सम्मोह: सम्मोहात्स्मृतिविभ्रम:. स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि गुस्से से इंसान की अक्ल मारी जाती है और जब अक्ल काम नहीं करती, तो इंसान अपना ही नुकसान कर बैठता है. ऑफिस में जब भी गुस्सा आए, तो जवाब देने से पहले कम से कम 24 घंटे रुक जाएं. ठंडे दिमाग से दिया गया जवाब हमेशा जीत दिलाता है.

आंखें खुली रखें पर साजिशों का हिस्सा न बनें

सीधे होने और बेवकूफ होने में फर्क है. निखिल को पता होना चाहिए कि ऑफिस में कौन किसके साथ है और क्या खिचड़ी पक रही है. सजग रहने का मतलब राजनीति करना नहीं, बल्कि उसका शिकार होने से बचना है. आपको पता होना चाहिए कि हवा का रुख किधर है. इसे ही 'स्मार्ट वर्क' कहते हैं, हालात को देखकर सही कदम उठाना.

गीता सूत्र: तस्मात्सर्वेषु कालेषु मामनुस्मर युध्य च. मय्यर्पितमनोबुद्धिर्मामेवैष्यस्यसंशयम्॥

श्रीकृष्ण कहते हैं मुझे याद भी करो और युद्ध भी करो. यानी अपने करियर के लक्ष्य को याद रखो और ऑफिस की चुनौतियों का डटकर सामना करो. सावधान रहो, चारों ओर नजर रखो, पर अपनी ईमानदारी और सिद्धांतों को मत छोड़ो.

एक सही गाइड या मेंटर की मदद लें

कुरुक्षेत्र में अर्जुन जैसा योद्धा भी तब तक हार मान रहा था जब तक कृष्ण ने उसे रास्ता नहीं दिखाया. प्रिया जब राजनीति में फंसी, तो उसे एक ऐसे इंसान की जरूरत थी जो उसे सही सलाह दे सके. एक अनुभवी मेंटर आपको वह रास्ता दिखा सकता है जो आप खुद नहीं देख पा रहे. सही सलाह आपको गलत कदम उठाने से बचा लेती है.

गीता सूत्र: सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज. अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामी मा शुच:॥

इसका प्रोफेशनल मतलब है कि जब बहुत ज्यादा कन्फ्यूजन हो, तो अपने सिद्धांतों और एक भरोसेमंद मेंटर की बात सुनें. जब आप सही गाइडेंस में होते हैं, तो डर और चिंता खत्म हो जाती है और आप सही फैसला ले पाते हैं.

ईमानदारी और धैर्य का फल मीठा होता है

अक्सर लगता है कि जो लोग झूठ बोल रहे हैं या दूसरों को दबा रहे हैं, वे जल्दी प्रमोट हो रहे हैं. प्रिया और निखिल को भी लगने लगा था कि शायद उन्हें भी 'चालबाज' बनना पड़ेगा. लेकिन याद रखिए, चालाकी से मिली तरक्की बहुत कम समय की होती है. लंबे समय तक वही टिकता है जिसकी साख (Image) और मेहनत पक्की हो.

गीता सूत्र: यतो धर्मस्ततो जय:॥

जहां सच्चाई और कर्तव्य है, जीत वहीं होती है. हो सकता है कि शुरू में आपको नुकसान दिखे, पर लंबे करियर में आपकी ईमानदारी और मेहनत ही आपको सबसे ऊंचे मुकाम पर ले जाएगी.

सबसे जरूरी बात

ऑफिस की राजनीति को आप रातों-रात खत्म नहीं कर सकते, लेकिन अपने सोचने का तरीका जरूर बदल सकते हैं. कुरुक्षेत्र बाहर नहीं, हमारे दिमाग के अंदर है. अगर आप भगवान श्रीकृष्ण की तरह जागरूक और शांत हैं, तो कोई भी 'शकुनि' आपको आपकी जगह से हिला नहीं सकता. याद रखें जीत उसकी नहीं होती जिसके पास ज्यादा 'चमचे' हैं, जीत उसकी होती है जिसके पास पक्का 'हुनर' और 'धैर्य' है.

यह भी पढ़ें- Buddha Purnima 2026: 1 मई को दुनिया मनाएगी 'Vesak', आखिर क्यों डिजिटल शोर के बीच बुद्ध का 'मौन' बन रहा है ग्लोबल ट्रेंड?

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है.

वर्तमान में Youth Protest, CJP आंदोलन और एक्टर शाहरुख खान को लेकर उनकी भविष्यवाणियां सत्य साबित हुईं हैं, उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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Frequently Asked Questions

ऑफिस की राजनीति से कैसे बचें?

ऑफिस की राजनीति से बचने के लिए अपनी चतुराई का इस्तेमाल करें, शांत रहें और केवल अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें। अपनी स्किल्स को बेहतर बनाने पर ध्यान दें।

जब कोई आपका क्रेडिट ले ले तो क्या करें?

अगर कोई आपका क्रेडिट ले लेता है, तो गुस्सा करने या लड़ने की बजाय शांति से अपनी चाल बदलें। अपनी क्वालिटी पर ध्यान दें, आपकी वैल्यू अपने आप बढ़ जाएगी।

ऑफिस की गॉसिप से कैसे डील करें?

ऑफिस की गॉसिप को अनसुना कर दें। जो बातें आपके काम की नहीं हैं, उन्हें नजरअंदाज करें। यह चुनना आपकी असली ताकत है कि आपको क्या सुनना है।

बॉस के बदलते मिजाज से खुद को कैसे संभालें?

बॉस के मूड को मौसम की तरह समझें। हार या जीत, तारीफ या डांट, दोनों में शांत रहें। शांत दिमाग ही बेहतर फैसले लेता है।

ऑफिस में अकेले पड़ जाने पर क्या करें?

अगर ऑफिस में कोई साथ न दे, तो अपनी स्किल्स पर काम करें। खुद को इतना काबिल बनाएं कि किसी ग्रुप की मदद की जरूरत ही न पड़े।

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