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नारायण कवच: वह अदृश्य सुरक्षा दीवार, जिसे संसार की कोई बाधा नहीं भेद सकती!

'नारायण कवच' का पाठ एक ऐसी अदृश्य सुरक्षा दीवार खड़ी कर देता है, जो मनुष्य को दैहिक, दैविक और भौतिक, तीनों तापों से मुक्त कर देती है. श्रीमद्भागवत पुराण में इसका वर्णन मिलता है.

भारतीय संस्कृति में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) का पर्व केवल ऋतु परिवर्तन का सूचक नहीं है, बल्कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा के एक नए चक्र की शुरुआत है. जब सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस कालखंड को 'उत्तरायण' कहा जाता है, यानी प्रकाश की ओर गमन. शास्त्रों में इस संक्रमण काल को 'देवताओं का प्रभात' माना गया है.

इसी अत्यंत शुभ मुहूर्त में 'नारायण कवच' का पाठ एक ऐसी अदृश्य सुरक्षा दीवार खड़ी कर देता है, जो मनुष्य को दैहिक, दैविक और भौतिक, तीनों तापों से मुक्त कर देती है. श्रीमद्भागवत पुराण के छठे स्कंध के आठवें अध्याय में वर्णित यह कवच मात्र कुछ श्लोकों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक सिद्ध तांत्रिक और आध्यात्मिक रक्षा प्रणाली है.

नारायण कवच क्या है?

नारायण कवच की महिमा को समझने के लिए इसके इतिहास में जाना आवश्यक है. कथा के अनुसार, जब देवराज इंद्र अपनी सत्ता और तेज खो चुके थे और असुरों का भय बढ़ गया था, तब विश्वरूप नामक ऋषि ने उन्हें इस कवच का उपदेश दिया था. इस कवच की शक्ति से ही इंद्र ने पुनः त्रिलोक का आधिपत्य प्राप्त किया और अजेय बने.

यह कवच इस विचार पर आधारित है कि जब हम स्वयं को पूरी तरह से नारायण (परम सत्ता) को समर्पित कर देते हैं, तो ब्रह्मांड की समस्त शक्तियां हमारी रक्षा में लग जाती हैं. मकर संक्रांति के दिन इस शक्ति का आह्वान करना 'सोने पर सुहागा' के समान है, क्योंकि इस दिन सूर्य का तेज और विष्णु की कृपा एकाकार हो जाती है.

ये कवच कैसे काम करता है?

नारायण कवच के पीछे एक गहरा विज्ञान कार्य करता है. जब हम इसके श्लोकों का सस्वर पाठ करते हैं, तो ध्वनि की विशिष्ट तरंगें (Vibrations) हमारे शरीर के सात चक्रों को जागृत करती हैं. यह कवच मुख्य रूप से 'न्यास विधि' पर टिका है.

न्यास का अर्थ है, स्थापित करना. पाठ के दौरान साधक भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूपों को अपने शरीर के अंगों पर स्थापित करता है.

  1. मत्स्य अवतार को जल की बाधाओं से रक्षा के लिए पुकारा जाता है.
  2. वामन अवतार को आकाश और दुर्गम रास्तों की सुरक्षा के लिए.
  3. नृसिंह अवतार को शत्रुओं के भय और अंधकार को मिटाने के लिए.

जब शरीर का हर अंग ईश्वरीय सुरक्षा में होता है, तो वह एक 'लाइट बॉडी' या 'प्रभामंडल' (Aura) विकसित कर लेता है. यह वही अदृश्य दीवार है, जिससे टकराकर नकारात्मक ऊर्जाएं स्वतः ही नष्ट हो जाती हैं.

मकर संक्रांति: क्यों है यह सर्वश्रेष्ठ समय?

वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टि से मकर संक्रांति के समय पृथ्वी की स्थिति ऐसी होती है कि मानव मस्तिष्क और शरीर ब्रह्मांडीय किरणों को ग्रहण करने के लिए सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं.

  • उत्तरायण का प्रभाव: सूर्य का उत्तर की ओर झुकना सकारात्मकता और चेतना के विस्तार का प्रतीक है. इस समय किया गया मंत्र जप सीधे अवचेतन मन (Subconscious Mind) में गहराई तक उतरता है.
  • शून्य बाधा काल: इस दिन नकारात्मक शक्तियां कमजोर होती हैं और सात्विक ऊर्जा चरम पर होती है. ऐसे में नारायण कवच का पाठ आपकी सुरक्षा दीवार को पूरे वर्ष के लिए 'रिचार्ज' कर देता है.
  • संकल्प की शक्ति: संक्रांति पर लिया गया सुरक्षा संकल्प अटल होता है. यह साधक को मानसिक रूप से इतना दृढ़ बना देता है कि वह किसी भी संकट में विचलित नहीं होता.

नारायण कवच के लाभ: क्या-क्या सुरक्षा मिलती है?

यह कवच केवल युद्ध के मैदान के लिए नहीं है, बल्कि आधुनिक जीवन के संघर्षों के लिए भी अचूक है, कैसे आइए समझते हैं-

  • मानसिक सुरक्षा: अवसाद (Depression), चिंता और अज्ञात भय को दूर करने में यह रामबाण है.
  • दुर्घटनाओं से बचाव: यात्रा के दौरान या अचानक आने वाली आपदाओं से यह कवच साधक की रक्षा करता है.
  • शत्रु बाधा का नाश: यह प्रत्यक्ष शत्रुओं के साथ-साथ ईर्ष्या और बुरी नज़र (Evil Eye) जैसी अदृश्य बाधाओं को भी बेअसर कर देता है.
  • आध्यात्मिक प्रगति: यह साधक की एकाग्रता बढ़ाता है और ध्यान की गहराइयों में जाने में मदद करता है.

पाठ करने की सही विधि (संक्रांति विशेष)

इस मकर संक्रांति पर यदि आप इस कवच को सिद्ध करना चाहते हैं, तो इन चरणों का पालन करें:

  1. शुद्धि: सुबह ब्रह्म मुहूर्त में तिल मिश्रित जल से स्नान करें और पीले वस्त्र धारण करें.
  2. संकल्प: हाथ में जल और अक्षत लेकर संकल्प करें कि 'मैं (नाम), नारायण कवच का पाठ अपनी और अपने परिवार की सर्वांगीण रक्षा के लिए कर रहा हूँ.'
  3. विधिपूर्वक पाठ: यदि संभव हो तो किसी योग्य पंडित से न्यास की विधि सीखें, अन्यथा पूर्ण भक्ति के साथ इसके श्लोकों का पाठ करें.
  4. दान का महत्व: पाठ के बाद खिचड़ी, तिल या ऊनी वस्त्रों का दान करें. इससे कवच की ऊर्जा स्थायी हो जाती है.

आज के अनिश्चित काल में, जहां कदम-कदम पर मानसिक और बाहरी चुनौतियां हैं, नारायण कवच एक वरदान के समान है. मकर संक्रांति का यह पर्व हमें अवसर देता है कि हम स्वयं को ईश्वरीय सुरक्षा से जोड़ लें. याद रखें, संसार की कोई भी तलवार उस व्यक्ति को नहीं काट सकती जिसे ईश्वर की गदा और चक्र का संरक्षण प्राप्त हो.

यह अदृश्य दीवार आपके विश्वास की ईंटों से बनी है. जितना गहरा आपका विश्वास होगा, उतनी ही अभेद्य आपकी सुरक्षा होगी. इस संक्रांति, अंधेरे को कोसने के बजाय, 'नारायण कवच' के प्रकाश को अपने भीतर उतारें.

नारायण कवच यहां पढें

राजोवाच
यया गुप्तः सहस्त्राक्षः सवाहान् रिपुसैनिकान्।

क्रीडन्निव विनिर्जित्य त्रिलोक्या बुभुजे श्रियम् ।।1।।

भगवंस्तन्ममाख्याहि वर्म नारायणात्मकम्।

यथाssततायिनः शत्रून् येन गुप्तोsजयन्मृधे ।।2।।

श्रीशुक उवाच
वृतः पुरोहितोस्त्वाष्ट्रो महेन्द्रायानुपृच्छते।

नारायणाख्यं वर्माह तदिहैकमनाः शृणु।।3।।

विश्वरूप उवाचधौताङ्घ्रिपाणिराचम्य सपवित्र उदङ् मुखः।

कृतस्वाङ्गकरन्यासो मन्त्राभ्यां वाग्यतः शुचिः।।4।।

नारायणमयं वर्म संनह्येद् भय आगते।

पादयोर्जानुनोरूर्वोरूदरे हृद्यथोरसि।।5।।

मुखे शिरस्यानुपूर्व्यादोंकारादीनि विन्यसेत्।

ॐ नमो नारायणायेति विपर्ययमथापि वा।।6।।

करन्यासं ततः कुर्याद् द्वादशाक्षरविद्यया।

प्रणवादियकारन्तमङ्गुल्यङ्गुष्ठपर्वसु।।7।।

न्यसेद् हृदय ओङ्कारं विकारमनु मूर्धनि।

षकारं तु भ्रुवोर्मध्ये णकारं शिखया दिशेत्।।8।।

वेकारं नेत्रयोर्युञ्ज्यान्नकारं सर्वसन्धिषु।

मकारमस्त्रमुद्दिश्य मन्त्रमूर्तिर्भवेद् बुधः।।9।।

सविसर्गं फडन्तं तत् सर्वदिक्षु विनिर्दिशेत्।

ॐ विष्णवे नम इति।।10।।

आत्मानं परमं ध्यायेद ध्येयं षट्शक्तिभिर्युतम्।

विद्यातेजस्तपोमूर्तिमिमं मन्त्रमुदाहरेत।।11।।

ॐ हरिर्विदध्यान्मम सर्वरक्षां न्यस्ताङ्घ्रिपद्मः पतगेन्द्रपृष्ठे।

दरारिचर्मासिगदेषुचापाशान् दधानोsष्टगुणोsष्टबाहुः।।12।।

जलेषु मां रक्षतु मत्स्यमूर्तिर्यादोगणेभ्यो वरूणस्य पाशात्।

स्थलेषु मायावटुवामनोsव्यात् त्रिविक्रमः खेऽवतु विश्वरूपः।।13।।

दुर्गेष्वटव्याजिमुखादिषु प्रभुः पायान्नृसिंहोऽसुरयुथपारिः।

विमुञ्चतो यस्य महाट्टहासं दिशो विनेदुर्न्यपतंश्च गर्भाः।।14।।

रक्षत्वसौ माध्वनि यज्ञकल्पः स्वदंष्ट्रयोन्नीतधरो वराहः।

रामोऽद्रिकूटेष्वथ विप्रवासे सलक्ष्मणोsव्याद् भरताग्रजोsस्मान्।।15।।

मामुग्रधर्मादखिलात् प्रमादान्नारायणः पातु नरश्च हासात्।

दत्तस्त्वयोगादथ योगनाथः पायाद् गुणेशः कपिलः कर्मबन्धात्।।16।।

सनत्कुमारो वतु कामदेवाद्धयशीर्षा मां पथि देवहेलनात्।

देवर्षिवर्यः पुरूषार्चनान्तरात् कूर्मो हरिर्मां निरयादशेषात्।।17।।

धन्वन्तरिर्भगवान् पात्वपथ्याद् द्वन्द्वाद् भयादृषभो निर्जितात्मा।

यज्ञश्च लोकादवताज्जनान्ताद् बलो गणात् क्रोधवशादहीन्द्रः।।18।।

द्वैपायनो भगवानप्रबोधाद् बुद्धस्तु पाखण्डगणात् प्रमादात्।

कल्किः कले कालमलात् प्रपातु धर्मावनायोरूकृतावतारः।।19।।

मां केशवो गदया प्रातरव्याद् गोविन्द आसङ्गवमात्तवेणुः।

नारायण प्राह्ण उदात्तशक्तिर्मध्यन्दिने विष्णुररीन्द्रपाणिः।।20।।

देवोsपराह्णे मधुहोग्रधन्वा सायं त्रिधामावतु माधवो माम्।

दोषे हृषीकेश उतार्धरात्रे निशीथ एकोsवतु पद्मनाभः।।21।।

श्रीवत्सधामापररात्र ईशः प्रत्यूष ईशोऽसिधरो जनार्दनः।

दामोदरोऽव्यादनुसन्ध्यं प्रभाते विश्वेश्वरो भगवान् कालमूर्तिः।।22।।

चक्रं युगान्तानलतिग्मनेमि भ्रमत् समन्ताद् भगवत्प्रयुक्तम्।

दन्दग्धि दन्दग्ध्यरिसैन्यमासु कक्षं यथा वातसखो हुताशः।।23।।

गदेऽशनिस्पर्शनविस्फुलिङ्गे निष्पिण्ढि निष्पिण्ढ्यजितप्रियासि।

कूष्माण्डवैनायकयक्षरक्षोभूतग्रहांश्चूर्णय चूर्णयारीन्।।24।।

त्वं यातुधानप्रमथप्रेतमातृपिशाचविप्रग्रहघोरदृष्टीन्।

दरेन्द्र विद्रावय कृष्णपूरितो भीमस्वनोऽरेर्हृदयानि कम्पयन्।।25।।

त्वं तिग्मधारासिवरारिसैन्यमीशप्रयुक्तो मम छिन्धि छिन्धि।

चर्मञ्छतचन्द्र छादय द्विषामघोनां हर पापचक्षुषाम्।।26।।

यन्नो भयं ग्रहेभ्यो भूत् केतुभ्यो नृभ्य एव च।

सरीसृपेभ्यो दंष्ट्रिभ्यो भूतेभ्योंऽहोभ्य एव वा।।27।।

सर्वाण्येतानि भगन्नामरूपास्त्रकीर्तनात्।

प्रयान्तु संक्षयं सद्यो ये नः श्रेयः प्रतीपकाः।।28।।

गरूड़ो भगवान् स्तोत्रस्तोभश्छन्दोमयः प्रभुः।

रक्षत्वशेषकृच्छ्रेभ्यो विष्वक्सेनः स्वनामभिः।।29।।

सर्वापद्भ्यो हरेर्नामरूपयानायुधानि नः।

बुद्धिन्द्रियमनः प्राणान् पान्तु पार्षदभूषणाः।।30।।

यथा हि भगवानेव वस्तुतः सद्सच्च यत्।

सत्यनानेन नः सर्वे यान्तु नाशमुपाद्रवाः।।31।।

यथैकात्म्यानुभावानां विकल्परहितः स्वयम्।

भूषणायुद्धलिङ्गाख्या धत्ते शक्तीः स्वमायया।।32।।

तेनैव सत्यमानेन सर्वज्ञो भगवान् हरिः।

पातु सर्वैः स्वरूपैर्नः सदा सर्वत्र सर्वगः।।33।।

विदिक्षु दिक्षूर्ध्वमधः समन्तादन्तर्बहिर्भगवान् नारसिंहः।

प्रहापयँल्लोकभयं स्वनेन ग्रस्तसमस्ततेजाः।।34।।

मघवन्निदमाख्यातं वर्म नारयणात्मकम्।

विजेष्यस्यञ्जसा येन दंशितोऽसुरयूथपान्।।35।।

एतद् धारयमाणस्तु यं यं पश्यति चक्षुषा।

पदा वा संस्पृशेत् सद्यः साध्वसात् स विमुच्यते।।36।।

न कुतश्चित भयं तस्य विद्यां धारयतो भवेत्।

राजदस्युग्रहादिभ्यो व्याघ्रादिभ्यश्च कर्हिचित्।।37।।

इमां विद्यां पुरा कश्चित् कौशिको धारयन् द्विजः।

योगधारणया स्वाङ्गं जहौ स मरूधन्वनि।।38।।

तस्योपरि विमानेन गन्धर्वपतिरेकदा।

ययौ चित्ररथः स्त्रीर्भिवृतो यत्र द्विजक्षयः।।39।।

गगनान्न्यपतत् सद्यः सविमानो ह्यवाक् शिराः।

स वालखिल्यवचनादस्थीन्यादाय विस्मितः।

प्रास्य प्राचीसरस्वत्यां स्नात्वा धाम स्वमन्वगात्।।40।।

य इदं शृणुयात् काले यो धारयति चादृतः।

तं नमस्यन्ति भूतानि मुच्यते सर्वतो भयात्।।41।।

एतां विद्यामधिगतो विश्वरूपाच्छतक्रतुः।

त्रैलोक्यलक्ष्मीं बुभुजे विनिर्जित्यऽमृधेसुरान्।।42।।

॥ इति श्री नारायण कवच सम्पूर्ण ॥

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह- वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य | मीडिया रणनीतिकार | डिजिटल कंटेंट विशेषज्ञ

हृदेश कुमार सिंह 25 वर्षों से वैदिक ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय एक बहुआयामी विशेषज्ञ हैं. वर्तमान में वे ABP Live में Astro और Religion सेक्शन का नेतृत्व कर रहे हैं, जहां वे ग्रहों की चाल को केवल पारंपरिक भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें आधुनिक जीवन, समाज, मीडिया, बाजार और वैश्विक घटनाओं की दिशा तय करने वाले संकेतों के रूप में प्रस्तुत करते हैं. हृदेश कुमार सिंह एक सम्मानित और अनुभवी ज्योतिषी हैं, जिनका कार्य पारंपरिक विद्या और समकालीन विश्लेषण के संगम के लिए जाना जाता है.

इन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता की शिक्षा प्राप्त की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्रतिष्ठित प्लेटफॉर्म्स के साथ भी ज्योतिष सलाहकार के रूप में कार्य किया है. वे मीडिया रणनीति, कंटेंट लीडरशिप, धार्मिक ब्रांडिंग और डिजिटल पब्लिशिंग के गहरे जानकार हैं.

प्रमुख भविष्यवाणियां

हृदेश कुमार सिंह की कई भविष्यवाणियां समय के साथ चर्चा में रहीं और उल्लेखनीय रूप से सटीक सिद्ध हुईं. इनमें IPL 2025 के विजेता की पूर्व घोषणा, Yo Yo Honey Singh की वापसी और संगीत सफलता, भारत में AI नीति बदलाव के संकेत, Donald Trump की पुनः राष्ट्रपति पद पर वापसी और उसके बाद के निर्णय, Pushpa 2: The Rule की बॉक्स ऑफिस सफलता और Allu Arjun के करियर ग्राफ, Dhurandhar की संभावित बॉक्स ऑफिस सफलता, ईरान-इजराइल युद्ध, शेयर बाजार क्रैश 2025, दिल्ली की मुख्यमंत्री को लेकर भविष्यवाणी, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई का पूर्वानुमान और क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू व लोकप्रियता का संकेत शामिल हैं. ये सभी विश्लेषण शुद्ध वैदिक गणना, गोचर, दशा-अंतरदशा और मेदिनी ज्योतिषीय अध्ययन पर आधारित रहे हैं.

विशेषज्ञता के क्षेत्र

हृदेश कुमार सिंह (Astro Guy) वैदिक ज्योतिष, संहिता शास्त्र, होरा शास्त्र, अंक ज्योतिष और वास्तु के अनुभवी शोधकर्ता व विश्लेषक हैं. वे ग्रहों की स्थिति, दशा-गोचर और मनोवैज्ञानिक संकेतों के आधार पर करियर, विवाह, शिक्षा, प्रेम संबंध, बिजनेस और स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर गहन ज्योतिषीय विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं.

ज्योतिष के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक संदर्भों से जोड़ते हुए वे शेयर मार्केट ट्रेंड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कॉर्पोरेट रणनीति, ब्रांड पोजिशनिंग और वैश्विक घटनाओं पर भी ग्रहों के प्रभाव का अध्ययन करते हैं. डिजिटल युग में धर्म और ज्योतिष को प्रामाणिक तरीके से प्रस्तुत करने के लिए वे SEO-अनुकूल राशिफल, पंचांग आधारित भविष्यवाणी और गूगल रैंकिंग के अनुकूल धार्मिक कंटेंट तैयार करने में विशेषज्ञ माने जाते हैं.

मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनका कार्य Digital Religion Journalism और Astro-Strategic Analysis के लिए जाना जाता है. वे लाइफ-कोच के रूप में भी लोगों को जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों, सही समय की पहचान और अवसरों के चयन में मार्गदर्शन देते हैं.

उद्देश्य

हृदेश कुमार सिंह का स्पष्ट मानना है कि ज्योतिष भय, भ्रम या भाग्यवाद का उपकरण नहीं, बल्कि जीवन के लिए बौद्धिक और आध्यात्मिक सहारा है. उनके अनुसार ज्योतिष केवल प्रश्नों का उत्तर नहीं देता, बल्कि सही समय पर साहसिक और संतुलित निर्णय लेने की दिशा भी दिखाता है.

अन्य रुचियां

फिल्मों की संरचनात्मक समझ, संगीत की मनोवैज्ञानिक गहराई, साहित्यिक दर्शन, राजनीति की परख, बाजार की समझ और यात्राओं से अर्जित मानवीय अनुभव उनके व्यक्तित्व और लेखन को एक विशिष्ट गहराई प्रदान करते हैं. यही बहुस्तरीय दृष्टि उनके लेखों, भविष्यवाणियों और रणनीतिक विश्लेषण को केवल सूचनात्मक नहीं, बल्कि संवेदनशील, सांस्कृतिक और प्रभावशाली बनाती है.

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