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रंगों के त्योहार पर ब्लड मून की दस्तक, इस बार चंद्र ग्रहण के साए में कैसे मनाए होली का पर्व?

Lunar eclipse 2026: होली 2026 इस साल केवल रंगों का नहीं, बल्कि खगोलीय संयोग रूप से भी महत्व है. जानिए ग्रहण काल के नियम, होलिका दहन का सही समय और कैसे ग्रहण काल के दौरान मनाएं रंगों का त्योहार होली?

Lunar eclipse 2026: भारत में होली की तैयारियों के बीच, इस साल की होली का खास महत्व है. होली के दिन चंद्र ग्रहण भी होगा, जो भारत में कई लोगों के लिए आध्यात्मिक और ज्योतिषीय नजरिए से खास रहने वाला है. 

होली मनाने वाले लोग, ज्योतिषी और श्रद्धालु सभी की इस बात में दिलचस्पी है कि, होली और चंद्र ग्रहण एक ही समय पर पड़ रहे हैं. होली के दौरान खुशियां मनाने, नई शुरुआत करने और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. दूसरी तरफ भारतीय संस्कृति में चंद्र ग्रहण का भी विशेष महत्व है. 

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जब चंद्रमा अंधकार मय हो जाए तो इसका क्या मतलब है?

चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा इसलिए अंधेरा दिखाई देता है क्योंकि पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा को एक दूसरे को देखने से रोकती है. ऐसा केवल पूर्णिमा के मौके पर ही देखने को मिलता है. 

चंद्र ग्रहण तीन तरह के होते हैं-

पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान पूरा चंद्रमा पृ्थ्वी की छाया से होकर गुजरता है, जिसे अम्ब्रा भी कहा जाता है. इसी वजह से इसे ब्लड मून कहते हैं. इससे चंद्रमा लाल हो जाता है. 

आंशिक चंद्र ग्रहण पृथ्वी का मात्र एक हिस्सा चंद्रमा के प्रकाश को रोकता है. 

उपछाया चंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा थोड़ा गहरा दिखाई देता है, क्योंकि यह पृथ्वी की उपछाया से होकर गुजरता है. 

भारत जैसे दुनिया के कुछ भागों में लोग 2026 में होली का ग्रहण देख सकेंगे. 

चंद्र ग्रहण 2026 को क्या अलग बनाती है?

हिंदू माह फाल्गुन की पूर्णिमा के दिन लोग होली का उत्सव मनाते हैं. चुंकि चंद्र ग्रहण मात्र पूर्णिमा के दिन ही होता है, इसलिए यह अनोखा संयोग इस त्योहार को खगोलीय और आध्यात्मिक दोनों नजरिए से ज्यादा सार्थक बनाता है. 

हिंदू मानते हैं कि, ग्रहण का संबंध राहु-केतु से है, जो दो छाया ग्रह हैं और ग्रहण के दौरान चंद्रमा को ग्रहण लगा देते हैं. इस वक्त लोग आमतौर पर सुरक्षा के लिए कुछ खास उपायों को मानते हैं. 

कई ज्योतिषियों के लिए होली के दिन चंद्र ग्रहण का मतलब है, अपनी भावनाओं को बदलना और मन को शुद्ध करना. अतीत की बुरी यादों और बातों से छुटकारा पाना और अपने बारे में सोचने और आध्यात्मिक रूप से विकसित होने का बेहतरीन समय है. 

ग्रहण काल और होलिका के दौरान क्या होता है?

रंगों की होली खेली जाने से पहले एक रात पहले होलिका दहन नामक अग्नि प्रज्वलन किया जाता है, जिससे होली उत्सव की शुरुआत होती है. प्रह्लाद और होलिका की कहानी इस बात को दर्शाती है कि, आखिर में प्रेम से बढ़कर कुछ नहीं है. 

धार्मिक जानकारों का कहना है कि, यदि ग्रहण होलिका दहन अनुष्ठान के दौरान लगे, तो लोगों को अपने क्षेत्र में ग्रहण की अवधि का पता लगा लेना चाहिए. अनुष्ठान आमतौर पर ग्रहण से पहले या बाद में उचित मुहूर्त के अनुसार किए जाते हैं. ग्रहणकाल के दौरान कई मंदिर बंद रह सकते हैं, जैसा कि आमतौर पर होता ही है. 

क्या पूर्णिमा के दिन होली मना सकते हैं?

कई लोग चंद्र ग्रहण को लेकर संशय में हैं कि, क्या इस दिन होली मनाना सही रहेगा? अगर आप जहां रहते हैं, वहां ग्रहण दिखाई नहीं देता, तो जानकारों का कहना है कि, सामान्य नियम उतने सख्त नहीं होंगे. ज्यादातर नियम केवल ग्रहण के दौरान ही लागू होते हैं, भले ही आप उन्हें देख पा रहे हैं. 

ग्रहण के दौरान क्या करना सही रहेगा?

  • ग्रहण काल के दौरान किसी भी तरह का अच्छा काम नहीं करें, आप सामान्य रूप से जो खाते-पीते हैं या पकाते हैं, वैसा न करें. 
  • इस दौरान ध्यान करें या मंत्रों का जाप करें. 
  • लोग आमतौर पर गर्भवती महिलाओं को घर के अंदर रहने की सलाह देते हैं. 
  • ग्रहण के बाद स्नान करना चाहिए. घर को गंगाजल से पवित्र करना चाहिए. 

ग्रहण काल के दौरान रंगों का आध्यात्मिक महत्व?

होली रंगों का त्योहार है, धन का प्रतीक पीला, शांति का प्रतीक हरा, और ईश्वरीय आशीर्वाद का रंग नीला है. लोगों का मानना है कि, ग्रहण काल के दौरान ऊर्जा में बदलाव देखने को मिलता है. 

पौधों और जड़ी-बूटियों से बने रंगों से होली खेलना शुभ होता है. 

ग्रहण काल के दौरान होली मनाने के कुछ बेहतर तरीके-

  • आपके इलाके में ग्रहण कब दिखाई देगा, इसका पता लगाएं और उसी के अनुसार अपने उत्सवों की योजना बनाएं. 
  • होलिका दहन उचित समय पर करें. यदि आपको मदद की जरूरत हो, तो अपने आस-पास रहने वाले किसी पुजारी से बात करें. 
  • ऐसे रंगों का चुनाव करें जो आपके और नेचर के लिए अच्छे हों.
  • ग्रहण काल के दौरान अपने बारे में सोचने के लिए कुछ समय निकालें.
  • ग्रहण काल के बाद पार्टी फिर से शुरू करें. सुरक्षित रूप से आनंद लेने के लिए रंगों से खेलें और मिठाइयों का लुफ्त उठाएं. 

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

अंकुर अग्निहोत्री (Ankur Agnihotri)

Astrology & Religion Content Writer

अंकुर अग्निहोत्री ABP Live के Astro & Religion सेक्शन से जुड़े डिजिटल पत्रकार हैं, जो दैनिक राशिफल, व्रत-त्योहार, ग्रह-गोचर और ज्योतिषीय विषयों पर सरल, तथ्य-आधारित और उपयोगी लेखन करते हैं. उनका कंटेंट विशेष रूप से उन पाठकों के लिए तैयार होता है जो ज्योतिष और धर्म को आसान भाषा में समझना चाहते हैं.

अंकुर पिछले 2+ वर्षों से ABP Live (abplive.com) में सक्रिय रूप से कार्यरत हैं और ज्योतिष, अंक शास्त्र, वास्तु शास्त्र, शकुन अपशकुन शास्त्र, हस्तरेखा, स्वप्न शास्त्र, चाइनीच ज्योतिष आदि पर आर्टिकल्स प्रकाशित करते हैं.

उनका काम हाई-फ्रीक्वेंसी कंटेंट प्रोडक्शन, ट्रेंड-आधारित स्टोरी चयन और यूजर-इंटेंट आधारित लेखन पर केंद्रित है, जिससे उनके लेख लगातार अच्छा डिजिटल एंगेजमेंट प्राप्त करते हैं. इसके अतिरिक्त अंकुर अग्निहोत्री निम्नलिखित विषयों पर भी लेखन करते हैं:

  • दैनिक और साप्ताहिक राशिफल
  • ग्रह-गोचर और ज्योतिषीय प्रभाव
  • व्रत-त्योहार और धार्मिक तिथियां

वे अपने लेखों में जानकारी प्रस्तुत करते समय, पंचांग आधारित तिथि, नक्षत्र और योग का संदर्भ लेते हैं. सामान्य ज्योतिषीय सिद्धांतों (ग्रह-स्थिति, गोचर प्रभाव) का उपयोग करते हैं और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित स्रोतों के आधार पर जानकारी देते हैं. अंकुर ABP Live जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म के साथ जुड़े हैं और Astro सेक्शन में नियमित रूप से कंटेंट प्रकाशित करते हैं.

उनके लेख धार्मिक मान्यताओं, पारंपरिक ज्योतिषीय सिद्धांतों और सामान्य स्रोतों पर आधारित होते हैं. वे किसी भी प्रकार के निश्चित या गारंटीड परिणाम का दावा नहीं करते और पाठकों को जानकारी को मार्गदर्शन के रूप में लेने की सलाह देते हैं. इन्होने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई की है.

अंकुर का फोकस ज्योतिष और धर्म को सरल, व्यावहारिक और समझने योग्य रूप में प्रस्तुत करना है, ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर यह जानकारी हर वर्ग के पाठकों तक पहुंच सके.

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