Narcissistic Relationship: किसे कहते हैं नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी, जानें यह आपके रिश्ते को कैसे कर रहा खत्म?
Toxic Relationship Signs: प्यार करने का तरीका और प्यार की परिभाषा दोनों ही आज के दौर में बदल चुके हैं. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी क्या है और यह कैसे काम करता है.

Why Narcissism Is Common In Modern Dating: प्यार के बारे में कहा जाता है कि "इंसान का प्यार अपने आप नहीं मरता, उसे या तो पार्टनर की अनदेखी मार देती है या फिर आत्ममुग्धता मार देती है." यह लाइन आज के रिश्तों की सच्चाई को बहुत गहराई से बयान करता है. एक हेल्दी रिश्ता सम्मान, समझ, देखभाल और बराबरी की जगह पर टिका होता है. लेकिन जब किसी एक व्यक्ति का "मैं" इतना बड़ा हो जाए कि रिश्ते में दूसरे की अहमियत ही खत्म होने लगे, तब वहीं से समस्या शुरू होती है.
आजकल डेटिंग और रिश्तों से जुड़ी बातचीत में नार्सिसिज्म एक ट्रेंडिंग शब्द बन चुका है. दरअसल, नार्सिसिस्टिक व्यक्तित्व वाला इंसान खुद को सबसे ऊपर रखता है, उसे लगातार तारीफ और ध्यान चाहिए होता है और जब ऐसा नहीं मिलता, तो वह रिश्ते में असंतोष और दूरी पैदा करने लगता है. चलिए आपको बताते हैं कि आखिर ये नार्सिसिज्म होता क्या है और ये कैसे हमारे प्यार को अफेक्ट करता है.
क्या होता है नार्सिसिज्म?
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक, नार्सिसिस्टिक पर्सनालिटी सिर्फ रिश्तों को ही नहीं, बल्कि काम, पैसे और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करती है. ऐसे लोग अक्सर खुद को कम आंका हुआ महसूस करते हैं, दूसरों से तुलना करते हैं और रिश्तों में खुश नहीं रह पाते. साइकोलॉजिस्ट के अनुसार, कोई भी रिश्ता तब संतुलित रहता है जब दोनों लोगों को बराबर सुना और समझा जाए. लेकिन जब एक व्यक्ति लगातार अपनी जरूरतों, इच्छाओं और भावनाओं को ही प्राथमिकता देने लगे और दूसरे को छोटा महसूस कराने लगे, तो यह नार्सिसिज्म की ओर इशारा करता है.
ऐसे रिश्तों में पार्टनर को अक्सर लगता है कि उसकी भावनाएं मायने नहीं रखतीं. नार्सिसिस्ट व्यक्ति अपने व्यवहार को सही ठहराने में माहिर होता है और ध्यान न मिलने पर रिश्ते के अस्तित्व को ही खतरे में डाल देता है.
नार्सिसिस्टिक रिश्ते के साफ रेड फ्लैग
एक्सपर्ट के मुताबिक, हर मुश्किल या बहस को नार्सिसिज़्म कहना गलत है, लेकिन कुछ संकेत बेहद साफ होते हैं. जैसे कि-
- अपनी जरूरतों को हमेशा सबसे ऊपर रखना
- दूसरे के नजरिए को महत्व न देना
- रिश्ते का मूड और दिशा खुद तय करना
- लगातार तारीफ और वैलिडेशन की मांग
- गैसलाइटिंग करना, यानी पार्टनर को अपनी ही सच्चाई पर शक करवा देना
- सीमाओं का सम्मान न करना
- शुरुआत में बेहद आकर्षक और बाद में भावनात्मक दूरी बना लेना
ऐसे रिश्ते समय के साथ मानसिक रूप से थका देने वाले हो जाते हैं.
क्या नार्सिसिज़्म नहीं है, इसे समझना भी जरूरी
साइकोलॉजिस्ट चेतावनी देते हैं कि हर गलती, हर तकरार या हर स्वार्थी व्यवहार नार्सिसिज़्म नहीं होता. आजकल लोग जल्दी लेबल लगा देते हैं, जो रिश्तों को और नुकसान पहुंचा सकता है.
नार्सिसिज्म पर इतनी चर्चा क्यों?
डेटिंग ऐप्स, सोशल मीडिया और खुद को "ब्रांड" की तरह पेश करने की कल्चर ने लोगों को अहंकार-केंद्रित व्यवहार के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना दिया है. जागरूकता जरूरी है, लेकिन समझदारी और संतुलन भी उतना ही अहम है. एक्सपर्ट का कहना है कि स्वस्थ रिश्ते सहानुभूति, जिम्मेदारी और भावनात्मक सुरक्षा पर टिके होते हैं. दूसरों में रेड फ्लैग ढूंढने के साथ-साथ आत्ममंथन और जरूरत पड़ने पर प्रोफेशनल मदद लेना भी उतना ही जरूरी है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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