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Zoster Infection क्या है? जानें इस वायरल बीमारी की हर एक डिटेल

जोस्टर इन्फेक्शन को आम भाषा में दाद या शिंगल्स (Herpes Zoster) भी कहा जाता है. बहुत से लोग इसका नाम तो सुनते हैं, लेकिन इसके बारे में पूरी जानकारी नहीं होती है.

आजकल बदलती लाइफस्टाइल, तनाव और कमजोर होती इम्यूनिटी की वजह से कई तरह के वायरल और स्किन इंफेक्शन देखने को मिल रहे हैं. इन्हीं में से एक बीमारी है जोस्टर इन्फेक्शन, जिसे आम भाषा में दाद या शिंगल्स (Herpes Zoster) भी कहा जाता है. बहुत से लोग इसका नाम तो सुनते हैं, लेकिन इसके कारण, लक्षण और इलाज के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती है. इसी वजह से कई बार इलाज में देरी हो जाती है और परेशानी बढ़ सकती है. ऐसे में आइए हम आपको जोस्टर इन्फेक्शन के बारे में पूरी जानकारी बताते हैं. 

जोस्टर इन्फेक्शन क्या है?

जोस्टर इंफेक्शन एक वायरल बीमारी है, जो वेरिसेला-जोस्टर वायरस (Varicella Zoster Virus – VZV) के कारण होती है. यही वायरस चिकन पॉक्स (चेचक) का कारण भी बनता है. जब किसी व्यक्ति को बचपन या किसी भी उम्र में चिकन पॉक्स हो जाता है, तो बीमारी ठीक होने के बाद भी यह वायरस शरीर से पूरी तरह खत्म नहीं होता, यह वायरस हमारी नसों (नर्व्स) में छिपकर निष्क्रिय अवस्था में पड़ा रहता है.  कई सालों बाद, जब किसी कारण से शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है, तब यही वायरस दोबारा सक्रिय हो जाता है और जोस्टर इन्फेक्शन (दाद) के रूप में सामने आता है. 

जोस्टर इन्फेक्शन क्यों होता है?

डॉक्टरों के अनुसार, जोस्टर होने का सबसे बड़ा कारण कमजोर इम्यून सिस्टम है. हालांकि, यह वायरस दोबारा क्यों एक्टिव होता है, इसका सटीक कारण हमेशा पता नहीं चल पाता है. लेकिन कुछ स्थितियों में इसका खतरा ज्यादा बढ़ जाता है, जैसे उम्र 50 साल से ज्यादा होना, पहले चिकन पॉक्स हो चुका होना, बहुत ज्यादा तनाव या मानसिक दबाव, कैंसर, एचआईवी जैसी गंभीर बीमारियां, लंबे समय तक स्टेरॉयड या इम्यूनिटी कम करने वाली दवाएं लेना और प्रेगनेंसी के दौरान. 

जोस्टर इन्फेक्शन के शुरुआती लक्षण

जोस्टर के लक्षण अचानक नहीं दिखते, बल्कि यह बीमारी कई चरणों में सामने आती है. इसके शुरुआती संकेत शरीर के किसी एक हिस्से में जलन, चुभन या तेज दर्द, खुजली या झुनझुनी महसूस होना, स्किन पर हल्की लालिमा, बिना कारण थकान, हल्का बुखार या सिरदर्द ये लक्षण दाने निकलने से कुछ दिन पहले दिखाई दे सकते हैं. कुछ दिनों बाद उसी जगह पर, जहां दर्द या जलन थी, वहां लाल चकत्ते दिखाई देने लगते हैं, छोटे-छोटे पानी भरे फफोले बन जाते हैं, फफोलों में खुजली और दर्द होता है.

3 से 4 दिन में फफोले बढ़ सकते हैं और लगभग 7 से 10 दिन में ये सूख कर पपड़ी बना लेते हैं. ये दाने आमतौर पर कमर, पीठ, छाती, पेट, गर्दन और चेहरे के एक ही तरफ दिखाई देते हैं. कुछ लोगों में दर्द और जलन तो होती है लेकिन दाने नहीं निकलते हैं. इसे पहचानना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. ऐसे में अगर लगातार नसों में दर्द बना रहे, तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए. 

क्या जोस्टर इन्फेक्शन संक्रामक है?

जोस्टर सीधे तौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है. लेकिन अगर किसी को जोस्टर है, तो उसके फफोलों से निकलने वाले तरल के संपर्क में आने से दूसरे व्यक्ति को चिकन पॉक्स हो सकता है, खासकर अगर उसे पहले कभी चिकनपॉक्स नहीं हुआ हो, इसलिए फफोलों को ढककर रखें. बच्चों, प्रेगनेंट महिलाओं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों से दूरी बनाएं. 

जोस्टर इन्फेक्शन का इलाज और बचाव 

जोस्टर का पूरी तरह से कोई इलाज नहीं है, लेकिन समय पर दवाएं लेने से बीमारी की गंभीरता और अवधि कम की जा सकती है. डॉक्टर आमतौर पर एंटीवायरल दवाएं, दर्द निवारक दवाएं. स्किन पर लगाने वाली क्रीम और गंभीर मामलों में अन्य विशेष दवाएं देते हैं. जोस्टर से बचाव के लिए वैक्सीनेशन सबसे असरदार तरीका है. जिन लोगों को चिकनपॉक्स हो चुका है, वे शिंग्रिक्स वैक्सीन लगवा सकते हैं. 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए यह टीका खासतौर पर फायदेमंद है. पहले दाद हो चुका हो, तब भी वैक्सीन लगवाई जा सकती है. 

यह भी पढ़ें: Bluetooth Earphones Cancer Risk: क्या कान में ब्लूटूथ ईयरफोन लगाने से भी हो जाता है कैंसर, क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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मानसी उपाध्याय करीब दो साल से डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में काम कर रही हैं. मूल रूप से उत्तराखंड से जुड़ी मानसी ने अपनी स्कूली शिक्षा केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए (ऑनर्स) हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की और वर्तमान में राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नलिज्म कर रही हैं. पत्रकारिता में उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अक्टूबर 2024 में एबीपी नेटवर्क से की. अब वह डिजिटल कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्हें फीचर और इंफॉर्मेटिव स्टोरीज लिखने के साथ-साथ स्क्रिप्ट राइटिंग, सोशल मीडिया और रिसर्च आधारित कंटेंट तैयार करने में रुचि है. हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर अच्छी पकड़ रखने वाली मानसी ऐसी स्टोरीज लिखना पसंद करती हैं, जो पाठकों को नई और जरूरी जानकारी आसान भाषा में दें. उनकी कोशिश रहती है कि कंटेंट सिर्फ जानकारी देने वाला ही नहीं, बल्कि पढ़ने में दिलचस्प और पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा हुआ भी हो.

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