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Secondary Hypertension: क्या होता है सेकेंडरी हाइपरटेंशन, भारत में युवाओं में तेजी से क्यों बढ़ रही यह बीमारी?

Secondary Hypertension Risk: भारत में लोगों को प्राइमरी के साथ-साथ अब सेकेंडरी हाइपरटेंशन की भी दिक्कत होने लगी है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर क्या निकला रिसर्च में.

Secondary Hypertension In India: भारत में हाई ब्लड प्रेशर एक आम समस्या बन चुकी है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग अब भी इससे अनजान हैं. समय-समय पर जांच, सही लाइफस्टाइल और जागरूकता से स्ट्रोक, हार्ट अटैक और किडनी फेल होने जैसे गंभीर खतरे टाले जा सकते हैं. लेकिन चिंता सिर्फ सामान्य हाईपरटेंशन की नहीं है, बल्कि इसके एक ज्यादा खतरनाक रूप सेकेंडरी हाइपरटेंशन की है, जिसमें हार्ट और दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा कहीं ज्यादा होता है. डॉक्टर और कार्डियोलॉजिस्ट लंबे समय से इस बदलाव को महसूस कर रहे थे और अब नए रिसर्च ने इसकी पुष्टि भी कर दी है.

क्या निकला रिसर्च में?

स्टडी के मुताबिक, 18 से 40 साल की उम्र के जिन भारतीय युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर पाया गया, उनमें से 22 प्रतिशत से ज्यादा लोग सेकेंडरी हाइपरटेंशन से पीड़ित थे. यह आंकड़ा वैश्विक अनुमानों से बिल्कुल उलट है, जहां माना जाता है कि करीब 90 प्रतिशत मामलों में हाईपरटेंशन प्राइमरी होता है. यानी भारत में युवाओं के बीच हाई ब्लड प्रेशर का सेकेंडरी रूप अब दुर्लभ नहीं रहा और तेजी से बढ़ रहा है.

रिसर्चर का कहना है कि भारत में युवा एड में हाईपरटेंशन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इस आयु वर्ग में सेकेंडरी कारणों की भूमिका अहम होती जा रही है। यह ट्रेंड भविष्य के लिए गंभीर संकेत देता है.

दुनिया में सबसे ज्यादा मौत के कारणों में से एक 

हाईपरटेंशन दुनिया भर में हार्ट रोगों की सबसे बड़ी वजहों में से एक है. डब्ल्यूएचओ के अनुसार, हर साल करीब 1.79 करोड़ मौतें हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी बीमारियों के कारण होती हैं, जो वैश्विक मौतों का लगभग 31 प्रतिशत है. जब ब्लड प्रेशर लगातार 140/90 mm Hg या उससे ज्यादा बना रहता है, तो उसे हाईपरटेंशन कहा जाता है. सिस्टोलिक प्रेशर वह दबाव होता है, जब हार्ट ब्लड को पंप करता है, जबकि डायस्टोलिक प्रेशर हार्ट के आराम की स्थिति में मापा जाता है.सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 mm Hg से कम माना जाता है.

लोगों के लिए साइलेंट किलर

हालिया वैज्ञानिक आंकड़े बताते हैं कि भारत में हाईपरटेंशन की कुल दर 30 से 35.5 प्रतिशत के बीच है, जिससे अनुमानित 31.4 करोड़ लोग प्रभावित हैं. हालात को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि हाईपरटेंशन से जूझ रहे करीब आधे पुरुष और एक-तिहाई से ज्यादा महिलाएं दवाएं लेने के बावजूद अपना ब्लड प्रेशर नियंत्रण में नहीं रख पा रहे हैं, इसी वजह से इसे अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है.

क्या होता है सेकेंडरी हाइपरटेंशन?

Mayoclinic की रिपोर्ट के अनुसार, सेकेंडरी हाई ब्लड प्रेशर, जिसे सेकेंडरी हाइपरटेंशन कहा जाता है, वह स्थिति है जिसमें ब्लड प्रेशर किसी दूसरी बीमारी की वजह से बढ़ता है. यह समस्या किडनी, आर्टरीज, हार्ट या हार्मोन से जुड़े सिस्टम में गड़बड़ी के कारण हो सकती है और कई बार गर्भावस्था के दौरान भी देखी जाती है. यह आम हाई ब्लड प्रेशर प्राइमरी हाइपरटेंशन से अलग होता है, जिसमें कोई साफ वजह सामने नहीं आती. सेकेंडरी हाइपरटेंशन की पहचान समय पर हो जाए तो मूल बीमारी और ब्लड प्रेशर, दोनों को कंट्रोल किया जा सकता है, जिससे हार्ट डिजीज, किडनी फेलियर और स्ट्रोक जैसे गंभीर खतरों का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है.

कैसे होते हैं इसके लक्षण?

प्राइमरी हाईपरटेंशन की तरह ही सेकेंडरी हाईपरटेंशन में भी अक्सर कोई खास लक्षण नजर नहीं आते, यहां तक कि तब भी जब ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका हो. हालांकि, अगर किसी व्यक्ति में हाई ब्लड प्रेशर के साथ कुछ खास संकेत दिखाई दें, तो यह सेकेंडरी हाइपरटेंशन की ओर इशारा कर सकता है. जैसे कि दवाएं लेने के बावजूद ब्लड प्रेशर का कंट्रोल में न आना, अचानक बहुत ज्यादा ब्लड प्रेशर होना (सिस्टोलिक 180 mm Hg से ऊपर या डायस्टोलिक 120 mm Hg से ज्यादा), पहले जिन दवाओं से ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता था उनका असर खत्म हो जाना, 30 साल से पहले या 55 साल के बाद अचानक हाई ब्लड प्रेशर शुरू होना, परिवार में हाई ब्लड प्रेशर का कोई हिस्ट्री  न  होना और व्यक्ति का मोटापे से ग्रस्त न होना.

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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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