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स्पेस में फिट रहने के लिए कौन सी एक्सरसाइज करते हैं एस्ट्रोनॉट्स? साइंस से है कनेक्शन

स्पेस में फिट रहने के लिए एस्ट्रोनॉट्स को भी एक्सरसाइज की जरूरत होती है. यह उनकी मांसपेशियों, हड्डियों और दिल की सेहत को बनाए रखने में मदद करता है.

Astronaut Exercise in Space : 9 महीने 14 दिन बाद आखिरकार नासा एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) अपने चार साथियों के साथ धरती पर लौट आई हैं. भारतीय समयानुसार, 19 मार्च की सुबह 3:27 बजे उनकी वापसी हुई. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर इतने दिन गुजारने के बाद पृथ्वी के वायुमंडल में रहना उनकी बॉडी के लिए थोड़ा कठिन हो सकता है. स्पेस में भी रहना उनके लिए इतना आसान नहीं था. इतने दिनों तक खुद को फिट रखने के लिए सही डाइट और एक्सरसाइज किया करती थीं. ऐसे में आइए जानते हैं स्पेस में फिट रहने के लिए एस्ट्रोनॉट्स कौन सी एक्सरसाइज करते हैं. इसका साइंस से क्या कनेक्शन है...

स्पेस में रहना कितना कठिन

स्पेस में रहना किसी चुनौती से कम नहीं होता. भारहीनता (Microgravity) के कारण एस्ट्रोनॉट्स की मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं और हड्डियों का घनत्व (Bone Density) कम हो सकता है. इसलिए, एस्ट्रोनॉट्स वहां भी फिट रहने के लिए रेगुलर तौर से वर्कआउट करते हैं. हालांकि, जीरो ग्रेविटी में में एक्सरसाइज करना आसान नहीं होता है. इसके लिए वैज्ञानिकों ने खास तरह की एक्सरसाइज बनाई है, जो उनकी हड्डियों, मांसपेशियों और हार्ट हेल्थ को बनाए रखने में मदद करती है.

क्या स्पेस में एक्सरसाइज जरूरी होता है

एक्सपर्ट्स के अनुसार, इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर एस्ट्रोनॉट्स को रोजाना 2 से 2.5 घंटे तक वर्कआउट करते हैं. तीन मुख्य तरह की एक्सरसाइज पर उनका फोकस ज्यादा रहता है. ये एक्सरसाज उन्हें फिट रखने और उनके हार्ट-लंग्स को बेहतर बनाए रखने में मदद करते हैं.

स्पेस में एक्सरसाइज क्यों जरूरी है

माइक्रोग्रैविटी में मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और हड्डियों की डेंसिटी घटने लगती है.

स्पेस में कार्डियोवस्कुलर सिस्टम पर असर पड़ता है, जिससे हार्ट की कार्यक्षमता कम हो सकती है.

लंबे समय तक भारहीनता के कारण एस्ट्रोनॉट्स को सिरदर्द, थकान और चक्कर आ सकते हैं.

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पृथ्वी पर वापसी के बाद जल्दी रिकवरी के लिए

स्पेस में एस्ट्रोनॉट्स कौन-कौन सी एक्सरसाइज़ करते हैं

1. कार्डियो एक्सरसाइज़ (Cardio Workouts)

स्पेस साइकिलिंग

स्पेस साइकिलिंग (Cycle Ergometer) एक खास स्टैटिक साइकिल होती है, जिसे बिना सीट के डिजाइन किया गया है. एस्ट्रोनॉट्स पैरों को पट्टियों से बांधकर इसे चलाते हैं.

ट्रेडमिल रनिंग 

माइक्रोग्रैविटी में दौड़ने के लिए एस्ट्रोनॉट्स को खुद को ट्रेडमिल (Treadmill Exercise) पर हार्नेस और बंजी कॉर्ड से बांधना पड़ता है.

2. वेट ट्रेनिंग 

जीरो ग्रेविटी में वेट लिफ्टिंग पॉसिबल नहीं है, इसलिए साइंटिस्ट ने एडवांस्ड रेसिस्टेंस एक्सरसाइज़ डिवाइस (Resistance Training) बनाया है, जो स्पेस में एस्ट्रोनॉट्स के काम आती है. ARED मशीन  खास डिवाइस एस्ट्रोनॉट्स को स्क्वाट्स, डेडलिफ्ट, बेंच प्रेस और बाइसेप कर्ल जैसी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करने में मदद करती है.

3. स्ट्रेचिंग और योगा 

स्पेस में शरीर को लचीला बनाए रखने के लिए स्ट्रेचिंग जरूरी होती है. इससे मांसपेशियों में अकड़न नहीं होती और बैकपेन जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है. कुछ एस्ट्रोनॉट्स माइक्रोग्रैविटी में योगा पोज करने की कोशिश करते हैं, जिससे उनके शरीर में ब्लड फ्लो बेहतर बना रहता है.

स्पेस में एक्सरसाइज़ करने में आने वाली समस्याएं

बॉडी बैलेंस बनाने में मुश्किल होता है

कोई वजन नहीं होता, इसलिए अलग तरह की मशीनों की जरूरत होती है.

बिना गुरुत्वाकर्षण के मांसपेशियां जल्दी सिकुड़ने लगती हैं.

हर एक्सरसाइज के लिए स्पेशल इक्विपमेंट की जरूरत पड़ती है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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About the author कोमल पांडे

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की है. पत्रकारिता में 11 साल का अनुभव है. पॉलिटिकल, फीचर, नॉलेज के लेखन में दिलचस्पी है. ABP Live के लिए फीचर की खबरें लिखती हूं. खबरें अच्छी हों, रीडर्स को पढ़ने में अच्छा लगे और जो तथ्य हों वो सही हों, इसी पर पूरा जोर रहता है.
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