Kidney Disease: दुनियाभर में मौत की 9वीं सबसे बड़ी वजह है किडनी की यह बीमारी, ये लक्षण दिखते ही तुरंत हो जाएं अलर्ट
Early Signs Of Kidney Disease: आजकल कई बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, उनमें से एक है किडनी की बीमारी. चलिए आपको बताते हैं कि दुनिया की कितनी बड़ी आबादी इससे प्रभावित है और इसके लक्षण क्या क्या हैं.

Chronic Kidney Disease: क्रॉनिक किडनी डिजीज धीरे-धीरे दुनिया के सामने एक बड़ी हेल्थ क्राइसिस बनकर आ रही है. द लैंसेट में छपी एक नई ग्लोबल स्टडी जिसे इंस्टिट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन ने तैयार किया है. इस रिपोर्ट में यह देखने को मिलता है कि 2023 में CKD दुनिया में मौत का नौवां सबसे बड़ा कारण बन चुकी है. सिर्फ पिछले साल ही इस बीमारी ने करीब 15 लाख लोगों की जान ली.
इतना ही नहीं, रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में आज 788 मिलियन (78.8 करोड़) एडल्ट किसी न किसी स्तर की किडनी बीमारी से जूझ रहे हैं, जो 1990 के मुकाबले दोगुना है. यह सीधे-सीधे बताता है कि CKD एक ऐसी खामोश बीमारी है जो अमीर-गरीब हर देश में तेजी से फैल रही है. खास तौर पर नॉर्थ अफ्रीका, मिडिल ईस्ट और साउथ एशिया जैसे क्षेत्रों में इसकी दर सबसे अधिक है. और बात सिर्फ किडनी तक सीमित नहीं है. इस बीमारी का हार्ट पर भी गहरा असर पड़ता है. रिपोर्ट बताती है कि कमजोर किडनी फंक्शन दुनिया भर में होने वाली 11.5 प्रतिशत कार्डियोवैस्कुलर मौतों के पीछे जिम्मेदार है. यानी अगर सरल शब्दों में कहा जाए, तो CKD दिल की बीमारियों को कई गुना बढ़ा देती है.
रिपोर्ट में सबसे अहम क्या निकला?
ताजा ग्लोबल एनालिसिस के मुताबिक, 2023 में CKD मौतों के टॉप-10 कारणों में शामिल हो गई. लगभग 1.48 मिलियन मौतें इसी के कारण हुईं. आज पूरी दुनिया भर में लगभग 800 मिलियन लोग कम या ज्यादा किडनी फंक्शन लॉस के साथ जी रहे हैं. 1990 के 378 मिलियन मामलों से यह संख्या आज 788 मिलियन पहुंच गई है, यानी दोगुना से भी ज्यादा. दुनिया के हर 10 में से 1 से भी ज्यादा वयस्क में किडनी से जुड़ी समस्या पाई जा रही है.
सबसे ज्यादा असर वाले एरिया
नॉर्थ अफ्रीका और मिडिल ईस्ट (सबसे ऊंची प्रीवेलेंस) वाले एरिया में आते हैं. साउथ एशिया में इससे करीब 16 प्रतिशत एडल्ट प्रभावित हैं. चीन और भारत में तो संख्या सबसे बड़ी है, चीन में लगभग 152 मिलियन लोग और भारत में करीब 138 मिलियन लोग CKD से प्रभावित हैं.
आखिर किडनी की बीमारी इतनी क्यों बढ़ रही है?
अगर बात करें कि इसके मामले लगातार बढ़ क्यों रहे हैं, तो इसके तीन बड़े कारण साफ नजर आते हैं, जिसमें-
मेटाबॉलिक बीमारियां
इसमें पहले नंबर पर मेटाबॉलिक डिजीज का नाम आता है. डायबिटीज, हाई बीपी और मोटापा CKD के सबसे बड़े कारण हैं. ये धीरे-धीरे किडनी के नाजुक फिल्टर को नुकसान पहुंचाते हैं.
बुजुर्ग आबादी का बढ़ना
दूसरे नंबर पर बुजुर्ग आबादी का मामला आता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ किडनी की फिल्टरिंग क्षमता कम होती जाती है, इसलिए उम्रदराज़ देशों में CKD के मामले ज़्यादा मिलते हैं.
जांच और इलाज की कमी
बहुत से देशों में शुरुआती जांच आसानी से उपलब्ध नहीं है. लोग तब पता लगाते हैं जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है.
इस पर ध्यान क्यों देना चाहिए?
किडनियां चुपचाप हर दिन आपके शरीर से जहर निकालती हैं, पानी-नमक का संतुलन रखती हैं और ब्लड प्रेशर कंट्रोल करती हैं. समस्या यह है कि शुरुआती स्टेज में CKD कोई खास लक्षण नहीं देती और यही वजह है कि इसे साइलेंट किलर कहा जाता है. किडनी कमजोर होने पर दिल पर बुरा असर पड़ता है. ब्लड प्रेशर बढ़ता है, शरीर में वेस्ट जमा होता है, और दिल पर दबाव बढ़ने लगता है. यही वजह है कि किडनी की खराबी दुनिया भर में होने वाली दिल की मौतों को बढ़ा रही है.
शुरुआती संकेत जिन्हें नजरअंदाज न करें
- यूरिन में बदलाव - बहुत ज्यादा या बहुत कम यूरिन आना, रात में बार-बार उठना, झाग वाला या खून मिला यूरिन
- सूजन - पैर, हाथ या आंखों के नीचे सूजन
- थकान और कमजोरी - शरीर में गंदगी जमा होने से थकावट बढ़ती है
- खुजली, सूखी त्वचा, मिचली - ब्लड में वेस्ट बढ़ने की वजह से
- सांस फूलना, भूख कम होना - बीमारी बढ़ने पर ये लक्षण दिखते हैं
- अगर इनमें से कोई भी संकेत दिखे तो इसे थकान या उम्र कहकर टालें नहीं, जांच कराएं.
आप क्या कर सकते हैं?
- नियमित जांच - GFR और Urine Albumin टेस्ट से शुरुआती CKD पकड़ में आ सकती है
- रिस्क फैक्टर्स कंट्रोल करें - ब्लड शुगर, बीपी, वजन नियंत्रण में रखें
- लाइफस्टाइल बदलें - नमक कम, पानी पर्याप्त, धूम्रपान से दूरी बना कर रखें
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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