Signs Of Heart Failure: गर्दन का ये वाला टेस्ट करा लिया तो टल जाएगा हार्ट अटैक का खतरा, लगते हैं सिर्फ 15 से 20 मिनट
Heart Failure Symptoms In Men: हार्ट की बीमारी तेजी से बढ़ रही है, इसके पीछे कई कारण हैं जैसे कि इसके लक्षण को हम इग्नोर कर देते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि कौन सा टेस्ट करवाना जरूरी होता है.

Early Warning Signs Of Weak Heart: हार्ट की बीमारी के शुरुआती संकेत अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं, क्योंकि इनके लक्षण थकान या बढ़ती उम्र के सामान्य बदलाव जैसे लगते हैं. लेकिन एक नई स्टडी बताती है कि सिर्फ एक सरल गर्दन की स्कैनिंग से पुरुषों में हार्ट फेलियर के शुरुआती खतरे का पता लगाया जा सकता है. इस जांच को कैरेटिड अल्ट्रासाउंड कहा जाता है. यह वही तकनीक है जो गर्भावस्था में किए जाने वाले अल्ट्रासाउंड जैसी होती है. रिसर्चर का कहना है कि डॉक्टर 60 साल से ऊपर के पुरुषों को यह जांच कराने की सलाह दे सकते हैं.
एक्सपर्ट का क्या कहना
स्टडी की प्रमुख रिसर्चर के रूप में काम कर रहीं डॉ. एटिन्यूक अकिनमोलायन (UCL) कहती हैं कि “कैरेटिड अल्ट्रासाउंड सुरक्षित, सस्ता और बिल्कुल बिना दर्द वाला टेस्ट है. हमारे नतीजे दिखाते हैं कि यह हार्ट फेलियर के शुरुआती संकेत दे सकता है.” उन्होंने कहा कि अगर किसी मरीज की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में जोखिम दिखता है तो वे डॉक्टर से जीवनशैली में बदलाव पर समय रहते बात कर सकते हैं, जिससे भविष्य में हार्ट फेलियर का खतरा कम हो सकता है. यह जांच 15 से 30 मिनट के बीच होती है. इसमें गर्दन पर एक छोटा सा हैंडहेल्ड डिवाइस घुमाकर कैरेटिड धमनियों की लोच यानी फ्लेक्सिबिलिटी देखी जाती है. यही धमनियां दिमाग, चेहरे और गर्दन तक खून पहुंचाती हैं.
बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामले
ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के मुताबिक, UK में करीब 9.2 लाख लोग हार्ट फेलियर के साथ रह रहे हैं. शरीर की बड़ी आर्टरीज सामान्य रूप से लचीली होती हैं, लेकिन उम्र और कुछ बीमारियों की वजह से ये सख्त होने लगती हैं. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है, हार्ट पर दबाव बढ़ता है और दिल कमजोर होने लगता है. इससे दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है. UCL के नेतृत्व वाले इस स्टडी में 1,631 पुरुषों ( 71 से 92 वर्ष) को शामिल किया गया. डेटा ब्रिटिश रिजनल हार्ट स्टडी से लिया गया था, जिसकी शुरुआत 1970 के दशक में हुई थी. नतीजों में पाया गया कि जिन पुरुषों की कैरेटिड धमनियां सबसे कम लचीली थीं, उनमें हार्ट फेलियर का खतरा 2.5 गुना ज्यादा था.
क्या निकला निष्कर्ष
इस पूरे स्टडी का निष्कर्ष यह निकला कि जिन पुरुषों की कैरेटिड आर्टरीज ज्यादा मोटी थीं, उनमें दिल का दौरा पड़ने का खतरा काफी ज्यादा था. हर 0.16 मिमी मोटाई बढ़ने पर हार्ट अटैक का खतरा करीब 29 प्रतिशत बढ़ जाता है. BHF के चीफ मेडिकल ऑफिसर प्रोफेसर ब्रायन विलियम्स ने कहा कि “यह स्पष्ट संकेत है कि जब कैरेटिड धमनियां सख्त हो जाती हैं, तो दिल को खून पंप करने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इससे हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे किसी भी बदलाव को गंभीरता से लेना चाहिए.”
UCL के एक और स्टडी में बताया गया है कि सिर्फ 10 मिनट की एक स्कैनिंग से लाखों मरीजों में कठिन-से-काबू ब्लड प्रेशर के कारण का पता लगाया जा सकता है. यह स्कैन उन मरीजों के लिए है जिनकी एड्रिनल ग्लैंड्स जरूरत से ज्यादा एल्डोस्टेरोन नामक हार्मोन बनाती हैं. इससे शरीर में नमक का स्तर गड़बड़ हो जाता है और ब्लड प्रेशर बेहद बढ़ जाता है. हाई BP वाले हर चार में से एक व्यक्ति में यह समस्या देखी जाती है.
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Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.
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Source: IOCL























