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कोविड आपकी नींद और सपनों में कैसे खलल डाल सकता है...जानिए क्या कहती है स्टडी

इस बात की कोई सरल व्याख्या नहीं है कि कोविड की चपेट में आने से बुरे सपने क्यों बढ़ सकते हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य इसमें एक बड़ी भूमिका निभा सकता है.

Corona Side Effect: कोरोना ने पिछले कुछ सालों में इस कदर तबाही मचाई है कि जिस का आंकड़ा इकट्ठा करते-करते हम थक जाएं लेकिन पीड़ितों की संख्या कम नहीं होगी. मानव जीवन पर यह बड़ा चोट देकर गया है. 2022 के अंत तक विश्व स्वास्थ्य संगठन को 650 मिलियन से अधिक के कोरोना संक्रमणों की सूचना दी गई थी, वास्तविक संख्या बहुत अधिक होने की संभावना है और हर हफ्ते सैकड़ों हजारों की संख्या में वृद्धि भी हो रही है.

लॉकडाउन का नींद के पैटर्न पर कितना असर

वही वैज्ञानिक समुदाय हमारी शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और मस्तिष्क के कार्य पर कोविड के प्रभाव को समझने पर जोर दे रहे हैं. महामारी के शुरुआती चरण में नींद के वैज्ञानिकों ने नींद के पैटर्न पर लॉक डाउन के प्रभाव को जानने की कोशिश की तो पता चला कि लॉकडाउन में कुछ काम धंधा नहीं होने के बावजूद भी नींद की क्वालिटी बदतर थी.लॉकडाउन में लोग सोए जरूर लेकिन नींद की गुणवत्ता बहुत ही खराब थी.वहीं दूसरी लहर से जो डाटा सामने आई है साइंटिस्ट उससे समझने में लगे है कि कैसे कोरोना से संक्रमित होने से हमारी नींद प्रभावित हो रही है और यहां तक कि हमारे सपनों में भी घुसपैठ हो रहा है.

52 फीसदी संक्रमितों को नींद की गड़बड़ी

हाल के मेटा विश्लेषण और समीक्षा से अनुमान लगाया गया है कि कोरोना से संक्रमित 52 फ़ीसदी लोग संक्रमण के दौरान नींद की गड़बड़ी से पीड़ित रहे. रिपोर्ट की सबसे आम प्रकार की नींद की गड़बड़ी में इनसोम्निया सामने आया है. अनिद्रा से पीड़ित लोगों को आम तौर पर सोना या सोते रहना मुश्किल हुआ है, वह अक्सर जल्दी सुबह उठ जाते हैं.चिंता की वजह से नींद की समस्या कभी कभी संक्रमण से उबरने के बाद बनी रहती है.

चीन और अमेरिका में हुई स्टडी में हुआ खुलासा

वहीं चीन में हुए एक स्टडी में पाया गया है कि 26 फ़ीसदी लोगों को कोरोना संक्रमितों एक साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था,उनमें डिस्चार्ज होने के 2 सप्ताह बाद अनिद्रा के लक्षण दिखाई दिए.इसके अलावा अमेरिकी अध्ययन से यह भी पता चला है कि  जो लोग कोरोना से पीड़ित थे उन लोगों की तुलना में जो लोग कभी भी कोरोना से संक्रमित नहीं हुए हैं उन्हें भी कुछ दिनों तक  सोने में परेशानी हुई .वैज्ञानिकों के मुताबिक बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो कोरोना से जल्दी ठीक हो जाते हैं कुछ में लंबे समय तक लक्षण बने रहते हैं. लंबे समय तक कोरोना पीड़ित लोगों को लगातार नींद की समस्या का सामना करना पड़ सकता है.

COVID हमारी नींद को क्यों प्रभावित करता है?

वहीं 2021 के एक अध्ययन ने लंबे समय तक COVID वाले 3,000 से अधिक लोगों का सर्वेक्षण किया. लगभग 80% प्रतिभागियों ने स्वयं नींद की समस्याओं की सूचना दी, सबसे अधिक अनिद्रा, गहरी नींद की कमी विशेष रूप से संबंधित है, COVID के दौरान और बाद में आमतौर पर रिपोर्ट किए गए "ब्रेन फॉग" के लिए गहरी नींद की कमी आंशिक रूप से जिम्मेदार हो सकती है.तथ्य यह है कि कोविड अक्सर नींद में बाधा डालता है, यह भी चिंताजनक है क्योंकि नींद हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को संक्रमण से लड़ने में मदद करती है.

यहा कई कारण हैं कि क्यों  COVID संक्रमण से नींद खराब हो सकती है. एक समीक्षा ने शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और पर्यावरणीय कारकों की पहचान की. COVID का मस्तिष्क पर सीधा प्रभाव पड़ सकता है, जिसमें वे क्षेत्र भी शामिल हैं जो जागने और सोने दोनों को नियंत्रित करते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह स्पष्ट समझ नहीं है कि ये कैसे काम करता है, लेकिन संभावित तंत्र में वायरस केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को संक्रमित कर सकता है या मस्तिष्क की रक्त आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है.

संक्रमितों को दुःस्वप्न  की समस्या

इस बात की कोई आसान व्याख्या नहीं है कि कोविड की चपेट में आने से बुरे सपने क्यों बढ़ सकते हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य फिर से एक भूमिका निभा सकता है. खराब मानसिक स्वास्थ्य अक्सर दुःस्वप्न के साथ होता है.इंटरनेशनल COVID-19 स्लीप स्टडी टीम ने पाया कि संक्रमित समूह में चिंता और अवसाद जैसी स्थितियों के अधिक लक्षण दिखाई दिए.

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