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समय से पहले मौत के कितने करीब हैं आप? घर में कर सकते हैं 10 सेकंड का ये सिंपल टेस्ट

इस टेस्ट को सिंगल लेग स्टैंड टेस्ट कहते हैं. इसमें आपको एक पैर पर 10 सेकंड के लिए बैलेंस बनाकर खड़ा होना होता है, बिना किसी सहारे के. यह टेस्ट 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए डिजाइन किया गया है.

क्या आप जानते हैं कि आपका स्टैमिना और शारीरिक फिटनेस आपकी लंबी उम्र का कितना बड़ा संकेत हो सकती है? जब कोई व्यक्ति अपने जीवन के अंतिम पड़ाव पर होता है, तो उसका शरीर धीरे-धीरे काम करना बंद कर देता है. इससे कई शारीरिक और मानसिक परिवर्तन आते हैं. इन बदलावों को समझना परिवार और देखभाल करने वालों के लिए जरूरी है.

कुछ आम लक्षण जैसे सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलना, वर्कआउट के 5-10 मिनट में थक जाना या तेज चलने पर हांफ जाना, ये सभी बताते हैं कि आपकी बॉडी में स्टैमिना की कमी है और आप पूरी तरह से हेल्दी नहीं हैं. इन बातों पर कई रिसर्च भी हुई हैं, जो बताती हैं कि लंबी उम्र के लिए किस तरह का स्टैमिना और हेल्थ जरूरी होती है.

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक सिंपल 10-सेकंड का टेस्ट आपको अपनी बायोलॉजिकल एज' और समय से पहले मौत के खतरे के बारे में अहम जानकारी दे सकता है. इसे आप आसानी से अपने घर पर ही कर सकते हैं.

क्या है 10 सेकंड का टेस्ट?

इस टेस्ट को सिंगल लेग स्टैंड टेस्ट कहते हैं. इसमें आपको एक पैर पर 10 सेकंड के लिए बैलेंस बनाकर खड़ा होना होता है, बिना किसी सहारे के. यह टेस्ट खासकर 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए डिजाइन किया गया है, क्योंकि इस उम्र में बैलेंस की क्षमता सेहत का एक महत्वपूर्ण इंडिकेटर बन जाती है.

कैसे करें ये टेस्ट?

सबसे पहले आप अपने जूते उतार दें और किसी समतल, बिना फिसलन वाली जगह पर खड़े हो जाएं.अपनी बांहों को शरीर के बगल में स्वाभाविक रूप से रखें. किसी एक पैर को उठाएं और उसे दूसरे पैर की पिंडली या टखने के पास रखें. सामने एक निश्चित बिंदु पर अपनी नजर टिकाएं. टाइमर शुरू करें और 10 सेकंड तक बैलेंस बनाए रखने की कोशिश करें.

क्या कहते हैं टेस्ट के रिजल्ट्स?

अगर आप 10 सेकंड तक सफलतापूर्वक बैलेंस बनाए रख पाते हैं तो इससे पता चलता है कि आपकी न्यूरोलॉजिकल और मस्कुलर हेल्थ अच्छी है. स्टडीज के अनुसार, जो लोग इस टेस्ट को आसानी से पास कर लेते हैं. उनमें अगले 10 सालों में किसी भी कारण से मरने का जोखिम उन लोगों की तुलना में काफी कम होता है, जो इसे पास नहीं कर पाते.

अगर आप 10 सेकंड तक बैलेंस नहीं बना पाते हैं तो यह एक संकेत हो सकता है कि आपकी बैलेंसिंग कैपेसिटी कम है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि खराब बैलेंस गिरने के खतरे को बढ़ाता है और यह दिल की बीमारियों, स्ट्रोक या डिमेंशिया जैसी कुछ हेल्थ कंडीशंस का भी शुरुआती संकेत हो सकता है. यह समय से पहले मौत के जोखिम में 84% की वृद्धि से जुड़ा पाया गया है.

क्यों महत्वपूर्ण है ये टेस्ट?

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आदित्य कुमार के अनुसार, बैलेंस बनाए रखने की क्षमता सिर्फ शारीरिक फिटनेस का ही नहीं, बल्कि मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के स्वास्थ्य का भी सीधा संकेत है. उन्होंने बताया कि खराब बैलेंस अक्सर विटामिन बी12 जैसी विटामिनों की कमी से जुड़े न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को भी दर्शाता है, जिन्हें सही खानपान से सुधारा जा सकता है.

आप टेस्ट में सफल नहीं होते तो क्या करें?

अगर आप 10 सेकंड तक बैलेंस नहीं बना पाते हैं, तो घबराएं नहीं.यह एक मौका है अपनी सेहत पर ध्यान देने का है. अपने डॉक्टर से मिलें और अपनी हेल्थ का पूरा चेकअप कराएं. योग, ताई ची, या बैलेंस बोर्ड एक्सरसाइज आपकी मदद कर सकते हैं. अपनी दिनचर्या में वॉक, जॉगिंग या अन्य फिजिकल एक्टिविटी को शामिल करें. विटामिन बी12 और अन्य आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लें. यह टेस्ट एक शुरुआती संकेत है, न कि अंतिम फैसला. अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके आप अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं और हेल्दी लाइफ जी सकते हैं.

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Disclaimer: खबर में दी गई कुछ जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है. आप किसी भी सुझाव को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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