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एक गलती और जानलेवा हो सकता है मंकी फीवर, जानिए एक्सपर्ट्स से बचने के उपाय

केएफडी यानी मंकी फीवर का कोई विशेष इलाज नहीं है. इसलिए तुरंत अस्पताल में भर्ती होकर इसके खतरे को कम करने वाले इलाज जरूरी हो जाते हैं. ब्लीडिंग डिसऑर्डर के लिए हाइड्रेशन बनाए रखना चाहिए.

Monkey Fever: मंकी फीवर को लेकर इन दिनों हर किसी में डर बना हुआ है. पिछले कुछ दिनों से कर्नाटक में मंकी फीवर यानी क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD) देखने को मिल रहा है. यह इन्फेक्टेड टिक से फैल रहा है. इस फीवर से अब तक दो लोगों की जान भी जा चुकी है. इसी साल में अब तक कर्नाटक में मंकी फीवर के 49 पॉजिटिव केस मिल चुके हैं. केरल के कुछ इलाकों में भी इसको लेकर अलर्ट जारी किया गया है. ऐसे में जानते हैं कि मंकी फीवर कितना खतरकना है, क्या यह जानलेवा भी हो सकता है...
 
मंकी फीवर किस तरह फैल रहा है
मंकी फीवर यानी क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज हेमाफिसैलिस जीन्स यानी संक्रमित टिक्स के काटने से फैल रहा है. हेमाफिसैलिस स्पिनिगेरा जीनस वाले टिक मुख्य तौर पर बंदरों को काटते हैं। इसके बाद जब बंदर जंगली इलाकों से गुजरते हैं तो वे वायरस को नई टिक लोगों तक पहुंचाने का काम करते हैं. टिक के काटने या संक्रमित जानवरों के ब्लड या टिश्यू के संपर्क से इंसान संक्रमित होते हैं. संक्रमण दूषित पदार्थों को खाने या संक्रमित जानवरों के बिना पाश्चुरीकृत दूध के लेने से भी फैल सकता है. सबसे बड़ी बात ये है कि मंकी फीवर पर्सन टू पर्सन ट्रांसमिशन काफी रेयर है.
 
मंकी फीवर के लक्षण
बुखार
सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द
उल्टी और ब्लड का ज्यादा सीक्रेट होना 
गंभीर मामलों में ज्यादा रक्तस्राव
नर्वस सिस्टम में समस्या
 
मंकी फीवर का इलाज
केएफडी यानी मंकी फीवर का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है. सिर्फ वैक्सीनेशन और टिक से बचाव के साथ-साथ कवर्ड कपड़े पहनकर इनके खतरे को कम किया जा सकता है. मंकी फीवर से बचने के लिए जंगली इलाकों में जाने से बचना चाहिए. अगर वहां जाते हैं तो सावधानी बरतनी चाहिए. ऐसे जगहों पर जाने पर भी सावधानी बरतें, जहां बीमारी ट्रांसमिट हो चुकी है. स्किन पर टिक का प्रभाव कम करने के लिए कपड़ों से शरीर को ढकर रखें. स्किन और कपड़ों पर एंटी टीक रेपेलेंट का इस्तेमाल कर सकते हैं. बंदरों और उनके रहने वाली जगहों पर सीधे संपर्क आने से बचना चाहिए.किसी तरह के लक्षण दिखने पर परिवार में सभी सदस्यों की जांच करवानी चाहिए. तुरंत डॉक्टर से इलाज लेना चाहिए. बता दें कि मंकी फीवर वायरस के संपर्क में आने के 5 से 21 दिन बाद ही लक्षण नजर आते हैं, जो दो से चार हफ्ते तक रहते हैं.
 
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों और सुझाव पर अमल करने से पहले डॉक्टर या संबंधित एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें.
 
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