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रुटीन में शामिल कर लें यह ड्रिंक, बढ़ती उम्र के साथ कम हो जाएगा मसल्स लॉस

इंसान एक उम्र के साथ कमजोरी महसूस करने लगता है, चलिए आपको उस ड्रिंक के बारे में बताते हैं जो बढ़ती उम्र के बाद भी आपके मसल्स को लॉस होने से बचा कर रखती है.

सुबह उठते ही लोग सबसे पहले कॉफी पीते हैं. एक कप कॉफी से दिन की शुरुआत फ्रेश और एनर्जेटिक होती है. लेकिन क्या ज्यादा कॉफी पीने से मसल्स मजबूत रहते हैं? अमेरिका के शोधकर्ताओं ने लोगों की आदतों और बॉडी कंपोजीशन को ऑब्जर्व किया. चलिए आपको बताते हैं कि क्या रिजल्ट निकला इस रिसर्च में? 

मसल्स क्यों मायने रखती हैं?

हाथ और पैर की मसल्स सिर्फ स्ट्रेंथ के लिए नहीं होती. कम मसल मास होने से फॉल, फ्रैक्चर और रोजमर्रा की गतिविधियों में मुश्किलें बढ़ जाती हैं, जो फ्रीडम लाइफ को प्रभावित कर सकती हैं. शोधकर्ता अक्सर अपेंडिकुलर स्केलेटल मसल मास टू बीएमआई रेशियो (ASMBMI) को ट्रैक करते हैं, यानी “आपके बॉडी साइज के हिसाब से कितनी मसल है?” यह मसल की मात्रा को बताता है, न कि परफार्मेंस या बैलेंस को.

कॉफी और मसल्स का लिंक

शोधकर्ताओं ने 2011-2018 तक चले अमेरिकी हेल्थ सर्वे (NHANES) के 8,333 एडल्ट का डेटा देखा. मसल्स को DXA स्कैन से मापा गया और ASMBMI निकाला गया. कॉफी का इन्टेक दो 24-घंटे के डाइट रिकॉल से मापा गया, जिसमें रेगुलर कॉफी, डिकैफ और कैफिन शामिल थे. स्टैटिस्टिकल मॉडल में उम्र, पुरुष और महिला, एजुकेशन, इनकम, स्मोकिंग, अल्कोहल, फिजिकल एक्टिविटी, BMI, मेडिकल कंडीशन्स, कैलोरी और प्रोटीन को एडजस्ट किया गया, ताकि कॉफी लेने वाले लोगों की तुलना समान लोगों से की जा सके.

क्या नतीजे दिखाए?

ज्यादा कॉफी पीने वाले लोगों में बॉडी साइज के हिसाब से मसल्स ज्यादा थीं. सबसे ज्यादा कॉफी लेने वाले समूह में ASMBMI लगभग 13 प्रतिशत अधिक था. सबसे ज्यादा कैफिन लेने वाले समूह में लगभग 11-12 प्रतिशत बढ़ोतरी देखी गई. डिकैफ में कोई स्पष्ट लिंक नहीं मिला. लेकिन ओबेसिटी (BMI ≥ 30) वाले लोगों में यह फायदा नहीं दिखा. इसका कारण हो सकता है कि ओबेसिटी में क्रॉनिक सूजन मसल्स को तेजी से तोड़ती है और कॉफी के छोटे फायदे overshadow हो जाते हैं.

क्यों मदद कर सकती है कॉफी?

कॉफी में मौजूद कैफिन नर्वस सिस्टम को स्टिमुलेट करता है और शरीर के फ्यूल यूज को मॉड्यूलेट करता है. इसके अलावा इसमें पॉलीफेनोल्स होते हैं, जो एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी होते हैं. लैब और एनिमल स्टडीज में ये मसल्स की हेल्थ को बेहतर रखने में मददगार पाए गए हैं. कॉफी अकेले मसल्स का स्टार नहीं है. रेगुलर मसल्स प्रोटेक्ट करने के लिए रेजिस्टेंस ट्रेनिंग, पर्याप्त प्रोटीन, अच्छी नींद और हेल्थकेयर जरूरी हैं. कॉफी इसे सपोर्ट कर सकती है, लेकिन मसल्स बिल्ड या प्रोटेक्ट करने के लिए मुख्य चीज नहीं है. पूरा अध्ययन Frontiers in Nutrition जर्नल में प्रकाशित हुआ.

डॉक्टर क्या कहते हैं

डॉ. के.सी. बलानी, न्यूट्रीशन और मसल हेल्थ एक्सपर्ट, कहती हैं, “कॉफी में मौजूद कैफिन और एंटीऑक्सीडेंट मसल्स के लिए मददगार हो सकते हैं, लेकिन मसल मास बढ़ाने के लिए सिर्फ कॉफी पर्याप्त नहीं है. रेगुलर एक्सरसाइज, पर्याप्त प्रोटीन और अच्छी नींद सबसे जरूरी हैं. कॉफी इसमें मदद कर सकती है, लेकिन सिर्फ कॉफी से ही रिजल्ट हासिल नहीं किए जा सकते हैं.

इसे भी पढ़ें- दिल्ली चिड़ियाघर में फैला बर्ड फ्लू, क्या लोगों को भी हो सकता है खतरा?

Disclaimer: Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें.

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About the author सोनम

जर्नलिज्म की दुनिया में करीब 15 साल बिता चुकीं सोनम की अपनी अलग पहचान है. वह खुद ट्रैवल की शौकीन हैं और यही वजह है कि अपने पाठकों को नई-नई जगहों से रूबरू कराने का माद्दा रखती हैं. लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसी बीट्स में उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल रीडर्स का ध्यान खींचा है, बल्कि अपनी विश्वसनीय जगह भी कायम की है. उनकी लेखन शैली में गहराई, संवेदनशीलता और प्रामाणिकता का अनूठा कॉम्बिनेशन नजर आता है, जिससे रीडर्स को नई-नई जानकारी मिलती हैं. 

लखनऊ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रैजुएशन रहने वाली सोनम ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत भी नवाबों के इसी शहर से की. अमर उजाला में उन्होंने बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद दैनिक जागरण के आईनेक्स्ट में भी उन्होंने काफी वक्त तक काम किया. फिलहाल, वह एबीपी लाइव वेबसाइट में लाइफस्टाइल डेस्क पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही हैं.

ट्रैवल उनका इंटरेस्ट  एरिया है, जिसके चलते वह न केवल लोकप्रिय टूरिस्ट प्लेसेज के अनछुए पहलुओं से रीडर्स को रूबरू कराती हैं, बल्कि ऑफबीट डेस्टिनेशन्स के बारे में भी जानकारी देती हैं. हेल्थ बीट पर उनके लेख वैज्ञानिक तथ्यों और सामान्य पाठकों की समझ के बीच बैलेंस बनाते हैं. सोशल मीडिया पर भी सोनम काफी एक्टिव रहती हैं और अपने आर्टिकल और ट्रैवल एक्सपीरियंस शेयर करती रहती हैं.

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