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राष्ट्रीय बोर्ड से पर्यटन क्षेत्र का होगा कायाकल्प, तीसरी बड़ी टूरिज्म इकोनॉमी बन हासिल होगा विकसित भारत का लक्ष्य

सरकार ने 2030 तक पर्यटन उद्योग के जरिए 56 बिलियन डॉलर विदेशी मुद्रा अर्जित करने का लक्ष्य तय किया है. इसके साथ पर्यटन में अगले 7 साल में करीब 14 करोड़ नौकरियों के मौके बनाने का भी लक्ष्य रखा गया है.

Tourism Sector In India: भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की राह पर आगे बढ़ रहा है. इस लक्ष्य को हासिल करने में पर्यटन क्षेत्र की की बहुत बड़ी भूमिका रहने वाली है. भारत में पर्यटन क्षेत्र के कायाकल्प के लिए केंद्र सरकार लगातार कदम उठा रही है. इस लिहाज से राष्ट्रीय पर्यटन बोर्ड मील का पत्थर साबित हो सकता है.

राष्ट्रीय पर्यटन बोर्ड फिलहाल सरकार के विचाराधीन है और केंद्र सरकार को इस पर अंतिम फैसला करना है. दरअसल 2020 में राष्ट्रीय पर्यटन नीति का जो मसौदा तैयार किया गया था, उसमें सबसे पहले राष्ट्रीय पर्यटन बोर्ड बनाने की बात कही गई थी. इसका मुख्य मकसद भारत के पर्यटन क्षेत्र के लिए संस्थागत और शासन ढांचे को मजबूत करना है. राष्ट्रीय पर्यटन नीति के लागू होने के साथ ही राष्ट्रीय पर्यटन बोर्ड के गठन का भी रास्ता साफ हो जाएगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है.

राष्ट्रीय पर्यटन बोर्ड तय करेगा विजन

राष्ट्रीय पर्यटन बोर्ड एक तरह से देश में पर्यटन क्षेत्र के लिए विजन तय करने के साथ ही इस सेक्टर के लिए मार्गदर्शक की भूमिका भी निभाएगा. इस बोर्ड के अध्यक्ष केंद्रीय पर्यटन मंत्री होंगे और सभी राज्यों के पर्यटन मंत्री इसके सदस्य होंगे. इसके साथ ही इस क्षेत्र से जुड़े निजी उद्योग के लोग भी सदस्य बनाए जाएंगे. बोर्ड के लिए अलग से सचिवालय के साथ ही अलग से फंड की भी व्यवस्था की जाएगी.  गौर करने वाली बात है कि इस बोर्ड के संस्थागत ढांचे को तैयार करने के लिए सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया जैसे देशों के पर्यटन  बोर्ड की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया है. इसके साथ ही ये बोर्ड विदेशी बाजारों में भारतीय पर्यटन के मार्केटिंग और प्रमोशन के लिए शीर्ष नोडल निकाय की तरह काम करेगा. ये बोर्ड इस काम के लिए दूसरे देशों की एजेंसियों के साथ संपर्क करेगा.

2032 तक तीसरा सबसे बड़ा टूरिज्म मार्केट

होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष पुनीत चटवाल का भी मानना है कि भारत में पर्यटन क्षेत्र की तस्वीर बदलने में राष्ट्रीय पर्यटन बोर्ड बेहद कारगर साबित होगा. उनका तो यहां तक कहना है कि इस बोर्ड से भारत में पर्यटन क्षेत्र के लिए सही नीति तैयार करने में मदद मिलेगी और इसके जरिए भारत दुनिया के शीर्ष तीन टूरिज्म इकोनॉमी में शामिल हो सकता है. वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल की रिपोर्ट के मुताबिक 2032 तक चीन दुनिया का सबसे टैवल और टूरिज्म मार्केट बन सकता है.  इस मामले में वो उस वक्त तक अमेरिका को पीछे छोड़ देगा. वहीं भारत 457 अरब  डॉलर के अनुमानित मूल्य के साथ जर्मनी को पीछे छोड़ते हुए तीसरे स्थान पर पहुंच सकता है.

नई राष्ट्रीय पर्यटन नीति जल्द

केंद्रीय पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी ने हाल ही में कहा था कि नई राष्ट्रीय पर्यटन नीति के मसौदे पर दूसरे मंत्रालयों और राज्यों के साथ बाकी हितधारकों से भी राय ली जा रही है. उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार इस कोशिश में है कि नई नीति को जल्द से जल्द पेश किया जाए.राष्ट्रीय पर्यटन नीति के तहत देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 5 मिशन और 8 रणनीतिक स्तंभों की पहचान की गई है. पांच मिशनो में राष्ट्रीय हरित पर्यटन मिशन, राष्ट्रीय कौशल मिशन, नेशनल मिशन ऑन डेस्टिनेशन मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन, और नेशनल मिशन ऑन टूरिज्म एमएसएमई  हैं. राष्ट्रीय पर्यटन नीति का मकसद भारत को 365 दिनों के लिए वैश्विक पर्यटन डेस्टिनेशन बनाना है. इस नीति के जरिए भारत में विदेशी पर्यटकों के आगमन की संख्या को दोगुना करने के साथ ही पर्यटन से होने वाली विदेशी मुद्रा की कमाई को भी दोगुना करना है. इस मसौदे में पर्यटन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए इसे उद्योग का दर्जा देने का जिक्र किया गया है. साथ ही होटलों को औपचारिक तौर से बुनियादी ढांचे में शामिल किया गया है.

पर्यटन के विकास के लिए लॉन्ग टर्म प्लानिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी कहना है कि पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाई देने के लिए लॉन्ग टर्म प्लानिंग करनी होगी. भारत पर्यटन के लिहाज से अपार संभावनाओं वाला देश है. भारत में पर्यटन के कई आयाम हैं, जिन पर काम करके इस क्षेत्र को तेजी से विकसित किया जा सकता है. इनमें कोस्टल टूरिज्म, बीच टूरिज्म, मैंग्रोव टूरिज्म, हिमालयन टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, वाइल्डलाइफ टूरिज्म, इको टूरिज्म, हेरीटेज टूरिज्म, स्पीरिचुअल टूरिज्म, वेडिंग डेस्टिनेशन, कॉन्फ्रेंसस के माध्यम टूरिज्म, स्पोर्टस के जरिए टूरिज्म जैसे क्षेत्र हैं, जिन पर फोकस करने की जरूरत है. धार्मिक पर्यटन के लिहाज से रामायण  सर्किट, बुद्ध सर्किट, कृष्णा सर्किट का विकास उनमें से ही एक पहलू है. प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा है कि पर्यटन के लिए नीतियां बनाने में इन बातों पर फोकस करने की जरूरत है.

एकीकृत नजरिया अपनाने की जरूरत

भारत के अलग-अलग पर्यटन स्थलों पर अगर मूलभूत सुविधाएं बढ़ाई जाएं, जिनमें डिजिटल कनेक्टिविटी,अच्छे होटल-अस्पताल, बेहतरीन बुनियादी ढांचे शामिल हैं, तो टूरिज्म सेक्टर में कई गुना वृद्धि हो सकती है. प्रधानमंत्री का आने वाले वक्त में गांव को भी पर्यटन का केंद्र बनाने पर ज़ोर है. हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि कि अगर हम पर्यटन स्थलों के विकास में हर नजरिए को शामिल करें, तो इससे उन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या तेजी से बढ़ेगी. इसके लिए उन्होंने काशी, केदारनाथ, स्टूच्यू ऑफ यूनिटी का उदाहरण दिया था. जब वाराणसी में काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्निर्माण नहीं हुआ था, तो उस समय साल में 70-80 लाख के आसपास ही लोग मंदिर के दर्शन के लिए आते थे. काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्निर्माण होने के बाद पिछले साल वाराणसी जाने वाले लोगों की संख्या 7 करोड़ पार कर गई. उसी तरह से जब केदारघाटी में पुनर्निमाण का काम नहीं हुआ था, तो वहां भी सालाना 4-5 लाख लोग ही दर्शन के लिए आते थे. पिछले साल 15 लाख से ज्यादा श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए गए. वैसे ही गुजरात के पावागढ़ तीर्थ क्षेत्र में पुनर्निर्माण से पहले मुश्किल से 2 से 5 हजार लोग आते थे, लेकिन बेहतर सुविधा होने के बाद 80 हजार लोग औसतन आने लगे.  दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा- स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनने के बाद एक साल के भीतर ही 27 लाख लोग उसे देखने के लिए पहुंचे.

विदेशी पर्यटकों की सुविधाओं पर हो ध्यान 

भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. जनवरी 2022 में सिर्फ 2 लाख विदेशी पर्यटक आए थे, वहीं इस साल जनवरी में 8 लाख से ज्यादा पर्यटक भारत आए. एक अनुमान के मुताबिक आज जो विदेशी टूरिस्ट भारत आते हैं, वो औसतन 1700 डॉलर खर्च करते हैं. वहीं अमेरिका में ये आकड़ा औसतन 2500 डॉलर और ऑस्ट्रेलिया में करीब 5 हजार डॉलर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना है कि ज्यादा खर्च करने वाले विदेशी पर्यटकों को यहां बुलाने के लिहाज से नीतियां बनानी चाहिए और इस दिशा में हर राज्य को अपनी टूरिज्म पॉलिसी में बदलाव करनी चाहिए. प्रोफेशनल टूरिस्ट गाइड की कमी को दूर करने और डिजिटल टूरिस्ट गाइड की संभावनाओं को बढ़ाने की भी जरूरत है.

विदेशी पर्यटकों का आगमन चार गुना बढ़ा

कोरोना महामारी के दौरान दो साल में जिस उद्योग पर सबसे ज्यादा असर पड़ा था, पर्यटन उनसे सबसे प्रमुख था. कोविड-19 महामारी के दौरान विशेष रूप से पर्यटन क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित हुआ था. लेकिन अब भारत में एक बार फिर से पर्यटन उद्योग तेजी से फलने-फूलने लगा है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक महामारी के बाद भारत में विदेशी पर्यटकों का आगमन चार गुना बढ़ गया है. दो साल की सुस्ती के बाद 2022 में करीब 62 लाख विदेशी पर्यटकों ने भारत की यात्रा की. यह भारत आए पर्यटकों की संख्या में चार गुना वृद्धि है.

जी20 की अध्यक्षता से पर्यटन को फायदा

भारत फिलहाल दुनिया के सबसे ताकतवर आर्थिक समूह जी20 की अध्यक्षता कर रहा है. ये भारत के पर्यटन क्षेत्र को गति देने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है. इसको ध्यान में रखते हुए पर्यटन मंत्रालय इस साल को 'विजिट इंडिया ईयर 2023' के रूप में मना रहा है. ये भारत की यात्रा पर फोकस से जुड़ी पहल है. अध्यक्षता अवधि के दौरान 30 नवम्‍बर 2023 तक भारत के 55 स्थानों पर 200 से ज्यादा बैठकें होनी हैं. इस लिहाज से ही इस बार के आम बजट में  50 गंतव्यों को एक सम्पूर्ण पर्यटन पैकेज के रूप में विकसित करने का भी एलान किया गया है. ये घरेलू और विदेशी पर्यटकों के लिए एक संपूर्ण पैकेज होगा. इन जगहों को स्वेदश दर्शन स्कीम के तहत विकसित किया जाएगा. 10 से 12 अप्रैल के बीच नई दिल्ली में देश का पहला 'ग्लोबल टूरिज्म इन्वेस्टर्स समिट' होने वाला है. पर्यटन मंत्रालय इसका आयोजन कर रहा है. इसमें सभी जी 20 सदस्य देशों से लोग हिस्सा लेने आएंगे. इस सम्मेलन का मकसद वैश्विक और घरेलू निवेशकों को भारत के पर्यटन उद्योग में निवेश के आकर्षित करना है.

जीडीपी में बढ़ रहा है योगदान

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के ट्रैवल एंड टूरिज्म डेवलपमेंट इंडेक्स 2021 के मुताबिक भारत का रैंक 117 देशों में 54वां था. 2019 में ये रैंक 46 वां था. जिस तरह भारत में पर्यटन को लेकर अपार संभावनाएं हैं, अगर राष्ट्रीय पर्यटन बोर्ड जल्द अस्तित्व में आ जाता है, तो भारत की रैंकिंग में तेजी से सुधार संभव है. पर्यटन क्षेत्र का देश के जीडीपी में 8% का योगदान है और इस क्षेत्र में करीब 10% लोगों को रोजगार मिला हुआ है. केंद्रीय बजट 2023-24 में पर्यटन उद्योग का ख़ास ख्याल रखा गया है. आजादी के 100 साल होने के मौके पर विकसित भारत के सपने को धरातल पर उतारने के नजरिए से पर्यटन को 4 परिवर्तनकारी अवसरों में से एक माना गया है. बजट में कहा गया है कि मिशन मोड में सरकार पर्यटन को बढ़ावा देगी. इसके लिए राज्यों की सक्रिय भागीदारी और सार्वजनिक-निजी भादीदारी को बढ़ाने पर ज़ोर होगा.  इस बार के बजट में पर्यटन मंत्रालय को 2400 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है. इसमें से 1742 करोड़ रुपये पर्यटन के बुनियादी ढांचे के विकास पर खर्च किया जाएगा और 242 करोड़ रुपये प्रचार और ब्रैंडिंग पर खर्च होंगे.

भारत सरकार ने 2030 तक पर्यटन उद्योग के जरिए  56 बिलियन डॉलर विदेशी मुद्रा अर्जित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसके साथ पर्यटन में अगले 7 साल में करीब 14 करोड़ नौकरियां सृजित करने का भी लक्ष्य रखा गया है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार ख़ास तौर से क्रूज पर्यटन, पारितंत्र पर्यटन और साहसिक पर्यटन पर ध्यान केंद्रित कर रही है. सरकार अब स्वदेश दर्शन 2.0 नाम की योजना शुरू कर रही है, जिसके तहत पर्यटन गंतव्यों का सतत विकास सुनिश्चित किया जाएगा. 2027 तक भारत का पर्यटन बाजार 125 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है. 2020 में ये आंकड़ा 75 अरब डॉलर था. पिछले साढ़े आठ सालों में भारत ने  7,000 करोड़ रुपये पर्यटन के बुनियादी ढांचे के निर्माण पर खर्च किए हैं. देश के विकास में तेजी लाने की संभावना रखने वाले महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में चिकित्सा और स्‍वास्‍थ्‍य पर्यटन (हेल्थ टूरिज्म) को मान्यता दिया गया है.  

 

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