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ट्रंप और जेलेंस्की विवाद के बाद भारत के लिए है मौका, दे सकता है इस वैश्विक समस्या में दखल!

अंतरराष्ट्रीय राजनय या डिप्लोमैसी केवल गर्म-गर्म से नहीं चलती है, वह सर्द-गर्म दोनों ही तरीकों से चलती है. ट्रंप जिस तरह लगातार आक्रामक बैटिंग कर रहे हैं, उससे दुनिया के कई समीकरण बिगड़ रहे हैं.

ट्रंप और जेलेंस्की के बीच विवाद ने वैश्विक राजनीति को एक नई दिशा दी है. 28 फरवरी को जो कुछ भी ह्वाइट हाउस में हुआ, उससे यह तो तय है कि ट्रंप अब यूक्रेन के साथ अपनी शर्तों पर ही बातचीत करेंगे. हालांकि, ट्रंप जिस तरह एक के बाद एक कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों को उनके मुंह पर ही सुना रहे हैं, उससे ट्रंप के बहुत इम्पल्सिव और डेस्परेट होने की संभावनाओं को बल मिलता है. वह अपने चार वर्षों के शासनकाल में इतनी लंबी लकीर खींच देना चाह रहे हैं कि उसके बाद दुनिया 'ट्रंप के पहले और ट्रंप के बाद' के खांचों में जानी जाए. इसी डेस्परेशन में वह चाह रहे थे कि जेलेन्स्की पहले तो खनिज संसाधनों के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर करें, उसके बाद ही आगे की बातचीत हो. जेलेन्स्की ने इसका विरोध किया और वहीं से बातचीत में खटास आनी शुरू हुई. 

इस विवाद के बाद, भारत के पास एक महत्वपूर्ण अवसर है कि वह इस वैश्विक समस्या में दखल दे और अपनी भूमिका को और मजबूत करे. भारत के पास यह मौका इसलिए भी है क्योंकि रूस और यूक्रेन दोनों ही भारत को निष्पक्ष मानते हैं और दोनों ही भारत की बात सुनते भी हैं. 

ट्रंप और जेलेंस्की विवाद का प्रभाव

ट्रंप और जेलेंस्की विवाद ने अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव को बढ़ा दिया है.  इस विवाद ने न केवल दोनों देशों के बीच संबंधों को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी अस्थिरता पैदा की है. इस विवाद के कारण, कई देशों ने अपनी विदेश नीति में बदलाव किए हैं और नए गठबंधनों की तलाश की है. जेलेन्स्की के ह्वाइट हाउस से निकलते ही ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने डाउनिंग स्ट्रीट में उनसे मुलाकात की और ब्रिटेन के उनके साथ खड़े होने का आश्वासन दिया. कीर स्टार्मर ने कहा कि यूक्रेन को “पूरे यूनाइटेड किंगडम का पूरा समर्थन प्राप्त है.” स्टार्मर ने जेलेन्स्की को आश्वस्त किया और यह भी कहा कि इस पूरे युद्ध में ब्रिटने हमेशा उसके साथ खड़ा रहेगा, “पूरा यूनाइटेड किंगडम आपके साथ है. हम यूक्रेन के साथ तब तक खड़े रहेंगे, जब तक जरूरत होगी.”

स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन स्थायी शांति स्थापित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है और जेलेन्स्की ने रूस और यूक्रेन के युद्ध में ब्रिटेन के समर्थन के लिए उनका धन्यवाद दिया. जेलेन्स्की की यात्रा ब्रिटेन में होनेवाले रक्षा शिखर सम्मेलन से पहले हुई. पूरे यूरोप के नेता रविवार 1 मार्च को लंदन में यूक्रेन के लिए शांति योजना पर चर्चा करने के लिए इकट्ठा हुए थे. इस बैठक के बाद जेलेन्स्की ने भी बयान जारी किया और सभी नेताओं का धन्यवाद दिया. सम्मेलन में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी भी शामिल थीं, 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की एकजुटता दिखाने वाली यह बैठक बेहद अहम है. हालांकि, जेलेन्स्की ने इस बैठक के बाद अमेरिका को भी धन्यवाद दिया और कहा कि यूक्रेन "स्थायी शांति" चाहता है और अमेरिका ने अब तक जो साथ दिया है, वह उसके लिए आभारी हैं. 

भारत के पास मौका

इस विवाद के बाद, भारत के पास एक महत्वपूर्ण अवसर है कि वह इस वैश्विक समस्या में दखल दे और अपनी भूमिका को और मजबूत करे. रूस के राष्ट्राध्यक्ष पुतिन हों या यूक्रेन के जेलेन्स्की, दोनों ही भारत के ऊपर भरोसा करते हैं. भारतीय प्रधानमंत्री मोदी युद्धरत यूक्रेन का दौरा भी कर चुके हैं और उस दौरान रूस ने वहां सीजफायर भी रखा. पुतिन कई बार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नरेंद्र मोदी की सरहाना कर चुके हैं और इसीलिए वर्तमान परिस्थितियों में भारत के पास निम्नलिखित संभावनाएं हैं:

मध्यस्थता की भूमिका: भारत एक तटस्थ देश के रूप में ट्रंप और जेलेंस्की के बीच मध्यस्थता कर सकता है. इससे भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा बढ़ेगी और उसे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का मौका मिलेगा.

नए गठबंधन: इस विवाद के बाद, कई देश नए गठबंधनों की तलाश में हैं. भारत इस अवसर का लाभ उठाकर नए गठबंधन बना सकता है और अपनी विदेश नीति को और मजबूत कर सकता है.

आर्थिक अवसर: इस विवाद के कारण, कई देशों ने अपनी व्यापारिक नीतियों में बदलाव किए हैं।.भारत इस अवसर का लाभ उठाकर अपने व्यापारिक संबंधों को और मजबूत कर सकता है और अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकता है.

संभावित परिणाम

अंतरराष्ट्रीय राजनय या डिप्लोमैसी केवल गर्म-गर्म से नहीं चलती है, वह सर्द-गर्म दोनों ही तरीकों से चलती है. ट्रंप जिस तरह लगातार आक्रामक बैटिंग कर रहे हैं, उससे दुनिया के कई समीकरण बिगड़ रहे हैं. मेक अमेरिका ग्रेट अगेन की रट लगाने वाले ट्रंप सभी चीजों के ऊपर अमेरिकी हितों को रख रहे हैं, भले ही दशकों पुराने अंतरराष्ट्रीय समीकरण भहरा जाएं. उनके रुख को लेकर दुनिया के कई देशों में डर है, कुछ में कौतूहल है और कुछ में जिज्ञासा का भाव है कि वे कहां रुकेंगे... यदि भारत इस अवसर का सही तरीके से उपयोग करता है, तो इसके निम्नलिखित परिणाम हो सकते हैं:

वैश्विक प्रतिष्ठा में वृद्धि: यदि भारत ट्रंप और जेलेंस्की के बीच मध्यस्थता करने में सफल होता है, तो उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी और उसे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का मौका मिलेगा. नए गठबंधनों के माध्यम से, भारत अपनी विदेश नीति को और मजबूत कर सकता है और वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के माध्यम से, भारत अपनी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकता है और अपने नागरिकों के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है. आने वाले एक दो महीनों में भारत सहित दुनिया के कई राजनियक समीकरण बदलेंगे और भारत को इस मौके का फायदा उठाना ही चाहिए. 

आगे की राह 

ट्रंप और जेलेंस्की विवाद ने वैश्विक राजनीति में एक नई दिशा दी है. इस विवाद के बाद, भारत के पास एक महत्वपूर्ण अवसर है कि वह इस वैश्विक समस्या में दखल दे, रूस और यूक्रेन दोनों ही देशों के साथ बैक चैनल बातचीत करे और दोनों ही को भरोसे में लेकर अपनी भूमिका को और मजबूत करे. यदि भारत इस अवसर का सही तरीके से उपयोग करता है, तो पहले से मजबूत हो रही उसकी वैश्वक प्रतिष्ठा और भी बढ़ेगी, उसके साथ नए गठबंधन-साथी भी आएंगे और वह केवल ग्लोबल साउथ की आवाज न रहकर पूरी दुनिया में एक महत्वपूर्ण आवाज बन सकता है. 

व्यालोक जेएनयू और आइआइएमसी से पढ़े हैं. विभिन्न मीडिया संस्थानों जैसे ईटीवी, दैनिक भास्कर, बीबीसी आदि में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव. फिलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता और अनुवाद करते हैं.
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