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World Television Day 2025: आज टीवी का बर्थडे नहीं, फिर क्यों मनाया जा रहा वर्ल्ड टेलीविजन डे? जानें वजह

इसीलिए 21 नवंबर का दिन हर साल दुनिया को याद दिलाता है कि एक स्क्रीन भी इंसानों को जोड़ सकती है, समाज को रास्ता दिखा सकती है और सच को दुनिया के सामने ला सकती है.

हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में एक स्क्रीन ऐसी है जिसने दुनिया को देखने का नजरिया ही बदल दिया है.  ये स्क्रीन कुछ और नहीं टेलीविजन है. यह सिर्फ एक डिब्बा नहीं था, बल्कि वह खिड़की थी जिससे लोग अपने घर बैठे दुनिया की हलचल से जुड़ते रहे. कभी यह मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन था, कभी खबरों का सबसे भरोसेमंद जरिया. तकनीक आगे बढ़ी, मोबाइल और इंटरनेट आ गए, लेकिन टीवी की पकड़ आज भी उतनी ही मजबूत है.

इसीलिए 21 नवंबर का दिन हर साल दुनिया को याद दिलाता है कि एक स्क्रीन भी इंसानों को जोड़ सकती है, समाज को रास्ता दिखा सकती है और सच को दुनिया के सामने ला सकती है. यही वजह है कि आज विश्व टेलीविजन दिवस  मनाया जा रहा है. हालांकि आज टीवी का बर्थडे नहीं है. तो फिर सवाल उठता है कि जब आज टीवी का जन्मदिन ही नहीं है, तो फिर 21 नवंबर को इसे क्यों मनाया जाता है. 

क्यों मनाया जा रहा वर्ल्ड टेलीविजन डे?

साल 1996 में संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 21 नवंबर को पहली बार विश्व टेलीविजन फोरम का आयोजन किया. इस मंच पर पत्रकार, नेता, नीति-निर्माता और दुनिया भर के मीडिया विशेषज्ञ एक जगह बैठे और एक बहुत अहम सवाल पूछा गया. उस दौर में टीवी सबसे प्रभावशाली संचार माध्यम था. मोबाइल और इंटरनेट अपनी शुरुआत में थे. टीवी ही वह माध्यम था जिसके जरिए दुनिया एक-दूसरे की खुशियां, संकट, युद्ध, खेल, वैज्ञानिक उपलब्धियां, सब कुछ देख पाती थी. इसलिए संयुक्त राष्ट्र ने संदेश दिया कि टेलीविजन सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि वैश्विक संवाद का एक पुल है और इसी सोच के साथ 21 नवंबर को आधिकारिक तौर पर विश्व टेलीविजन दिवस घोषित कर दिया गया. 

टीवी ने कैसे दुनिया की सीमाएं मिटाईं

टीवी ने वह सब कुछ किया जो किसी और माध्यम ने इतनी ताकत से नहीं किया. जैसे युद्ध के मैदानों से लाइव सीन दिखाए, संसद की बहसें घरों तक पहुंचाईं, आफतों और प्राकृतिक आपदाओं की तुरंत जानकारी दी, अंतरिक्ष मिशनों को सीधा प्रसारण में दिखाया, लोकतंत्र, जागरूकता और शिक्षा को नई दिशा दी. ऐसे में पहली बार लोगों ने सिर्फ सुना नहीं, बल्कि देखा और इसी ने समाज में सत्य की अपेक्षा को और मजबूत किया. 

आधुनिक दौर में टीवी 

2025 तक टीवी कई नए रूपों में बदल चुका है. जैसे डिजिटल टीवी, HD और 4K ब्रॉडकास्टिंग, AI-आधारित स्टूडियो और वर्चुअल न्यूजरूम, OTT प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण फिर भी संकट के समय जैसे महामारी, आपात स्थिति या बड़ी खबर—लोग सबसे पहले टीवी चैनल ही चलाते हैं. टीवी अब भी फर्स्ट सोर्स ऑफ इंफॉर्मेशन यानी सबसे विश्वसनीय पहला स्रोत माना जाता है. 

विश्व टेलीविजन दिवस क्यों मनाया जाता है?

यह दिन मनाने का उद्देश्य सरल है, लेकिन इसकी गहराई बहुत बड़ी है क्योंकि टीवी सूचना की ताकत का प्रतीक है. यह लोगों को जोड़ता है, समाज को दिशा देता है. यह हमें बताता है कि वैश्विक घटनाएं हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं. यह लोकतंत्र, शिक्षा, जागरूकता और मनोरंजन चारों का सहज संयोजन है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, टीवी आज भी दुनिया में वीडियो देखने का सबसे बड़ा स्रोत है. 2017 में विश्व भर में लगभग 1.63 अरब टीवी घर थे, जो आने वाले वर्षों में बढ़कर 1.74 अरब से ज्यादा होने की उम्मीद जताई गई. 

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