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दो-दो प्रधानमंत्री देने के बाद भी क्यों राजनीतिक दल नहीं बना RSS, क्या है इसके पीछे की वजह?

आरएसएस यानि संघ पर समय-समय पर कई सारे आरोप लगते रहे हैं, लेकिन कभी भी उसने राजनीतिक दल बनना नहीं चाहा. दरअसल संघ एक विचारधारा है और वह पर्दे के पीछे रहकर काम करती है.

भारतीय राजनीति की दुनिया में RSS जिसे संघ भी कहा जाता है, एक ऐसा नाम है, जिसके बिना पॉलिटिक्स अधूरी मानी जाती है. देश को अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी जैसे दो कद्दावर प्रधानमंत्री देने के बाद भी संघ ने आजतक खुद को एक राजनीतिक दल के रूप में रजिस्टर्ड नहीं कराया है. सवाल यह है कि इतनी बड़ी ताकत होने के बाद भी संघ खुद राजनीति में क्यों नहीं उतरता है और खुद चुनाव क्यों नहीं लड़ता है, वह सिर्फ पर्दे के पीछे रहकर ही काम क्यों करता है. दरअसल इसके पीछे आरएसएस की एक बहुत सोची समझी रणनीति काम करती है.

चरित्र निर्माण और हिंदुत्व के विचार को फैलाना

संघ के संस्थापकों ने इस संगठन की नींव किसी राजनैतिक लाभ या फिर सत्ता हासिल करने के लिए नहीं रखी थी, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक आंदोलन के रूप में की थी. शुरू से ही आरएसएस का मुख्य उद्देश्य चरित्र निर्माण और हिंदुत्व के विचार को रग-रग में बसाना रहा है. संघ का मानना है कि सत्ता को आती-जाती रहती है, लेकिन समाज के संस्कार और सभ्यता हमेशा टिके रहते हैं. यही वजह है कि संघ खुद को रोजमर्रा की राजनीति, चुनावी जोड़-तोड़ और वोट-बैंक के समझौते से पूरी तरह से दूर रखता है, ताकि उसकी वैचारिक शुद्धता पर कभी कोई आंच न आए.

डायरेक्ट राजनीति नहीं, पर्दे के पीछे से काम

भले ही आरएसएस खुद सीधे चुनाव नहीं लड़ता है और किसी भी तरह की पॉलिटिकल पार्टी नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उसका राजनीति से कोई सरोकार नहीं है. संघ ने अपनी राजनीतिक मत्वाकांक्षाओं और विचारधारा को सरकार तक पहुंचाने के लिए एक खास व्यवस्था तैयार की है. इसके तहत संघ सीधे चुनावी मैदान में उतरने के बजाय अपने एक मजबूत और विशाल नेटवर्क का इस्तेमाल करता है, जिसको संघ परिवार कहा जाता है. इस परिवार का मुख्य राजनीतिक चेहरा भारतीय जनता पार्टी है, जो कि संघ की विचारधारा को सत्ता तक पहुंचाती है.

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बीजेपी और संघ का तालमेल

भाजपा और आरएसएस के बीच का रिश्ता बेहद गहरा और संगठित है. संघ अपने सबसे काबिल, अनुशासित और समर्पित पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को भाजपा में काम करने के लिए भेजता है. देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस व्यवस्था की बड़ी मिसाल हैं. ये दोनों नेता संघ के बड़े प्रचारक रहे हैं, जिनको बाद में राजनीतिक कमान सौंपने के लिए जिम्मेदारी दी गई. इससे संघ का भी काम चलता है और सीधे तौर पर कोई राजनीतिक दाग भी नहीं लगता है.

नहीं करनी होती जनता की जवाबदेही

इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि भारतीय कानून के तहत आरएसएस एक रजिस्टर्ड राजनीतिक दल या फिर पारंपरिक एनजीओ नहीं है, बल्कि यह लोगों का एक स्वतंत्र समूह है. राजनीतिक दल न होने की वजह से इसको उन कड़े नियमों और जनता के प्रति सीधी जवाबदेही का सामना नहीं करना पड़ता है, जो किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए अनिवार्य होते हैं. विश्लेषकों का मानना है कि इस सोची-समझी रणनीतिक अस्पष्टता के कारण संघ बिना किसी सरकारी और लोकतांत्रिक जांच-पड़ताल के देश की दिशा और फैसलों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है.

दशकों आगे की सोचकर चलता है संघ

आरएसएस के लिए राजनीति सिर्फ एक जरिया मात्र है, यह उसका अंतिम लक्ष्य नहीं है. जहां राजनीतिक दल की नजरें सिर्फ अगले पांच साल के चुनावों पर टिकी होती हैं, वहीं संघ लंबी सोच लेकर चलता है. वह समाज के हर वर्ग जैसे छात्र, मजदूरों और आदिवासियों के बीच भी अपने संगठनों के जरिए पैठ बनाता है. यही सारी वजहें हैं कि संघ दो-दो प्रधानमंत्री देने के बाद भी राजनीतिक दल नहीं बना और एक मार्गदर्शक के रूप में काम कर रहा है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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