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World Poetry Day: 21 मार्च के दिन क्यों सेलिब्रेट किया जाता है ये दिवस, जानिए इसकी कहानी

World Poetry Day: आज दुनिया भर में मनाया जा रहा है विश्व कविता दिवस यानी वर्ल्ड पोएट्री डे. 21 मार्च को ही क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड पोएट्री डे. क्या है इसके पीछे की कहानी. चलिए जानते हैं. 

World Poetry Day: दुनिया में कला के प्रेमी बहुत है. कलाकारों की दुनिया में बहुत इज्जत की जाती है. खास तौर पर साहित्य के क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों की. कविता, शायरी, पोएट्री  अलग जबानों में भले ही इन्हें अलग नामों से जाना जाता हो. लेकिन इनका एहसास एक जैसा होता है. फिर चाहे वह जॉन कीट्स की पोएट्री हो या मिर्ज़ा ग़ालिब की गजल या फिर मुक्तिबोध की कविता. इन सबको  पढ़ने का अपना अलग ही आनंद है. आज हम शायरों कवियों की बात क्यों कर रहे हैं. क्योंकि आज है विश्व कविता दिवस यानी वर्ल्ड पोएट्री डे. 21 मार्च को ही क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड पोएट्री डे. क्या है इसके पीछे की कहानी. चलिए जानते हैं. 

क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड पोएट्री डे?

वर्ल्ड पोएट्री डे को मनाने के पीछे मुख्य उद्देश्य कविता और कवियों को बढ़ावा देना है. खास तौर पर क्षेत्रीय भाषाओं में लिखने वाले कवियों को प्रोत्साहन देना और उनकी संस्कृति को बचाए रखना है. दुनिया का शायद ही ऐसा कोई विषय हो जिसको लेकर किसी कवि ने कविता ना कही हो. वर्ल्ड पोएट्री डे कला के साथ कविता का संबंध बताता है. रंगमंच में कविता का योगदान, पेंटिंग में कविता का योगदान, और नृत्य में कविता का योगदान. किसी के चलते तमाम गैर सरकारी संगठन, राष्ट्रीय आयोग, निजी संस्थान जैसे स्कूल, पब्लिकेशन हाउस, म्यूजियम आदि सब में विश्व कविता दिवस सामूहिक तौर पर मनाया जाता है.  

साल 1999 में पहली बार मनाया गया

साल 1999 में 21 मार्च के दिन संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक और संस्कृत संगठन यानी यूनेस्को ने इस दिन को विश्व कविता दिवस के तौर पर मनाना शुरू किया था. पेरिस में हुए संयुक्त राष्ट्र के तीसवें सम्मेलन में इसकी घोषणा हुई थी. इसका उद्देश्य था कविता के द्वारा लोगों की अभिव्यक्ति को बढ़ावा देना. दुनिया की अलग-अलग भाषाओं को उनकी संस्कृतियों को बढ़ावा देना. यूनेस्को के रिकॉर्ड्स के अनुसार मोरक्को राष्ट्रीय आयोग ने इस दिन को कविता दिवस के तौर पर मनाने के लिए  अनुरोध किया था. कब से 21 मार्च को ही पूरी दुनिया में विश्व कविता दिवस मनाया जा रहा है. 

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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