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लेबनान से क्यों इतनी हमदर्दी रखता है ईरान? इसके पीछे छिपे राज को नहीं जानते होंगे आप

Iran Lebanon Friendship: ईरान और लेबनान की दोस्ती जग जाहिर है. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर लेबनान से इतनी हमदर्दी क्यों रखता है ईरान? आइए जानते हैं.

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  • शिया धार्मिक संबंध और भू-राजनीतिक पहुँच ईरान के लिए महत्वपूर्ण।

Iran Lebanon Friendship: जब भी मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ता है तो ईरान अक्सर लेबनान के सबसे मजबूत समर्थकों में से एक के तौर पर सामने आता है. कूटनीतिक समर्थन से लेकर सैन्य मदद तक तेहरान लगातार लेबनान के ताकतवर शिया संगठन हिजबुल्लाह के साथ खड़ा रहा है. हालांकि कई लोग इसे दोस्ती या फिर धार्मिक एक जुटता का मामला मानते हैं लेकिन असलियत इससे कहीं ज्यादा जटिल है.

हिजबुल्लाह का जन्म 

लेबनान में ईरान की गहरी भागीदारी के पीछे सबसे बड़ी वजहों में से एक हिजबुल्लाह के साथ उसका पुराना रिश्ता है. 1982 में इजरायल द्वारा लेबनान पर हमले के बाद ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने हिजबुल्लाह को स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई. वक्त के साथ हिजबुल्लाह इस क्षेत्र के सबसे प्रभावशाली सशस्त्र समूह में से एक बन गया और इसे ईरान की क्षेत्रीय राजनीति का एक जरूरी स्तंभ माना जाता है. तेहरान के लिए पश्चिमी एशिया में अपना प्रभाव बनाए रखने और इजरायल व अमेरिका की ताकत का मुकाबला करने के लिए हिजबुल्लाह की ताकत को बनाए रखना जरूरी है. 

एक रणनीतिक मोर्चा 

भौगोलिक स्थिति भी एक काफी बड़ी वजह है. ईरान और इजरायल की सीमा आपस में नहीं मिलती. इससे सीधा सैन्य दबाव बनाना मुश्किल हो जाता है. हालांकि लेबनान की सीमा इजरायल से लगती है. हिजबुल्लाह के साथ अपने संबंधों के जरिए ईरान ने इजरायली क्षेत्र के करीब अपनी रणनीतिक मौजूदगी बनाई है. ईरान के नजरिए से यह एक निवारक के तौर पर काम करता है. 

धार्मिक संबंध और शिया एकजुटता

इस रिश्ते में धर्म भी बड़ी भूमिका निभाता है. ईरान शिया बहुल इस्लामी गणराज्य है. वह खुद को शिया धार्मिक सोच का एक बड़ा केंद्र मानता है. लेबनान में बड़ी संख्या में शिया आबादी रहती है. इनमें से कई लोगों के ईरान के साथ ऐतिहासिक और धार्मिक संबंध है. लेबनान के कई धर्मगुरुओं ने ईरान के शहर कोम में पढ़ाई की है. यह शिया स्कॉलरशिप के सबसे जरूरी केदो में से एक है. धार्मिक संस्थान, शैक्षिक कार्यक्रम और वित्तीय सहायता के जरिए ईरान ने लेबनान के शिया समुदाय के कुछ वर्गों के बीच अपना प्रभाव मजबूत किया है. 

लेबनान में ईरान के हित

भूमध्य सागर पर लेबनान की स्थिति ईरान को यूरोप और भूमध्यसागरीय क्षेत्र की तरफ एक राजनीतिक रास्ता देती है. फारस की खाड़ी से परे अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे देश के लिए लेबनान में मजबूत संबंध बनाए रखने से उसकी भू राजनीतिक पहुंच का विस्तार होता है.

यह भी पढ़ेंः क्या चांद पर चल सकती है साइकिल या बाइक, जानें क्या कहता है साइंस?

स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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