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एसी कोच में 2 चादरें देने की वजह क्या? जानें इस्तेमाल का सही तरीका

Indian Railways Bedroll: रेलवे के एसी कोच में हमेशा दो चादरें दी जाती हैं. आइए जानते हैं क्या है इसके पीछे की वजह.

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  • ट्रेन में दो चादरें स्वच्छता, कम्बल से सीधे संपर्क से बचाव हेतु दी जाती हैं।
  • चादरें हर यात्रा बाद धुलतीं, जबकि कम्बल महीने में एक-दो बार साफ होता है।
  • बेडरोल किट एसी टिकट में शामिल है; रेलवे की संपत्ति, घर ले जाना अपराध है।

Indian Railways Bedroll: भारतीय रेलवे के एसी कोच में यात्रा करने वाले यात्री, जिनमें फर्स्ट एसी, सेकंड एसी, थर्ड एसी और एसी इकोनॉमी शामिल हैं, को एक बेडरोल किट दी जाती है. इसमें दो सफेद बेडशीट, एक कंबल, एक तकिया और एक तौलिया होता है. कई यात्रियों का ऐसा मानना है कि दूसरी बेडशीट सिर्फ एक अतिरिक्त चादर होती है. लेकिन ऐसा नहीं है. आइए जानते हैं कि आखिर ट्रेन में दो चादरें क्यों दी जाती हैं.

क्यों दी जाती हैं दो बेडशीट?

दो बेडशीट देने के पीछे की मुख्य वजह स्वच्छता है. सफेद बेडशीट, तकिया कवर और तौलिये को हर यात्रा के बाद मशीन में धोया जाता है. लेकिन एसी कोच में इस्तेमाल किए जाने वाले ऊनी कंबल को हर यात्रा के बाद साफ नहीं किया जाता. क्योंकि एक ही कंबल को धोने से पहले कई यात्रियों के लिए दोबारा इस्तेमाल किया जाता है इस वजह से भारतीय रेलवे एक अतिरिक्त बेडशीट देती है ताकि यात्रियों का कंबल के साथ सीधा संपर्क ना हो. इससे गंदगी के संपर्क में आने से बचने में मदद मिलती है. यह त्वचा संक्रमण के जोखिम को कम करता है.


एसी कोच में 2 चादरें देने की वजह क्या? जानें इस्तेमाल का सही तरीका

बेडशीट का इस्तेमाल करने का सही तरीका 

ज्यादातर यात्री अनजाने में दोनों चादरों का इस्तेमाल बिस्तर के रूप में करते हैं. लेकिन यह सही तरीका नहीं है. लेटने से पहले सबसे पहले बर्थ या फिर सीट पर चादर बिछानी चाहिए. यह सोने के लिए एक साफ सतह बनाता है और बर्थ के साथ सीधे संपर्क को रोकता है.

कंबल से खुद को ढकने से पहले दूसरी बेडशीट अपने शरीर पर रखनी चाहिए. इस तरह कंबल सीधे आपकी त्वचा या फिर कपड़ों को छूने के बजाय बेडशीट के ऊपर रहता है. इससे पूरी यात्रा के दौरान आपको बेहतर स्वच्छता मिलती है और यही वजह है कि हर एसी कोच बेडरोल किट में दो अलग-अलग बेडशीट देते हैं.

रेलवे बेडरोल कितनी बार धोए जाते हैं?

भारतीय रेलवे अलग-अलग बेडरोल वस्तुओं के लिए अलग-अलग सफाई कार्यक्रम का पालन करता है. हर यात्रा के बाद सफेद चादर, तकिये के कवर और चेहरे के तौलिए मशीन से लॉन्ड्री में धोए जाते हैं. हालांकि ऊनी कंबल को उनकी सामग्री और रखरखाव की जरूरत की वजह से महीने में सिर्फ एक या फिर दो बार ही अच्छे से धोया जाता है.

स्वच्छता को और भी बेहतर बनाने के लिए रेलवे ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निरीक्षण प्रणाली और व्हाइटो-मीटर पेश किया है. यह यात्रियों को जारी किए जाने से पहले बेडशीट की सफेदी और दाग के स्तर की अपने आप जांच करता है. 


एसी कोच में 2 चादरें देने की वजह क्या? जानें इस्तेमाल का सही तरीका

एक फिक्स रिप्लेसमेंट पीरियड 

भारतीय रेलवे हर लिनेन आइटम के लिए एक फिक्स रिप्लेसमेंट पीरियड का पालन करती है जिसे कोडल लाइफ कहा जाता है. सूती चादरें 1 साल के बाद बदल दी जाती हैं, पॉलिएस्टर चादर, कंबल और तकिए बदलने से पहले 2 साल तक सेवा में रहते हैं. तकिये के कवर और तौलिये का जीवनकाल कम होता है, इसलिए उन्हें आमतौर पर 9 महीने बाद ही बदल दिया जाता है. 

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क्या एसी यात्रियों के लिए बेडरोल मुफ्त है?

एसी में यात्रा करने वाले यात्रियों से बेडरोल किट के लिए अलग से शुल्क नहीं लिया जाता. इसकी कीमत टिकट किराए में पहले से ही शामिल होती है. हर मानक बेडरोल किट में दो बेडशीट, एक कंबल, एक तकिया और एक तकिया कवर के साथ एक तौलिया होता है. इससे यह पक्का होता है कि यात्रियों के पास रात भर की आरामदायक यात्रा के लिए जरूरी चीजें हों.

रेलवे बेडरोल का सामान घर ले जाना अपराध 

यात्रियों को यह याद रखना चाहिए कि यात्रा के दौरान दी जाने वाली चादर, कंबल, तकिया और तौलिया भारतीय रेलवे की ही संपत्ति है. ये सभी चीजें सिर्फ यात्रा के दौरान इस्तेमाल के लिए हैं और इन्हें यात्रा खत्म होने से पहले वापस कर दिया जाना चाहिए. किसी भी आइटम को घर ले जाना रेलवे संपत्ति अधिनियम के तहत चोरी माना जाता है. सजा के तौर पर जुर्माना या फिर जेल सहित कानूनी कार्रवाई हो सकती है.

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स्पर्श गोयल को कंटेंट राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग में चार साल का अनुभव है.  इन्होंने अपने करियर की शुरुआत नमस्कार भारत से की थी, जहां पर लिखने की बारीकियां सीखते हुए पत्रकारिता और लेखन की दुनिया में कदम रखा. इसके बाद ये डीएनपी न्यूज नेटवर्क, गाजियाबाद से जुड़े और यहां करीब दो साल तक काम किया.  इस दौरान इन्होंने न्यूज राइटिंग और स्क्रीनराइटिंग दोनों में अपनी पकड़ मजबूत की.

अब स्पर्श एबीपी के साथ अपनी लेखनी को निखार रहे हैं. इनकी खास रुचि जनरल नॉलेज (GK) बीट में है, जहां ये रोज़ नए विषयों पर रिसर्च करके अपने पाठकों को सरल, रोचक और तथ्यपूर्ण ढंग से जानकारी देते हैं.  

लेखन के अलावा स्पर्श को किताबें पढ़ना और सिनेमा देखना बेहद पसंद है.  स्क्रीनराइटिंग के अनुभव की वजह से ये कहानियों को दिलचस्प अंदाज़ में पेश करने में भी माहिर हैं.  खाली समय में वे नए विषयों पर रिसर्च करना और सोशल मीडिया पर अपडेट रहना पसंद करते हैं.

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