गर्मी बढ़ते ही क्यों लागू हुआ ग्रेप-1, इसमें किस तरह की होती हैं पाबंदियां?
दिल्ली में भीषण गर्मी के साथ प्रदूषण ने भी दस्तक दे दी है, जिसके चलते प्रशासन को ग्रैप-1 (GRAP-1) लागू करना पड़ा है. तापमान के 40 डिग्री पार जाते ही हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच गई है.

- डीजल जनरेटर, खुले में कचरा जलाने पर सख्ती.
राजधानी दिल्ली में सूरज के तेवर तल्ख होते ही हवा का मिजाज भी बिगड़ने लगा है. बृहस्पतिवार को इस साल का सबसे अधिक तापमान दर्ज किया गया, जिसने न केवल लोगों को पसीने से तर-बतर किया, बल्कि प्रदूषण के स्तर को भी खराब श्रेणी में धकेल दिया. जब हवा की गुणवत्ता यानी एक्यूआई (AQI) 200 के पार जाती है, तो दिल्ली-NCR में ग्रैप-1 सक्रिय कर दिया जाता है. आखिर क्या है यह ग्रैप-1 और इसके लागू होते ही आपकी दिनचर्या में क्या बदलाव आते हैं? आइए, इन कड़े नियमों और पाबंदियों को गहराई से समझते हैं.
गर्मी और प्रदूषण का गहरा नाता
दिल्ली में गुरुवार को मौसम की पहली तपिश ने दस्तक दी और पारा 40 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को पार कर गया. गर्मी बढ़ने के साथ ही धूल भरी हवाओं और स्थानीय कारकों की वजह से वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 226 दर्ज किया गया. पर्यावरण नियमों के अनुसार, 201 से 300 के बीच का एक्यूआई खराब माना जाता है. हवा की सेहत गिरते ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) हरकत में आया और पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी ग्रैप का पहला चरण लागू करने की घोषणा कर दी गई.
क्या है ग्रैप और इसके विभिन्न चरण?
ग्रैप (GRAP) एक ऐसी आपातकालीन योजना है जो दिल्ली-NCR में हवा के बिगड़ते स्तर को रोकने के लिए तैयार की गई है. इसे चार चरणों में बांटा गया है, जो सीधे तौर पर एक्यूआई के अंकों से जुड़े हैं. ग्रैप-1 तब लागू होता है जब एक्यूआई 201-300 के बीच हो. यदि प्रदूषण बढ़ता है और एक्यूआई 301-400 पर पहुंचता है, तो ग्रैप-2 लागू किया जाता है। ग्रैप-3 का नंबर 401-450 के बीच आता है, और जब हालात बेकाबू होकर एक्यूआई 450 के ऊपर चले जाते हैं, तो सबसे सख्त ग्रैप-4 लागू किया जाता है.
किन चीजों पर रहेगा कड़ा प्रतिबंध?
ग्रैप-1 लागू होते ही सबसे पहला असर होटल, रेस्तरां और सड़क किनारे चलने वाले ढाबों पर पड़ता है. इस चरण के तहत खुले में कोयले और लकड़ी के ईंधन वाले तंदूरों के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाता है. अधिकारियों का मानना है कि कोयले और लकड़ी से निकलने वाला धुआं स्थानीय स्तर पर हवा को बहुत ज्यादा प्रदूषित करता है. होटल और भोजनालयों को अब बिजली या गैस आधारित विकल्पों का इस्तेमाल करना होगा. इसका उल्लंघन करने वाले संचालकों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान भी किया गया है.
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डीजल जनरेटर और निर्माण कार्यों पर नजर
प्रदूषण को रोकने के लिए ग्रैप-1 के दौरान डीजल जनरेटर के उपयोग पर भी कड़ी नजर रखी जाती है. केवल बहुत ही आपातकालीन स्थितियों या अनिवार्य सेवाओं के लिए ही डीजल जनरेटर चलाने की अनुमति होती है. इसके अलावा, निर्माण स्थलों पर धूल को उड़ने से रोकने के लिए नियमों का सख्ती से पालन करना अनिवार्य है. निर्माण सामग्री को ढककर रखना और समय-समय पर पानी का छिड़काव करना जरूरी है. यदि कोई एजेंसी इन नियमों का पालन नहीं करती, तो उस पर तुरंत रोक लगाई जा सकती है.
खुले में कचरा जलाने पर सख्त पाबंदी
ग्रैप के पहले चरण में खुले में कचरा जलाना एक गंभीर अपराध माना जाता है. सभी स्थानीय निकायों और संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखें, ताकि कोई भी कूड़ा न जला सके. कचरे के प्रबंधन के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं ताकि धूल के कण हवा में न मिलें. इसके साथ ही सड़कों पर धूल कम करने के लिए मशीनों से सफाई और पानी के छिड़काव की प्रक्रिया को भी तेज कर दिया गया है.
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