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आज भी 1950 में जी रहा है ये देश, न इंटरनेट न टीवी… वजह जानकर चौंक जाएंगे आप

इन कैफे तक पहुंचने के लिए आपको कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. यहां घर-घर में वाई-फाई की सुविधा नहीं है. यह सब जानकर आप सोच सकते हैं कि लोग पुराने जमाने की तरह जीवन जीते हैं

अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में स्थित इरिट्रिया एक ऐसा देश है, जो बाहरी दुनिया से काफी अलग-थलग पड़ा हुआ लगता है. अगर आप सोच रहे हैं कि यह कोई पुरानी तस्वीर है या इतिहास की किताबों में कोई शहर है, तो आपको जानकर हैरानी होगी कि यह आज भी हमारे समय में मौजूद है. यहां के लोग डिजिटल दुनिया से लगभग कट चुके हैं. इंटरनेट का यूज बेहद सीमित है, मोबाइल डेटा नाम की कोई चीज लगभग नहीं है, और अगर आप कोई मैसेज भेजते हैं, तो उसे भेजने में मिनटों नहीं, बल्कि 20–25 मिनट लग जाते हैं. 

इरिट्रिया की राजधानी अस्मारा में छोटे-छोटे कैफे हैं जहां जाकर इंटरनेट यूज किया जा सकता है. इन कैफे तक पहुंचने के लिए आपको कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. यहां घर-घर में वाई-फाई की सुविधा नहीं है. यह सब जानकर आप सोच सकते हैं कि लोग पुराने जमाने की तरह जीवन जीते हैं. हालांकि, इसके बावजूद इरिट्रिया की लाइफस्टाइल में एक अलग ही सुंदरता और सामुदायिक जुड़ाव देखने को मिलता है. बच्चे मोबाइल या टीवी में नहीं उलझे हैं, बल्कि खेल-कूद और पारंपरिक गतिविधियों में लगे रहते हैं. लोग एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, अपने पड़ोसियों और समुदाय के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखते हैं. यहां की छोटी-बड़ी गलियां, बाजार और सार्वजनिक स्थल जीवंत और जिंदा महसूस कराते हैं. 
 
इरिट्रिया का इतिहास

इरिट्रिया का इतिहास बहुत पुराना और दिलचस्प है. प्राचीन समय में यह क्षेत्र व्यापार का एक जरूरी केंद्र था, खासकर लाल सागर के किनारे बसे बंदरगाहों के कारण, सन् 100 ईस्वी तक अक्सुम नामक राज्य इस क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति बन चुका था. यहां के लोग अन्य सभ्यताओं के साथ व्यापार करते थे और यह क्षेत्र सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से समृद्ध था. 

12वीं शताब्दी के आसपास इथियोपियाई और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों का शासन रहा, लेकिन पठारी इलाकों में स्थानीय शासक और सामंतों का प्रभुत्व था. इरिट्रिया हमेशा बड़े बाहरी शक्तियों और सामरिक महत्व वाले देशों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा. 

औपनिवेशिक काल और संघर्ष

19वीं और 20वीं सदी में इरिट्रिया का नियंत्रण कई शक्तियों के हाथों में रहा. पहले ओटोमन साम्राज्य और मिस्रियों ने यहां शासन किया. बाद में, इटली ने इसे उपनिवेश बना लिया. इटालियंस ने शहरों और बंदरगाहों को आधुनिक रूप दिया, रेलवे और सड़कें बनाई, और शहरों में औद्योगिक विकास किया.

लेकिन स्थानीय लोगों के लिए जीवन हमेशा कठिन रहा. इटालियंस ने ज्यादातर समृद्ध भूमि अपने लिए रख ली, शिक्षा की सुविधा सीमित रही और स्थानीय लोगों को केवल मजदूरी और सैनिक सेवा के लिए उपयोग किया गया.

इथियोपिया के साथ संघ और स्वतंत्रता संग्राम

1950 में, संयुक्त राष्ट्र ने इरिट्रिया को इथियोपिया के साथ एक संघ में जोड़ने का निर्णय लिया. इसका उद्देश्य था कि इरिट्रिया को कुछ स्वायत्तता दी जाए. परंतु यह योजना विफल रही. इथियोपियाई सरकार ने इरिट्रिया के संविधान का पालन नहीं किया और स्थानीय लोगों की भाषाई और सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया.

इसके परिणामस्वरूप, 1960 में मुसलमानों और स्थानीय नेताओं ने स्वतंत्रता के लिए सशस्त्र संघर्ष शुरू किया. इरिट्रिया मुक्ति मोर्चा (ELF) और बाद में EPLF के माध्यम से लंबा संघर्ष चला, जो लगभग तीन दशकों तक जारी रहा. इस संघर्ष के दौरान, लोगों में एकता और राष्ट्रीय चेतना पैदा हुई. 1991 में ईपीएलएफ ने इथियोपियाई सेना को पराजित किया और 1993 में इरिट्रिया स्वतंत्र देश बन गया. इसके बाद से इरिट्रिया में राजनीतिक स्थिरता आई, लेकिन व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवाधिकारों पर प्रतिबंध जारी रहे.

आज का इरिट्रिया

आज भी इरिट्रिया में इंटरनेट और आधुनिक तकनीक की पहुंच सीमित है. लोग पुराने तरीके से जीवन जीते हैं. सरकारी नियंत्रण बहुत कड़ा है, और स्वतंत्रता की सीमाएं काफी कम हैं. युवा लोगों के लिए देश छोड़ना और विदेश में जीवन तलाशना एक आम बात है. लेकिन इसी कड़ी जीवन शैली में भी, इरिट्रिया के लोग समुदाय और परिवार के साथ जुड़े हुए हैं. बच्चे मोबाइल और टीवी की बजाय खेल-कूद और सामाजिक गतिविधियों में व्यस्त हैं. सड़कें, बाज़ार और छोटे कैफ़े स्थानीय जीवन की सच्ची झलक दिखाते हैं. इरिट्रिया एक ऐसा देश है जहां तकनीक और आधुनिकता की कमी है, लेकिन जीवन का पारंपरिक रंग और सामुदायिक जुड़ाव अब भी जीवित है. यह देश सच में 1950 के दशक जैसा लगता है, और यह अनुभव करने पर ही आप इसकी अनूठी स्थिति और जीवन शैली को समझ सकते हैं.

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