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हज और उमराह में क्या होता है फर्क? जानिए इस्लाम में दोनों का महत्व

जिस तरह हिंदू धर्म में चारधाम का महत्व है ठीक उसी तरह मुस्लिम धर्म में हज और उमराह का महत्व है. लाखों की संख्या में लोग सऊदी अरब के मक्का हज और उमराह के लिए जाते हैं. लेकिन ये दोनों अलग कैसे हैं.

इस्लाम धर्म में हज और उमराह दो महत्वपूर्ण धार्मिक यात्राएं हैं. हर मुसलमान के दिल में ये तमन्ना होती है कि अपनी जिंदगी में वो एक बार हज करने जरूर जाएगा क्योंकि हज करना शुभ माना जाता है. दुनिया के कोने-कोने से लोग हज करने सऊदी अरब जाते हैं. यहां मक्का-मदीना में हज करके अपने दिल की मुराद पूरी करते हैं.  लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है? हज, उमराह से किस तरह अलग है और इनका इस्लामी परंपराओं में क्या महत्व है? आइये जानते हैं.

क्या होती है हज यात्रा?

सबसे पहले बात करते हैं हज की. हज इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है और इसे हर उस मुसलमान के लिए अनिवार्य माना जाता है, जो शारीरिक और आर्थिक रूप से सक्षम हो. हज यात्रा इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने में की जाती है और यह कई दिनों तक चलता है. यह एक सामूहिक तीर्थयात्रा है जिसमें लाखों लोग शामिल होते हैं. हज और उमराह दोनों के लिए मुसलमान सऊदी अरब के शहर मक्का जाते हैं. हज के दौरान तीर्थयात्री कई अनुष्ठान करते हैं जैसे तवाफ (काबा के चारों ओर सात चक्कर लगाना), सई (सफा और मारवाह पहाड़ियों के बीच सात बार दौड़ना) और अराफात में प्रार्थना. यह तीर्थयात्रा पैगंबर इब्राहिम और उनके परिवार की याद में की जाती है और इसे पापों से मुक्ति का एक रास्ता माना जाता है. हज यात्रा कई दिनों तक चलती है और ज्यादा खर्चीली भी होती है.

हज से कैसे अलग है उमराह?

दूसरी ओर मक्का की जियारत को उमराह कहते हैं. उमराह को हज का ही छोटा रूप भी कहा जाता है. उमराह का मतलब आबादी वाली जगह से है जहां एक साथ बड़ी आबादी इकट्ठा होती है. उमराह में हज के कुछ मुख्य अनुष्ठानों को ही शामिल किया जाता है जैसे तवाफ. इसमें लोग काबा के चारों तरफ तवाफ करते हैं जिनका तवाफ पूरा हो जाता है उनका उमराह मुकम्मल माना जाता है. हज के मुकाबले उमराह कम समय में पूरा किया जा सकता है और कम खर्चीला होता है. उमराह के दौरान कुरान पढ़ी जाती है और अल्लाह की इबादत सच्चे मन से की जाती है. उमराह भले ही छोटा हो, लेकिन इसका आध्यात्मिक महत्व कम नहीं है. यह अल्लाह के प्रति भक्ति और विनम्रता का प्रतीक है.

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About the author नेहा सिंह

नेहा सिंह बीते 6 साल से डिजिटल मीडिया की दुनिया से जुड़ी हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जनपद से ताल्लुक रखती हैं. इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद हैदराबाद स्थित ईटीवी भारत से साल 2019 में अपने करियर की शुरुआत की. यहां पर दो साल तक बतौर कंटेट एडिटर के पद पर काम किया इस दौरान उन्हें एंकरिंग का भी मौका मिला जिसमें उन्होंने बेहतरीन काम किया.

फिर देश की राजधानी दिल्ली का रुख किया, यहां प्रतिष्ठित चैनलों में काम कर कलम को धार दी. पहले इंडिया अहेड के साथ जुड़ीं और कंटेंट के साथ-साथ वीडियो सेक्शन में काम किया. 

इसके बाद नेहा ने मेनस्ट्रीम चैनल जी न्यूज में मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर के पद पर अपनी सेवाएं दीं. जी न्यूज में रहते हुए नेशनल और इंटरनेशनल मुद्दों पर एक्सप्लेनर वीडियो क्रिएट किए.

इसी बीच प्रयागराज महाकुंभ के दौरान कुलवृक्ष संस्थान से जुड़कर महाकुंभ भी कवर किया, साधु-संतों का इंटरव्यू किया. लोगों से बातचीत करके उनके कुंभ के अनुभव और समस्याओं को जाना.

वर्तमान में नेहा एबीपी लाइव में कार्यरत हैं, जहां पर नॉलेज सेक्शन में ऐसी खबरों को एक्सप्लेन करती हैं, जिनके बारे में आम पाठक को रुचि होती है.

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