B1 Bridge Attack: जंग में दुश्मन देश के ब्रिज ही क्यों होते हैं टारगेट, इनकी तबाही से कितना पड़ता है फर्क?
B1 Bridge Attack: हाल ही में ईरान के B1 पुल को निशाना बनाया गया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि युद्ध के दौरान पुलों को निशाना आखिर क्यों बनाया जाता है.

B1 Bridge Attack: मिडिल ईस्ट में जैसे-जैसे संघर्ष तेज हो रहा है ईरान-इजरायल तनाव से लेकर पिछली लड़ाइयों तक एक पैटर्न बार-बार सामने आता है. यह पैटर्न है कि पुल अक्सर मुख्य निशाना बन जाते हैं. ईरान के B1 पुल को हाल ही में निशाना बनाया गया है. लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर पुलों को क्यों नुकसान पहुंचाया जाता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.
सैन्य लॉजिस्टिक्स की रीढ़
किसी भी युद्ध में सप्लाई लाइनें ही सब कुछ होती हैं. सेना ईंधन, गोला-बारूद, भोजन और सैनिकों की लगातार सप्लाई पर निर्भर रहती है. पुल इस कड़ी में एक जरूरी जोड़ने वाला काम करते हैं. किसी पुल को नष्ट करने से यह सप्लाई तुरंत रुक जाती है. इससे पहली पंक्ति के सैनिक असुरक्षित हो जाते हैं और लड़ाई जारी रखने की उनकी क्षमता कमजोर पड़ जाती है.
अतिरिक्त सैनिकों की सप्लाई रोकना
जब भी कोई पुल नष्ट हो जाता है तो इसका असर सिर्फ सप्लाई पर नहीं पड़ता. आने वाली मदद भी रुक जाती है. अगर सैनिक घिरे हुए हों या फिर उन पर जोरदार हमला हो रहा हो तो अतिरिक्त सैनिक समय पर उन तक नहीं पहुंच पाते. यह अकेलापन तेजी से लड़ाई का रुख बदल सकता है.
भारी सैन्य आवाजाही रोकना
आधुनिक युद्ध टैंक, मिसाइल प्रणाली और बख्तरबंद वाहनों पर काफी ज्यादा निर्भर करता है. सैनिकों के उलट ये पुलों के बिना नदियों या फिर मुश्किल इलाकों को आसानी से पार नहीं कर सकते. किसी पुल को नष्ट करने से दुश्मन की भारी मारक क्षमता तैनात करने की क्षमता सीमित हो जाती है.
भागने के लिए रास्ते रोकना
पीछे हटने के दौरान भी पुल काफी जरूरी होता है. अगर कोई सेना पीछे हटने की कोशिश करती है तो मुख्य पुल को नष्ट करके उन्हें फंसाया जा सकता है. इससे उनके भागने के रास्ते बंद हो जाते हैं.
आर्थिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव
इन सबके अलावा पुल आम लोगों के जीवन और व्यापार के लिए भी काफी जरूर होते हैं. उनके नष्ट होने से परिवहन बाधित होता है, व्यवसायों पर असर पड़ता है और लोगों में दहशत फैल जाती है.
रूस यूक्रेन युद्ध के दौरान पुल पर हमला
इतिहास में भी कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं कि कैसे पुलों को निशाना बनाने से युद्ध पर असर पड़ सकता है. रूस यूक्रेन युद्ध के दौरान केर्च पुल पर बार-बार हुए हमलों ने रूस की सप्लाई लाइनों को बाधित कर दिया था.
इसी के साथ 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में पंजाब में हुसैनीवाला पुल को दुश्मन के आगे बढ़ते टैंकों को रोकने के लिए नष्ट कर दिया गया था. इसी तरह बांग्लादेश लिबरेशन वॉर के दौरान पाकिस्तान सेना द्वारा मेघना नदी पर बने पुलों को नष्ट करने का मकसद भारतीय सेना की रफ्तार को धीमा करना था.
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