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50 साल पहले भी सुलग उठा था तुर्कमान गेट, जानें तब से अब तक कितने बदले हालात?

तुर्कमान गेट का नाम सुनते ही दिल्ली के इतिहास का एक ऐसा पेज सामने आता है, जिसने हजारों लोगों की जिंदगी को बदल दिया. दरअसल इमरजेंसी के दौरान यह इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा.

देश की राजधानी दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण पर एमसीडी की बुलडोजर कार्रवाई की गई. दरअसल एमसीडी ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेशों पर अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया है. वहीं अवैध अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आधी रात को शुरू हो गई.

देर रात हुई इस कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने विरोध किया जिसके बाद देखते ही देखते भीड़ आक्रोशित हो गई. आक्रोशित हुई भीड़ ने पुलिस और कार्रवाई कर रही टीम पर पथराव कर दिया. जिसके बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया. हालांकि पुलिस ने आंसू गैस के गोलों और हल्का बल प्रयोग कर हालात पर काबू पा लिया, जिससे फिलहाल स्थिति सामान्य है.

इसी कार्रवाई के चलते राजधानी दिल्ली का तुर्कमान गेट एक बार फिर चर्चा में आ गया, जो 50 साल पहले भी सुलग उठा था. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि तुर्कमान गेट के हालात तब से लेकर अब तक कितने बदले हैं.

इमरजेंसी के दौर में बना था तुर्कमान गेट विवाद का केंद्र

तुर्कमान गेट का नाम सुनते ही दिल्ली के इतिहास का एक ऐसा पेज सामने आता है, जिसने हजारों लोगों की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया. दरअसल इमरजेंसी के दौरान यह इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा. उस समय सरकार की ओर से डवलपमेंट और अतिक्रमण हटाने के नाम पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई थी.

1976 में इमरजेंसी के दौरान, इंदिरा गांधी की सरकार ने संजय गांधी के कहने पर तुर्कमान गेट इलाके में झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने का अभियान चलाया था. जिसका स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध किया था. जब लोग इस इलाके में अपने घर और रोजगार बचाने के लिए सड़कों पर उतरे, तो हालात बेकाबू हो गए. पुलिस की ओर से लाठीचार्ज, आंसू गैस और गोलीबारी तक की गई. इस दौरान कई लोग घायल हुए और कुछ की मौत की भी बात सामने आई थी. उस समय सरकार की कार्रवाई ने तुर्कमान गेट को पूरे देश में चर्चा का विषय बना दिया था. इसके अलावा बताया जाता है कि उस समय सरकार ने मीडिया पर रोक लगा दी थी इसलिए घटना की जानकारी विदेशी मीडिया से ही मिली थी.

तुर्कमान गेट जबरन नसबंदी की वजह से भी रहा चर्चा में

इमरजेंसी के समय हुई कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में लोगों को तुर्कमान गेट से हटाकर नंद नगरी जैसे इलाकों में बसाया गया. शुरुआती दिनों में वहां बुनियादी सुविधाओं का अभाव था. न पानी, न पक्के मकान और न ही टॉयलेट जैसी सुविधाएं थी. कई परिवारों को नई जगह पर जीवन शुरू करने में वर्षों लग गए. इसके अलावा तुर्कमान गेट उस दौर में जबरन नसबंदी अभियान की वजह से भी चर्चा में रहा.

जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर चलाए गए इस अभियान से लोगों में डर का माहौल था. कई मामलों में लोगों पर दबाव डालकर नसबंदी कराई गई, जिसे लेकर स्थानीय आबादी में भारी नाराजगी देखने को मिली थी.

इंटरनेशनल स्तर पर पहुंच गया था मामला

तुर्कमान गेट में हुई कार्रवाई की आलोचना सिर्फ देश तक सीमित नहीं रही. सरकार की कार्रवाई की इंटरनेशनल स्तर पर भी आलोचना हुई. जिसके बाद सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े और डवलपमेंट की रफ्तार धीमी कर दी गई. हालांकि आधिकारिक तौर पर लंबे समय तक यह स्वीकार नहीं किया गया कि कार्रवाई में ज्यादती हुई थी. समय के साथ तुर्कमान गेट के हालात तो बदले हैं, लेकिन यह इलाका आज भी बहुत संवेदनशील माना जाता है. अतिक्रमण हटाने या प्रशासनिक कार्रवाई होते ही यहां तनाव की स्थिति बन जाती है. 

ये भी पढ़ें-किसने बनवाई थी दिल्ली की फैज-ए-इलाही मस्जिद, जिसके पास एमसीडी ने जमकर की तोड़फोड़?

कविता एबीपी नेटवर्क नोएडा के साथ बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही है. वर्तमान में कविता का मुख्य फोकस शिक्षा, करियर और नौकरी से जुड़ी खबरों पर रहता है.

करीब 3.5 साल से पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी कव‍िता एबीपी नेटवर्क से पहले राजस्थान पत्रिका में काम कर चुकी है. यहां  उन्होंने नेशनल एडिशन और अलग-अलग सप्लीमेंट्स के लिए काम किया. राजस्थान पत्रिका में करियर की उड़ान और सी न्यूज जैसे कॉलम वह कवर करती थी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो के साथ काम करने का अवसर मिला, जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन की बारीकियों को समझने का अनुभव दिया. वहीं पत्रकारिता के अलावा कविता की खास रुचि खेल, विशेष रूप से क्रिकेट में है. राजस्थान पत्रिका में रहते हुए कविता ने मदर्स डे स्पेशल स्पोर्ट्स एडिशन में भी काम किया है.

पढ़ाई की बात करें तो कविता ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की.

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