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Tihar Jail Food Menu: कैसी होती है तिहाड़ जेल के कैदियों की थाली, जानें किन चीजों की डिमांड कर सकते हैं अपराधी?

तिहाड़ जेल में बंद एक अमेरिकी कैदी ने पास्ता और चिकन जैसी चीजों की डिमांड की है. चलिए जानें कि तिहाड़ जेल में बंद कैदी को किस तरह का खाना दिया जाता है और उनकी थाली में क्या-क्या होता है.

Tihar Jail Food Menu: भारत-म्यांमार सीमा के पास आतंकी साजिश रचने के आरोप में तिहाड़ जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे एक अमेरिकी कैदी मैथ्यू आरोन वैनडाइक की वीआईपी डिमांड ने इस वक्त जेल प्रशासन के होश उड़ा रखे है. इस विदेशी कैदी ने जेल में खुद खाना बनाने की मंजूरी मांगने के साथ ही अपने लिए पास्ता, ऑलिव ऑयल, चिकन, रेड मीट, टोन्ड मिल्क, सोया मिल्क और बोतल बंद पानी जैसी चीजों की लंबी-चौड़ी लिस्ट सौंपी है. इस अनोखी फरमाइश के बाद देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल में बंद अपराधियों की असली डाइट और उनकी थाली की चर्चाएं तेज हो गई हैं.

तिहाड़ का सख्त डेली मील प्लान

दिल्ली की तिहाड़ जेल में किसी भी कैदी को उसकी मर्जी का खाना नहीं दिया जाता है. तिहाड़ प्रशासन यहां बंद करीब 14,000 कैदियों और रोहिणी व मंडोली जेल परिसरों के अन्य 6000 कैदियों को मिलाकर रोजाना कुल 20,000 कैदियों के लिए डाइटिशियन द्वारा तय  किया गया एक फिक्स मेन्यू ही परोसता है. जेल के नियमों के तहत सभी कैदियों को दिनभर में चार वक्त का खाना-नाश्ता दिया जाता है. इसमें सुबह 7 बजे के करीब चाय के साथ ब्रेड या बिस्कुट और पूरी-सब्जी या खिचड़ी के साथ शुरुआत होती है. इसके बाद सुबह 11 बजे दोपहर के खाने में चार रोटी, दाल और कोई सीजनल सब्जी शामिल होती है. फिर शाम को 3:30 बजे के करीब दोबारा चाय-बिस्कुट दिया जाता है. इसके बाद शाम 6 या 6:30 बजे रात के खाने में चार रोटी, दाल और सीजनल सब्जी शामिल होती है. कैदी रोटी की जगह चावल भी लो सकते हैं.

कैदियों की थाली का सटीक वजन और पोषण

तिहाड़ जेल प्रशासन हर कैदी के पोषण का ध्यान रखने के लिए बेहद सख्त पैमाना अपनाता है, जहां थाली में परोसे जाने वाले भोजन के एक-एक ग्राम का पूरा हिसाब रखा जाता है. जेल मैन्युअल के अनुसार, हर कैदी को रोजाना 600 ग्राम अनाज, 100 ग्राम दाल, 270 ग्राम हरी सब्जियां, 30 ग्राम खाद्य तेल, 30 ग्राम नमक और 20 ग्राम गुड़ के साथ तय मात्रा में मसाले दिए जाते हैं. कैदियों के शरीर में प्रोटीन की कमी न हो, इसके लिए हफ्ते में दो दिन अंडा या 100 ग्राम सोयाबीन उत्पाद और दो दिन दूध दिया जाता है. हालांकि शाकाहारी या सामान्य कैदियों को अंडा सिर्फ मेडिकल ऑफिसर की लिखित सिफारिश पर ही मिलता है.

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खाने में कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट का खास ध्यान

कैदियों के लिए तैयार किया जाने वाला यह खाना कोई साधारण भोजन नहीं होता है, बल्कि इसे पूरी तरह से वैज्ञानिक आधार पर तैयार किया जाता है, ताकि जेल में वे बीमार न पड़ें. डाइटिशियन इस पूरे मेन्यू को इस तरह बनाते हैं कि हर कैदी को दैनिक रूप से 300 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 50 ग्राम फैट मिल सके. इसके साथ ही कैदी के शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम पर एक ग्राम प्रोटीन की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है. जेल के इस तय भोजन से कैदियों को आवश्यक मात्रा में कैल्शियम, आयरन और जरूरी विटामिंस भी मिल जाते हैं. गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बीमार कैदियों को विशेष डाइट दी जाती है.

कैदियों के खाने का सालाना बजट कितना?

इतनी भारी-भरकम संख्या में कैदियों के लिए सुबह-शाम का खाना तैयार करना किसी छोटे शहर के लिए लंगर चलाने जितना चुनौतीपूर्ण काम है. इस पूरे भोजन को तैयार करने की जिम्मेदारी जेल के अंदर ही कैदियों की एक खास टीम की होती है, जो कड़े सुपरविजन में काम करती है. तिहाड़ जेल में सिर्फ कैदियों के सालाना भोजन का कुल बजट ही 600 करोड़ रुपये से ज्यादा बैठता है. इसके अलावा तिहाड़ जेल प्रशासन TJ ब्रांड नाम से अपनी खुद की एक फूड प्रोडक्शन यूनिट भी चलाता है, जहां कैदी खुद बेकरी उत्पाद, मसाले, अचार, पापड़ और नमकीन तैयार करते हैं.

जेल की स्मार्ट कार्ड कैंटीन

जेल नियमों के अनुसार अगर किसी कैदी को बैरक के साधारण खाने से कुछ अलग खाने की इच्छा होती है तो वह जेल परिसर के अंदर मौजूद कैंटीन का रुख करता है. कैदी अपनी जेब से पैसे देकर इस कैंटीन से बिस्कुट, नमकीन, बन, चाय और पैकेज्ड नारियल पानी जैसी चीजें खरीद सकते हैं. हालांकि इस कैंटीन में सिर्फ वही चीजें मिलती हैं जो कि जेल नियमों के तहत स्वीकृत हैं.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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