इस देश की मिलिट्री ट्रेनिंग सबसे ज्यादा मुश्किल, छूट जाते हैं अच्छे-अच्छों के पसीने
Toughest Military Training: दुनिया में कुछ ऐसे देश है जिनकी मिलिट्री ट्रेनिंग सबसे ज्यादा मुश्किल होती है. आइए जानते हैं इस बारे में पूरी जानकारी.

- भारतीय मार्कोस, अल्फा ग्रुप भी कठोर प्रशिक्षण अभ्यास करते हैं।
Toughest Military Training: सैनिक बनना काफी मुश्किल है लेकिन दुनिया के टॉप स्पेशल फोर्सेज में जगह बनाना एक अलग ही चुनौती है. अमेरिका, ब्रिटेन, भारत, रूस और फ्रांस जैसे देश अपने खास कमांडो को ऐसे ट्रेनिंग प्रोग्राम से गुजारते हैं जिन्हें दुनिया के सबसे मुश्किल प्रोग्राम में से एक माना जाता है. इनमें रिजेक्शन रेट अक्सर 85% से 90% होता है. साथ ही यह प्रोग्राम कैंडीडेट्स की शारीरिक और मानसिक क्षमता को उनकी आखिरी हद तक परखने के लिए बनाए जाते हैं.
स्पेशल फोर्सेज की ट्रेनिंग इतनी मुश्किल क्यों?
आम मिलिट्री ट्रेनिंग के उलट स्पेशल फोर्सेज का सिलेक्शन सैनिकों को आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन, बंधकों को छुड़ाने, और साथ ही गुप्त युद्ध जैसे जोखिम भरे मिशन के लिए तैयार करने पर केंद्रित होता है. ऐसी स्थिति में सैनिकों को तब भी काम करते रहना पड़ता है जब वे थके हुए, भूखे, घायल या फिर अकेले हों. इस वजह से ट्रेनिंग को जानबूझकर ऐसे मुश्किल हालात बनाने के लिए डिजाइन किया जाता है जिनका सामना उन्हें असली लड़ाई के दौरान करना पड़ सकता है.

यूएस नेवी SEALs
यूएस नेवी SEALs की ट्रेनिंग को दुनिया के सबसे कठोर मिलिट्री सिलेक्शन प्रोग्राम में से एक माना जाता है. हेल वीक के दौरान कैंडिडेट्स को 5 से 6 दिनों तक लगातार ट्रेनिंग करनी पड़ती है और उन्हें काफी कम नींद मिलती है. वे जमा देने वाले ठंडे पानी, गहरे कीचड़, लंबी दूरी की दौड़, बाधाओं वाले कोर्स और शारीरिक रूप से थका देने वाली ड्रिल का सामना करते हैं.
एक और जानी-मानी चुनौती ड्राउन प्रूफिंग है. इसमें ट्रेनीज के हाथ-पैर बांधकर उन्हें गहरे पानी में फेंक दिया जाता है. बंधे होने के बावजूद उन्हें शांत रहना होता है, पानी की सतह पर बने रहना होता है और बिना घबराए तैरने की एक्सरसाइज पूरी करनी होती है.
ब्रिटिश स्पेशल एयर सर्विस
ब्रिटेन की स्पेशल एयर सर्विस के सिलेक्शन प्रोसेस में भी उतना ही डर लगता है क्योंकि 90% से ज्यादा कैंडीडेट्स इसमें सफल नहीं हो पाते. कैंडिडेट्स को ऊबड़-खाबड़ पहाड़ों और जंगलों में 25 किलोग्राम से ज्यादा वजन वाले बैकपैक लेकर लंबी दूरी को तय करना होता है.
शारीरिक चुनौती के बाद जबरदस्त मानसिक टेस्ट होता है. नकली पूछताछ के जरिए कैंडिडेट पर काफी ज्यादा मानसिक दबाव डाला जाता है. ताकि यह पता चल सके कि क्या वह पूछताछ का सामना कर सकते हैं, शांत रह सकते हैं और काफी ज्यादा तनावपूर्ण स्थिति में भी संवेदनशील जानकारी के सुरक्षा रख सकते हैं.

भारत की पैरा SF और MARCOS
पैरा स्पेशल फोर्स 90 दिनों की एक काफी कठिन सिलेक्शन प्रक्रिया से गुजरती है. इसमें लगभग 20 से 22 किलोग्राम वजन का भारी सामान उठाकर लंबी दूरी तक मार्च करना शामिल है. कैंडीडेट्स को शारीरिक और मानसिक रूप से थका देने वाली ड्रिल से गुजरना पड़ता है जो काफी ज्यादा तनाव में उनके हौसले की परीक्षा लेने के लिए बनाई गई है.
इसी के साथ भारतीय नौसेना के MARCOS कमांडो भी उतनी ही मुश्किल सिलेक्शन प्रक्रिया से गुजरते हैं. उनकी शुरुआती ट्रेनिंग मशहूर हेल वीक जैसी होती है. इसमें सैनिकों को बिना सोए जांघ तक गहरे कीचड़ में भारी सामान उठाकर दौड़ना पड़ता है.
रूस का अल्फा ग्रुप
रूस का खास अल्फा ग्रुप अपनी काफी ज्यादा मुश्किल कॉम्बैट ट्रेनिंग के लिए जाना जाता है. आत्मविश्वास बढ़ाने वाली एक एक्सरसाइज में बुलेट प्रूफ वेस्ट पहनकर सैनिक एक दूसरे की छाती पर असली गोलियां चलाते हैं. ताकि वे अपने सुरक्षा उपकरणों पर भरोसा कर सकें और काफी ज्यादा दबाव में भी शांत रह सकें.
ट्रेनिंग का आखिरी चरण भी उतना ही कठोर होता है. कई दिनों तक थका देने वाली शारीरिक गतिविधि के बाद ट्रेनीज को ताजे और काफी आक्रामक विरोधियों से आमने-सामने की लड़ाई लड़नी पड़ती है. इसमें उन्हें पूरी तरह थक जाने के बावजूद अपनी शारीरिक सहनशक्ति और लड़ने की क्षमता दिखानी होती है.
फ्रांस का फॉरेन लीजन
फ्रांस का फॉरेन लीजन दुनिया भर से रिक्रूट्स को भर्ती करता है. लेकिन इसकी ट्रेनिंग आम नागरिकों को मानसिक रूप से अनुशासित सैनिकों में बदलने के लिए बनाई गई है. कैंडिडेट्स को लंबे समय तक शारीरिक कठिनाई, खाने की कमी, नींद ना मिलने और कठोर मौसम का सामना करना पड़ता है. भले ही रेगिस्तान हो, घना जंगल हो या फिर बर्फ से ढके पहाड़ रिक्रूटस को हर तरह के इलाके में ढलने और जीवित रहने की ट्रेनिंग दी जाती है.
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