इजरायल की 'ब्लैक विडो' नहीं ये है दुनिया की सबसे खतरनाक महिला जासूस, जिसके इशारे पर नाचता था पूरा यूरोप
मोसाद की महिला जासूस ने ईरान में पूरे ऑपरेशन को इतनी चालाकी से अंजाम दिया कि उसे अब 'ब्लैक विडो' कहा जा रहा है, लेकिन हम आपको एक ऐसी महिला जासूस की कहानी बताएंगे, जिसने पूरे यूरोप को इशारो नचाया था.

इजरायल ने 13 जून को ईरान पर ऑपरेशन राइजिंग लॉयन लॉन्च किया था. इस ऑपरेशन का टारगेट ईरान की न्यूक्लियर फैसिलिटी को पूरी तरह तबाह करना था. इजरायल के फाइटर जेट्स ने न सिर्फ परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया, बल्कि न्यूक्लियर साइंटिस्ट्स और शीर्ष सैन्य अधिकारियों को भी मौत के घाट उतार दिया. यह ईरान के लिए बड़ा झटका था, क्योंकि इजरायल के हमले इतने सटीक थे कि उन्हें हर परमाणु वैज्ञानिक और सैन्य अधिकारी की रियल टाइम लोकेशन तक पता थी.
इन हमलों के बार ईरान में जांच शुरू हुई तो सामने आया मोसाद की खतरनाक लेडी जासूस एजेंट कैथरीन पेरेज शेकेड का नाम. फ्रांसीसी मूल की इस जासूस ने पूरे ऑपरेशन को इतनी चालाकी से अंजाम दिया कि उसे अब 'ब्लैक विडो' कहा जा रहा है. यह ब्लैक विडो अब मोसाद की सबसे सफल और चर्चित जासूस बन चुकी है, लेकिन हम आपको यहां एक ऐसी महिला जासूस की कहानी बताएंगे, जिसने पूरे यूरोप को अपने इशारे पर नचाया था और उसे अब तक दुनिया का सबसे खतरनाक जासूस माना जाता है.
माता हारी की कहानी...
यह कहानी है जासूसी की दुनिया की सबसे रहस्यमयी और चर्चित जासूस माता हारी की. 1876 में नीदरलैंड में जन्मी गेरत्रुद मार्गरेट जेले जासूसी की दुनिया में माता हारी के नाम से जानी जाती हैं. उन्होंने बतौर डांसर अपना काम शुरू किया था और इसी काम को करने के लिए वह 1905 में फ्रांस की राजधानी पेरिस आ गई. माता हारी की अदाओं और खूबसूरती का पूरा यूरोप दीवाना हो गया. यहां तक कि फ्रांस और जर्मनी की सेना के कई शीर्ष अधिकारी उनका डांस देखने आने लगे. यहीं से माता हारी की जासूसी का चैप्टर भी शुरू हुआ. मात हारी ने अपनी अदाओं का दीवाना बनाकर जर्मनी सैनिकों के कई राज फ्रांस सरकार को दिए. हालांकि, यह भी कहा जाता है कि वह एक डबल एजेंट थीं और हिटलर की सेना के लिए भी जासूसी कर रही थीं.
1917 में हुई थी गिफ्तार
जर्मनी के लिए जासूसी करने के आरोप में माता हारी को 1917 में गिरफ्तार कर लिया गया. कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां उन्होंने यह बात कभी स्वीकार नहीं की कि वह एक जासूस हैं. उन्होंने खुद को हमेशा एक डांसर के तौर पर ही पेश किया. हालांकि, जासूसी के आरोप सिद्ध होने के बाद उन्हें मौत की सजा दी गई. माता हारी की आंखों पर पट्टी बांधकर उन्हें गोलियों से भून दिया गया. माता हारी की मौत के बाद यह रहस्य ही रह गया कि वह फ्रांस के लिए जासूसी कर रही थीं या फिर जर्मनी के लिए. हालांकि, यह बात सब जानते थे कि फ्रांस और जर्मनी की सेना के लगभग सभी शीर्ष अधिकारी माता हारी को अपने राज बता चुके थे.
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