इस बार निर्मला सीतारमण ने किस राज्य की साड़ी पहनी, क्या है इसकी खासियत?
Nirmala Sitharaman Saree on Budget Day: निर्मला सीतारमण की बजट डे साड़ी अब सिर्फ फैशन नहीं रह गई है, बल्कि यह भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा, कारीगरों की मेहनत और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन चुकी है.

Nirmala Sitharaman Saree on Budget Day: हर साल जब केंद्रीय बजट पेश होता है तो देशभर की निगाहें सरकार की आर्थिक नीतियों और बड़े फैसलों पर टिकी होती हैं. लेकिन पिछले कई वर्षों से बजट के दिन एक और चीज लोगों का ध्यान खींचती है, वह केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की साड़ी भी है. बजट भाषण से पहले ही उनका पहनावा चर्चा में आ जाता है. लोग सिर्फ यह नहीं जानना चाहते कि बजट में क्या ऐलान हुआ, बल्कि यह भी देखना चाहते हैं कि इस बार वित्त मंत्री किस राज्य की पारंपरिक साड़ी पहनकर संसद पहुंचीं.
निर्मला सीतारमण की बजट डे साड़ी अब सिर्फ फैशन नहीं रह गई है, बल्कि यह भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा, कारीगरों की मेहनत और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बन चुकी है. हर साल उनकी साड़ी देश के किसी न किसी कोने की कला और बुनाई को सामने लाती है. यही वजह है कि उनका बजट लुक आम लोगों से लेकर फैशन और कला के जानकारों तक के बीच खास चर्चा का विषय बन जाता है. तो आइए जानते हैं कि इस बार निर्मला सीतारमण ने किस राज्य की साड़ी पहनी है और इसकी खासियत क्या है.
बजट 2026 में निर्मला सीतारमण ने किस राज्य की साड़ी पहनी?
बजट 2026 के दिन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तमिलनाडु राज्य की पारंपरिक कांजीवरम सिल्क साड़ी में नजर आईं. यह साड़ी तमिलनाडु की मशहूर हथकरघा विरासत का हिस्सा है और इसे भारत की सबसे शाही और टिकाऊ साड़ियों में गिना जाता है. इस बार उन्होंने मैजेंटा और बैंगनी रंग की हाथ से बुनी कांजीवरम सिल्क साड़ी पहनी थी, जिसमें सुनहरे जरी का खूबसूरत काम किया गया था. साड़ी का पल्लू और बॉर्डर बेहद अट्रैक्टिव था, जो इसे गंभीर और गरिमापूर्ण लुक दे रहा था. बजट जैसे बड़े और जरूरी अवसर के लिए यह साड़ी पूरी तरह उपयुक्त नजर आई.
कांजीवरम साड़ी की खासियत क्या है?
कांजीवरम साड़ियां अपनी मजबूती, भारी बनावट और शुद्ध रेशम के लिए जानी जाती हैं. इन्हें तमिलनाडु के कांचीपुरम क्षेत्र में हाथ से बुना जाता है. इन साड़ियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें बनाने में शुद्ध मल्बरी सिल्क और सोने-चांदी की जरी का यूज किया जाता है. कांजीवरम साड़ी को तैयार करने में कई दिन लगते हैं और कभी-कभी इसे पूरा करने में दो हफ्तों तक का समय भी लग जाता है. इसमें खास कोरवाई तकनीक का यूज होता है, जिसमें साड़ी का बॉर्डर और शरीर अलग-अलग बुना जाता है, जबकि पल्लू को पेटनी विधि से जोड़ा जाता है. इसी वजह से ये साड़ियां बेहद मजबूत होती हैं और सालों तक खराब नहीं होती हैं.
हर साल क्यों खास होती है बजट डे साड़ी?
निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश कर रही हैं और इस दौरान उनकी साड़ी पसंद भी एक परंपरा बन चुकी है. इससे पहले 2025 में उन्होंने मधुबनी पेंटिंग वाली साड़ी पहनी थी, जो बिहार की लोककला को दर्शाती थी. वह साड़ी उन्हें प्रसिद्ध मधुबनी कलाकार और पद्म पुरस्कार विजेता दुलारी देवी ने गिफ्ट की थी. हर साल उनकी साड़ी भारत के किसी न किसी राज्य की कला, बुनाई और कारीगरों की मेहनत को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाती है. यही कारण है कि उनकी साड़ियां सिर्फ पहनावा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बन जाती हैं.
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Source: IOCL

























